रमा एकादशी और तुला संक्रांति का योग:  भगवान विष्णु और महालक्ष्मी के साथ करें सूर्य देव की पूजा, सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास जलाएं दीपक
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रमा एकादशी और तुला संक्रांति का योग: भगवान विष्णु और महालक्ष्मी के साथ करें सूर्य देव की पूजा, सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास जलाएं दीपक

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9 घंटे पहले

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आज (17 अक्टूबर) कार्तिक कृष्ण एकादशी (रमा एकादशी) है। ये तिथि सुबह 11.12 बजे तक रहेगी, इसके बाद द्वादशी तिथि शुरू हो जाएगी। सुबह सूर्योदय के समय एकादशी तिथि होने से आज ही रमा एकादशी व्रत किया जाएगा। इसके साथ गोवत्स द्वादशी व्रत और तुला संक्रांति का योग भी है। तुला संक्रांति यानी सूर्य कन्या से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करेगा।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, एकादशी व्रत पर सूर्योदय का महत्व काफी अधिक है। इसके अलावा एकादशी और द्वादशी के योग वाले दिन एकादशी व्रत करना ज्यादा शुभ रहता है। इसलिए रमा एकादशी का व्रत आज करना चाहिए। इस तिथि को रंभा एकादशी भी कहते हैं।

महालक्ष्मी के नाम पर है इस एकादशी के नाम

दीपावली से पहले आने वाली इस एकादशी का महत्व काफी अधिक है, क्योंकि ये इस तिथि का नाम महालक्ष्मी के नाम पर ही है। इस वजह से इस एकादशी पर विष्णु और महालक्ष्मी की विशेष पूजा करनी चाहिए। रमा महालक्ष्मी का ही एक नाम है।

रमा एकादशी और तुला संक्रांति के योग में करें ये शुभ काम

  • एकादशी पर सूर्य को जल चढ़ाने के साथ दिन की शुरुआत करें। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें और ऊँ सूर्याय नम: मंत्र बोलते हुए सूर्य को जल चढ़ाएं।
  • घर के मंदिर में भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी के सामने एकादशी व्रत और पूजा करने का संकल्प लें। संकल्प के बाद विष्णु-लक्ष्मी का अभिषेक करें। दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित दूध भरें। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करते हुए दूध की धारा देवी-देवता की मूर्तियों पर चढ़ाएं।
  • दूध के बाद शुद्ध जल चढ़ाएं। हार-फूल और पीले चमकीले वस्त्र पहनाएं। मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। पूजा में हुई जानी-अनजानी भूल के लिए भगवान से क्षमा मांगे।
  • इस तरह पूजा पूरी हो जाती है। इसके बाद प्रसाद बांटें और खुद भी ग्रहण करें। जो लोग एकादशी व्रत करते हैं, उन्हें दिनभर निराहार रहना चाहिए। अगर पूरे दिन भूखे रहना संभव न हो तो फलाहार और दूध का सेवन कर सकते हैं। लेकिन, पूरे दिन अन्न का त्याग जरूर करें।
  • शाम को भी लक्ष्मी-विष्णु की विधिवत पूजा करें। तुलसी के पास दीपक जलाएं, चुनरी ओढ़ाएं।

तुला संक्रांति और सूर्य से जुड़ी खास बातें

  • संक्रांति पर सूर्य पूजा करने की परंपरा है। इससे कुंडली में सूर्य ग्रह की स्थिति मजबूत होती है। सूर्य समाज में मान-सम्मान दिलाता है। सूर्य को सभी ग्रहों का राजा माना गया है।
  • सूर्य को जल चढ़ाने से धर्म लाभ के साथ ही स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं। सुबह-सुबह की सूर्य की किरणों से त्वचा की चमक बढ़ती है, आलस दूर होता है, आंखों की रोशनी बढ़ती है।
  • भविष्य पुराण के ब्राह्म पर्व में श्रीकृष्ण में अपने पुत्र सांब को सूर्य पूजा करने की सलाह दी है। श्रीकृष्ण कहते हैं कि सूर्य एकमात्र प्रत्यक्ष दिखाई देने वाले देवता हैं। जो भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ सूर्य की पूजा करता है, उसे सेहत के साथ ही सौभाग्य भी मिलता है।
  • तुला संक्रांति पर सूर्य से संबंधित चीजें जैसे तांबे का बर्तन, पीले या लाल कपड़े, गेहूं, गुड़, माणिक्य, लाल चंदन आदि का दान किया जा सकता है।

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