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यूपी: प्रदेश से खत्म हुई शिक्षक संगठनों की राजनीति, कभी इन संगठनों का होता था बोल-बाला; पढ़िए पतन की कहानी

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UP: Teachers' unions have ended their politics in the state, once dominant; read their story of decline.

यूपी में शिक्षक संगठनों की राजनीति।
– फोटो : अमर उजाला।

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प्रदेश में शिक्षकों के चुनाव (एमएलसी) में ही शिक्षक संगठनों का डब्बा गोल हो गया है। प्रदेश में यूं तो शिक्षकों के नेतृत्व का दावा करने वाले कई शिक्षक संगठन अलग-अलग नामों से चल रहे हैं लेकिन खंड शिक्षक की आधा दर्जन सीटों पर हुए चुनाव में शिक्षक संगठनों का खाता भी नहीं खुल सका है। खास यह कि खाता खुलना तो एक सीट को छोड़कर किसी भी सीट पर कोई शिक्षक संगठन प्रत्याशी नंबर दो की लड़ाई में भी नहीं रहा।


प्रदेश में 11 सीटों पर हुए एमएलसी चुनाव में माध्यमिक शिक्षक संघ के चार बड़े गुट खंड शिक्षक की छह सीटों पर चुनाव मैदान में उतरे थे। इसमें प्रमुख रूप से माध्यमिक शिक्षक संघ (चंदेल गुट) के प्रदेश अध्यक्ष चेतनारायण सिंह वाराणसी खंड शिक्षक सीट से मैदान में थे। किंतु उन्हें मात्र 3471 वोट मिले। इसी तरह लखनऊ खंड शिक्षक सीट से माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के प्रदेश अध्यक्ष सोहन लाल वर्मा मैदान में थे। किंतु उन्हें मात्र 1940 ही वोट मिले।

इस संघ के महामंत्री राजीव यादव ही इस चुनाव में लड़ाई में दिखे। गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में वह कुछ चरणों में आगे तो कुछ में कांटे की टक्कर अंत तक बनाए रहे। उन्हें 14580 वोट मिले। हालांकि वह जीत नहीं सके। वहीं आगरा खंड शिक्षक सीट पर इस गुट के रणविजय सिंह कहीं लड़ाई में नहीं नजर आए।

इसी तरह माध्यमिक शिक्षक संघ पांडेय गुट के प्रदेश अध्यक्ष जीतेंद्र कुमार पटेल भी इस चुनाव में वाराणसी खंड शिक्षक सीट से मैदान में थे। उन्हें मात्र 1088 वोट मिले। पांडेय गुट ने लखनऊ खंड शिक्षक, गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर भी चुनाव लड़ा लेकिन एक जगह भी लड़ाई में नहीं आए। इसी तरह चंदेल गुट ने प्रदेश की छह सीटों पर अपनी किस्मत आजमाई लेकिन उन्हें भी कहीं सफलता नहीं मिली है।



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