शनिवार और एकादशी का योग आज:  उत्पन्ना एकादशी पर विष्णु-लक्ष्मी के साथ करें शनिदेव की भी पूजा, सरसों के तेल का करें दान
जीवन शैली/फैशन लाइफस्टाइल

शनिवार और एकादशी का योग आज: उत्पन्ना एकादशी पर विष्णु-लक्ष्मी के साथ करें शनिदेव की भी पूजा, सरसों के तेल का करें दान

Spread the love


4 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

आज (शनिवार, 15 नवंबर) अगहन मास के कृष्ण पक्ष की 11वीं तिथि है, इसे उत्पन्ना एकादशी कहते हैं। माना जाता है कि इसी तिथि पर देवी एकादशी प्रकट हुई थीं। एकादशी और शनिवार का योग होने से इस दिन विष्णु-लक्ष्मी के साथ ही शनिदेव की भी विशेष पूजा करने का शुभ योग बना है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, अगहन कृष्ण एकादशी पर किए गए व्रत-उपवास से यज्ञ के समान पुण्य मिलता है। ये व्रत भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए किया जाता है। इस दिन काले तिल, अन्न, वस्त्र, कंबल का दान करना चाहिए।

एकादशी व्रत करने की सरल विधि

एकादशी पर स्नान के बाद ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करते हुए सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके बाद घर के मंदिर में प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा करें। गणेश जी को जल-दूध, दूर्वा, हार-फूल, पंचामृत, मोदक चढ़ाएं। तिल-गुड़ के लड्डू भी चढ़ाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। गणेश पूजा के बाद विष्णु जी के सामने व्रत और पूजा करने का संकल्प लें।

विष्णु-लक्ष्मी की मूर्तियां स्थापित करें। जल चढ़ाएं। दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और भगवान का अभिषेक करें। दूध चढ़ाने के बाद जल से अभिषेक करें।

भगवान का लाल-पीले चमकीले वस्त्र और हार-फूल से श्रृंगार करें। हार-फूल पहनाएं, सुंदर श्रृंगार करें, तिलक लगाएं। इत्र और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं।

तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। तिल चढ़ाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। पूजा में ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।

पूजा के अंत में भगवान से पूजा में हुई जानी-अनजानी भूल के लिए क्षमा मांगे। पूजा में एकादशी व्रत करने का संकल्प लें।

एकादशी व्रत में दिनभर निराहार रहना चाहिए। जो लोग भूखे नहीं रह पाते हैं, वे एक समय फलाहार कर सकते हैं। दूध और फलों के रस का सेवन कर सकते हैं। दिनभर व्रत करें, शाम को भी विष्णु-लक्ष्मी का पूजन करें। अगले दिन यानी द्वादशी की सुबह भी पूजा करें और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं। इसके बाद स्वयं भोजन करें। इस तरह ये व्रत पूरा होता है। इस दिन पूजा-पाठ के साथ ही भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करें और शास्त्रों की कथाएं पढ़ें-सुनें।

एकादशी और शनिवार के योग में करें शनि पूजा

ज्योतिष में शनिदेव को शनिवार का कारक ग्रह माना जाता है। इसलिए इस दिन शनि की विशेष पूजा की जाती है। शनिदेव की प्रतिमा पर सरसों का तेल चढ़ाएं। नीले फूल, काले वस्त्र, काले तिल, तिल के लड्डू चढ़ाएं।

शनि मंत्र ऊँ शं शनैश्चराय नम: का जप करें। तिल के तेल का दीपक जलाएं। शनि पूजा के बाद काले तिल और सरसों के तेल दान करें। काले कंबल का दान करें।

शनिवार को हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ भी करना चाहिए।

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *