मृदुला द्विवेदी3 घंटे पहले
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कंबोडिया में रामायण पर आधारित महाकाव्य ‘रीमकर’ को नृत्य- नाटिका के रूप में पेश करते कलाकार।
सिएम रीप कंबोडिया का वह शहर है, जहां विश्व प्रसिद्ध अंगकोर पुरातात्विक पार्क स्थित है। अंगकोर कभी शक्तिशाली खमेर साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था। यह पार्क यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। यहां के कई मंदिरों की शुरुआत हिंदू मंदिरों के रूप में हुई थी और आज भी उनकी दीवारें रामायण तथा महाभारत की कहानियां कहती हैं। शहर में और भी बहुत कुछ देखने को है, लेकिन अंगकोर वाट इसकी खास पहचान है।
अंगकोर वाट मंदिर : अंगकोर वाट का निर्माण राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने 1113 से 1150 ईस्वी के बीच कराया था। यह मूल रूप से भगवान विष्णु को समर्पित मंदिर था, लेकिन बाद में इसे बौद्ध उपासना स्थल में परिवर्तित कर दिया गया। जब आप मंदिर के प्रवेश द्वार की ओर बढ़ते हैं तो दीवारों पर रामायण और महाभारत की कथाएं उत्कीर्ण मिलती हैं। किसी दूसरे देश में हमारी संस्कृति का प्रमुखता से इतना सुंदर चित्रण देखना रोमांच पैदा कर देता है। मंदिर परिसर बहुत विशाल है, जहां काफी पैदल चलना पड़ता है। अगर आप ऊपरी हिस्सों तक जाना चाहते हैं तो आपको ऊंची व खड़ी सीढ़ियों से होकर जाना पड़ेगा। लेकिन जब आप ऊपर पहुंचते हैं तो उसकी भव्यता को देखकर निशब्द रह जाते हैं।
अंगकोर वाट का सूर्योदय : सिएम रीप के सबसे सुंदर अनुभवों में से एक है अंगकोर वाट मंदिर के सामने बने तालाब से सूर्योदय को देखना। मंदिर का पूरा प्रतिबिंब जल में दिखाई पड़ता है। यह पर्यटकों में बहुत लोकप्रिय है, इसलिए यहां सूर्योदय से पहले ही भीड़ लग जाती है। अगर आप इस अद्भुत दृश्य को सही स्थान से देखना चाहते हैं तो सुबह बहुत जल्दी निकलना होगा। बायोन मंदिर :
अंगकोर वाट से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर अपने 216 विशालकाय मुस्कराते चेहरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां मंदिर के चारों ओर जलाशय हैं, जिनमें इस भव्य संरचना का सुंदर प्रतिबिंब दिखाई देता है। यह अब एक बौद्ध मंदिर है, लेकिन इसमें हिंदुओं के चिह्न आज भी मौजूद हैं। कहा जाता है कि अंगकोर के मंदिरों की खोज 1860 में एक फ्रांसीसी व्यक्ति हेनरी मूहोट ने की थी। हालांकि एक मत यह भी है कि अंगकोर वाट के मंदिरों को बौद्ध भिक्षुओं द्वारा लगातार संजोकर रखा गया।
ता प्रोहम मंदिर : जब आप ता प्रोहम को देखते हैं तो ऐसा प्रतीत होता है मानो कोई खोया हुआ साम्राज्य जंगल में समा गया हो। यहां के विशाल वृक्षों की जड़ें मंदिर की दीवारों को चीरती हुईं भीतर तक फैल चुकी हैं। लगता है जैसे प्रकृति ने इस परिसर को फिर से अपने अधिकार में ले लिया हो। यही कारण है कि इसे ट्री टेंपल भी कहा जाता है।
रीमकर परफॉर्मेंस : कंबोडिया में रामायण का रूपांतरण ‘रीमकर’ के नाम से प्रसिद्ध है। यहां के रंगीन नृत्य-नाट्यों में इस महाकाव्य के भावपूर्ण दृश्य स्थानीय नृत्य शैलियों के साथ प्रस्तुत किए जाते हैं। किसी दूसरे देश में रामायण का जीवंत प्रदर्शन देखना एक अनोखा अनुभव होता है। इसे देखने के लिए अप्सरा थिएटर और सेक्रेड डांसर्स ऑफ अंगकोर जैसे मंच लोकप्रिय हैं। कई होटल भी डिनर प्लस शो की बुकिंग की सुविधा देते हैं, इसलिए पहले से टिकट बुक कर लेना बेहतर होता है।
पुराना बाजार और नाइट लाइफ : यह सिएम रीप का आधुनिक और जीवंत हिस्सा है, जो रात्रि बाजारों, स्मृति चिह्न की दुकानों और नाइटलाइफ के लिए प्रसिद्ध है। यहां टहलना, स्थानीय व्यंजन चखना, कैफे में बैठना और खरीदारी करना अपने आप में एक सुखद अनुभव होता है।
कब जाएं? सिएम रीप घूमने का सबसे अच्छा मौसम नवंबर से मई तक होता है। अप्रैल से जून के बीच भी घूमा जा सकता है। जुलाई से अक्टूबर तक यहां काफी बारिश रहती है। कैसे पहुंचें? भारत से सिएम रीप के लिए सीधी उड़ानें अभी उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन इंडिगो नवंबर 2025 से कोलकाता से सिएम रीप के लिए सीधी उड़ान शुरू करने जा रही है। फिलहाल आपको बैंकॉक, हो ची मिन्ह सिटी या कुआलालंपुर जैसे किसी प्रमुख एशियाई हब से कनेक्टिंग फ्लाइट लेनी पड़ती है। कहां ठहरें? यहां हर बजट के अनुसार ठहरने के विकल्प उपलब्ध हैं। चार्ल्स डी गॉल बुलेवार्ड अंगकोर वाट के सबसे नजदीक है। ओल्ड फ्रेंच क्वार्टर में लग्जरी होटल हैं, जबकि टाफुल विलेज बजट यात्रियों के लिए उपयुक्त है। अगर आप नाइटलाइफ और लोकल बाजारों के करीब रहना चाहते हैं तो पब स्ट्रीट क्षेत्र चुनना बेहतर रहेगा।








