रसरंग में चिंतन:  माया में मग्न होकर हम क्यों नाच रहे हैं?
अअनुबंधित

रसरंग में चिंतन: माया में मग्न होकर हम क्यों नाच रहे हैं?

Spread the love


गुणवंत शाह3 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

दुनिया में सबसे बड़ा गुरु कौन है? इसका उत्तर है हृदयाघात, यानी हार्ट अटैक। बात थोड़ी अजीब लग सकती है, पर सच यही है। अपने अनुभव के आधार पर कह रहा हूं कि हृदय रोग के हमले के बाद मेरा सारा अहंकार चूर-चूर हो गया। क्या यह किसी साधारण गुरु कृपा से कम है? कोई मानव गुरु अपने शिष्य को धोखा दे सकता है, पर हृदयाघात अपने शिकार को कभी नहीं छलता। हृदय रोग के हमले से यदि व्यक्ति बच जाए तो उसके जीवन का हर पल मूल्यवान होता है। ठीक वैसे ही जैसे किसी पायलट का कॅरियर वर्षों से नहीं, बल्कि विमान उड़ाने के घंटों से मापा जाता है। हार्ट अटैक से बचा व्यक्ति यदि जाग जाए तो उसके जीवन का नवनिर्माण शुरू होता है। ऐसा अवसर केवल भाग्यशाली लोगों को ही मिलता है। अहंकार शून्यता यानी शरीर की मृत्यु से पहले अहंकार की मृत्यु की अवस्था। हार्ट अटैक यह मौका नहीं देता, पर इसके कारण एक आलौकि द्वार अवश्य खुल जाता है। ऐसी गुरु कृपा क्या कम मूल्यवान है? जो हमारे लिए संभावनाओं का द्वार खोल दे, वही सच्चा सद्गुरु। हाल ही में जब मैं अस्पताल के आईसीसीयू में था, तब सारे विचारों का केंद्र बिंदु यह माया ही थी। स्वामी आनंद ने माया को परमेश्वर का प्रबंधन कहा है। यह वाक्य बार-बार स्मरण में आता रहता है। माया पर विचार करने का एक लाभ यह हुआ कि मृत्यु का भय उतर गया। मेरे मन में क्रिकेट और गीता के वचनों का अंतर्द्वंद्व उठने लगा। मैं पिच पर उतरा। खेल शुरू हुआ। एक बॉल पर मैंने छक्का मारे की कोशिश की, लेकिन बाउंड्री पर फील्डर ने कैच कर लिया। मैं पवेलियन लौटने ही वाला था कि अंपायर ने नो बॉल की घोषणा की और मैं फिर क्रीज पर लौट आया। यह क्रिकेट की माया है। टीम जीती तो खुशी; हारी तो दुख। दो टीमों का स्कोर बराबर हो जाए तो टाई। यह भी माया ही तो है। स्टम्प आउट, रन आउट, कैच आउट और एलबीडब्ल्यू, ये सभी माया के ही रूप हैं। डीप मिड ऑन पर द्वेष नाम का फील्डर खड़ा है और डीप मिड ऑफ पर लोभ हमारी दौड़ को रोकने को तैयार है। इसी तरह स्लिपर के रूप में तीन-तीन खिलाड़ी और उनके साथ विकेटकीपर, जो साक्षात मोह बनकर हमें आउट करने के लिए खड़ा है। क्रिकेट के इस मायारूपी खेल में अंपायर की भूमिका कैसी? गीता के दो शब्दों में इसे समझा जा सकता है – उपद्रष्टा और अनुमंता (अध्याय 13)।

अंपायर दोनों टीमों के प्रति पूरी तरह निष्पक्ष रहता है। इसलिए वह उपद्रष्टा है और आउट-नॉटआउट का निर्णय देने वाला होने के कारण अनुमंता है। अंपायर मोहमाया में फंसे धृतराष्ट्र की कमजोरियों से मुक्त होता है। सृष्टि का खेल भी क्रिकेट से अलग नहीं है। यदि खिलाड़ी यानी मनुष्य साक्षी भाव से माया के खेल को देखे तो जीवन सफल हो सकता है। माया से मायापति की ओर जाने का विचार मुझे अस्पताल के बिस्तर पर पड़े-पड़े आया। माया यानी आभासी वास्तविकता, जिसे अंग्रेजी में वर्चुअल रियलिटी कहा जा सकता है।

किसी ने आपको धोखा दिया, किसी स्वजन ने उधार लेकर वापस नहीं किया, कोई आपकी निंदा करने में व्यस्त है, आपके हृदय में किसी चोट का कांटा है? संभव है आपने ही किसी के साथ अन्याय किया हो, लोभ मोह स्वार्थ में किसी का जीवन कष्टमय किया हो। माया नाम की ठगिनी हमें दिन रात नचा रही है। हम उसी में डूबकर नाच रहे हैं। इसी बीच हमारा कोई अपना चल बसता है तो हम दुखी हो जाते हैं। टीवी पर दिखाए जाने वाले धारावाहिक भी माया का ही एक रूप हैं। एक पात्र अच्छा लगता है तो दूसरा दुष्ट। भला पात्र हमें प्रसन्न करता है तो दुष्ट पात्र के प्रति मन में धिक्कार भर देता है। कहीं विवाह समारोह हो तो कई टेबलों पर व्यंजनों के रूप में माया ही विराजती है।

आयुर्वेद और विज्ञान कहते हैं कि मानव शरीर में वात पित्त कफ के संतुलन की त्रिगुणात्मक माया है। पानीपुरी ललचाती है, मिठाई ललचाती है, पकौड़े ललचाते हैं और भोजन के बाद सुगंधित पान भी ललचाता है। माया हर दिन नए रूप में सामने आती है, इसकी लीला अपरम्पार है। सर्दी में सुबह की गुनगुनी धूप अच्छी लगती है, गर्मी की दोपहर में यही धूप तड़पाती है। हमें बारिश अच्छी लगती है, लेकिन बारिश का कीचड़ अच्छा नहीं लगता। कार में घूमना अच्छा लगता है, पर कार बिगड़कर खड़ी हो जाए तो अच्छा नहीं लगता। सुख की गोद में दुख छिपा होता है और दुख की छाती में पीड़ा। लेकिन हमें सुख अच्छा लगता है, दुख बिल्कुल नहीं।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *