अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध लगातार बढ़ता ही जा रहा है। युद्ध से चमड़ा, केमिकल, कपड़ा, प्लास्टिक उद्योग पर गहरा संकट पड़ चुका है। प्लास्टिक से जुड़ा हर कच्चा माल महंगा होने से इससे जुड़ी हर चीज महंगी हो गई है। आयात वस्तुओं के दाम बढ़ने से स्थितियां बिगड़ रही हैं। इकाइयों का भुगतान भी रुकने लगा है। कारोबारियों का कहना है कि अब प्लास्टिक उद्योग कारोबार केवल 30 प्रतिशत और चमड़ा उद्योग का उत्पादन 40 प्रतिशत पर सिमट गया है।
शहर के कपड़ा, रेडीमेड और होजरी पर भी युद्ध का असर आ चुका है। पेट्रोलियम पदार्थ पर निर्भर उद्योग प्लास्टिक, रसायन कारोबार पर आने वाले समय में और महंगाई बढ़ने की संभावना है। इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा। निर्यातकों के सामने और बड़ी समस्या हो गई है। शिपिंग कंपनियों ने मालभाड़ा और समुद्र जोखिम बीमा तीन से चार गुना पहले ही कर दिया है, जो आगे और बढ़ सकता है। इसके अलावा कच्चा माल महंगा होने से उत्पादों की कीमतों में इजाफा हो गया है।








