शाहजहांपुर के मोहल्ला ककराकलां में 11 वर्षीय स्वालिया की मौत के बाद उसके पिता नईम और मां शबनम की रात बेटी की याद में कटी। मां तस्वीर को सीने से लगाकर रोती रही। आहट होने पर दरवाजे की ओर झांकने लगती। रोते हुए यही कहती कि या अल्लाह मेरी बेटी को लौटा दे। दर्दभरी रात दंपती ने जागकर काटी।
बड़ी ईदगाह से ककरा की ओर जाने वाले मार्ग पर स्लाटर हाउस से कुछ दूरी पर गली में नईम का मकान है। मूलरूप से सिंधौली के चांदापुर के रहने वाले नईम ने करीब 30 साल पहले मकान बनवाया था, लेकिन आर्थिक रूप से तंगी के चलते घर के कमरे में छत तक नहीं डलवा सके। पूरा परिवार टिन के नीचे रहता है। उनके पास गांव में एक बीघा जमीन है। ऐसे में मेहनत-मजदूरी करने के साथ ही बंटाई पर खेती कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
कुच्चों ने नोचकर मार डाला था
बेटियां भी जरी-जरदोजी का काम कर सहयोग करती थीं। रविवार को खेत में स्वालिया को कुत्तों के झुंड ने नोचकर मार डाला था। रविवार शाम को असिर की नमाज के बाद स्वालिया के शव को पास के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।








