मृदुला द्विवेदी4 घंटे पहले
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वायनाड में स्थित कॉफी के बागान।
वायनाड पश्चिमी घाटों में केरल में स्थित हरियाली से घिरा एक सुंदर पर्यटन स्थल है। यहां वायनाड वन्यजीव अभयारण्य के अलावा कॉफी और चाय के बागान, झीलें, प्राचीन गुफाएं आदि दर्शनीय स्थल हैं। यह हर मौसम में घूमने के लिए एक आदर्श स्थल है।
वायनाड वन्यजीव अभयारण्य जंगल सफारी पर जाना एक विशेष अनुभव होता है। यहां मुथंगा और थोलपेट्टी दो जगहों से जंगल सफारी उपलब्ध हैं। ये दोनों क्षेत्र हरियाली और अनूठी जैव विविधता से भरपूर हैं। वायनाड में हाथियों के दर्शन आम बात है। अगर आपकी किस्मत अच्छी है तो बाघ भी देखने को मिल जाएंगे। थोलपेट्टी का क्षेत्र नागरहोल टाइगर रिजर्व के करीब है, इसलिए यदि आप थोलपेट्टी के पास रुकते हैं तो नागरहोल भी घूमने का अवसर मिल सकता है। मुथंगा की ओर जाने वाली सड़क पर ही हाथियों के दर्शन हो सकते हैं। स्थानीय लोग सलाह देते हैं कि यदि हाथी दिख जाए तो वाहन से बाहर न निकलें। यह घातक हो सकता है।
कॉफी और चाय बागानों की सफारी वायनाड के आस-पास चाय और कॉफी बागानों के लिए भी जीप सफारी उपलब्ध है। लगभग हर होटल इस तरह की सफारियां अरैंज करवाता है। हरे-भरे बागानों के बीच से गुजरना एक बेहद शानदार अनुभव होता है। इन बागानों की ऊंची-नीची सड़कों से पश्चिमी घाट का मनोहारी दृश्य दिखता है। बागानों के भीतर आप चाहें तो पैदल भी घूम सकते हैं। यहां आपको कई प्रकार के फूल और पक्षी भी देखने को मिल सकते हैं। कुछ होटल और होमस्टे तो इन्हीं बागानों के भीतर स्थित हैं, जहां ठहरना वास्तव में प्रकृति की गोद में रहने जैसा अनुभव देता है।
चेम्ब्रा पीक के हार्ट लेक तक ट्रेक चेम्ब्रा पीक वायनाड का सबसे ऊंचा स्थल है। उसकी चोटी पर दिल के आकार की एक झील स्थित है। यह एक आसान ट्रेक माना जाता है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 8 किलोमीटर है। लेकिन आसान ट्रेक भी कुछ मेहनत तो मांगते ही हैं। हरे-भरे रास्ते पर चढ़ाई के बाद जब आपको उस दिल-आकार की झील की एक झलक नजर आती है तो उससे आपकी सारी थकान दूर हो जाती है। हालांकि यह ट्रेकिंग मुफ्त नहीं है। यहां ट्रेकिंग के लिए प्रवेश शुल्क और कैमरा शुल्क लिया जाता है। हालांकि कभी-कभी यहां अचानक से कोहरा छा जाता है, जिससे आसपास के नजारे पूरी तरह से साफ नहीं दिखाई देते। फिर भी यह ट्रेक शानदार अनुभव देता है। लेकिन घनघोर बारिश (15 जून से सितंबर अंत तक) के मौसम में यहां जाने से बचना चाहिए।
एडक्कल गुफाएं एडक्कल की गुफाएं दरअसल प्राचीन काल के रॉक शेल्टर्स हैं। ये अंबुकुट्टी पहाड़ियों की चोटी पर स्थित हैं, जो वायनाड से करीब 25 किलोमीटर दूर हैं। ये लगभग 1200 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और इन गुफाओं तक पहुंचने के लिए करीब 300 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। इन गुफाओं की खोज 1895 में फ्रेड फॉसेट ने की थी। इन रॉक शेल्टर्स की दीवारों पर कई चित्र बने हुए हैं। चट्टानों पर बने चित्रों में इंसानी तस्वीरों के अलावा कई चीजें दशाई गई हैं। माना जाता है कि इनमें से कुछ सबसे पुराने चित्र 6,000 ईसा पूर्व के हैं।
15 जून तक जा सकते हैं वायनाड
कब जाएं? घूमने के लिए सबसे अच्छा समय अक्टृबर से मई अंत का होता है। जून में यहां बारिश शुरू हो जाती है। फिर भी 15 जून तक जा सकते हैं। बारिश में हालांकि बहुत हरियाली होती है और झरने पूरे यौवन पर होते हैं, लेकिन लगातार बारिश के कारण ट्रेकिंग और सफारी में दिक्कत हो सकती है।
कैसे जाएं? वायनाड केरल के एक प्रमुख शहर कोझिकोड के काफी करीब है, जहां से हर तरह के आवागमन की सुविधा मिल जाती हैं। कोझिकोड हवाई अड्डा वायनाड से 86 किलोमीटर दूर स्थित है। रेलवे स्टेशन भी कोझिकोड में ही है। यह सड़क मार्ग से कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल के कई शहरों से जुड़ा है।
कहां ठहरें ? हाई रेंज में यहां चाय-काफी के बागानों में कई रिजॉर्ट बने हुए हैं। लेकिन मिड रेंज भी ठहरने की अच्छी सुविधाएं उपलब्ध हैं।








