डॉ. विपुल कीर्ति शर्मा2 घंटे पहले
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हमारी संस्कृति में वर्षभर तरह-तरह के त्योहार आते हैं, जो न केवल आस्था और परंपरा से जुड़े हैं, बल्कि जीवन में आनंद तथा उत्साह भी घोलते हैं। इन त्योहारों पर हर कोई स्वयं को सजाना-संवारना चाहता है। लेकिन रूप-चतुर्दशी, जो धनतेरस के एक दिन बाद और दीपावली के एक दिन पहले मनाई जाती है, तो विशेष रूप से सौंदर्य का ही दिन माना जाता है। इसे विशेष रूप से सजने-संवरने और त्वचा की देखभाल को समर्पित किया जाता है।
जब ब्यूटी पार्लर नहीं थे, तब भी इस पर्व पर उबटन से स्नान, मेहंदी और रूप को सजाने के पारंपरिक प्रयास होते रहे हैं। हमारे देश में सौंदर्य का एक महत्वपूर्ण मापदंड गोरा होना है (जो निश्चित ही बहस का विषय भी है)। अनेक महिलाएं गोरा दिखने के लिए चेहरे पर हल्दी और प्राकृतिक पेस्ट लगाती हैं।
लेकिन सवाल यह है कि कोई व्यक्ति सांवला या काला क्यों होता है और कुछ लोग बहुत गोरे क्यों होते हैं? इसका वैज्ञानिक जवाब हमारी त्वचा में मौजूद विशेष कोशिका ‘मेलानोसाइट्स’ में निहित है। ये ही सारे प्रपंच करती हैं। ये मेलानोसाइट्स, मेलानिन नामक भूरे-काले रंग को संश्लेषित करती हैं। इसी से त्वचा का रंग गहरा हाेता है। हालांकि भले ही यह मेलानिन त्वचा को गहरा रंग देता हो, लेकिन यह त्वचा को सुरक्षित बनाने का कार्य भी करता है। यह सूर्य की हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणों को त्वचा की ऊपरी परत में ही रोककर जलन, सूरज से होने वाले दाग-धब्बों और त्वचा के कैंसर से बचाव करता है। जिन लोगों में मेलानिन बिल्कुल नहीं बनता, उन्हें एल्बिनो कहा जाता है। एल्बिनो व्यक्तियों को धूप में जलन, देखने में कठिनाई और त्वचा कैंसर का खतरा सबसे अधिक होता है।
किन लोगों में बनता है अधिक मेलानिन?
मेलानिन का निर्माण आनुवंशिक लक्षण है। भूमध्य रेखा के समीप, जहां सूर्य की किरणें अधिक तीव्र होती हैं, वहां मेलानिन का निर्माण अधिक होता है और लोग गहरे रंग के होते हैं। जैसे-जैसे हम भूमध्य रेखा से दूर ठंडे क्षेत्रों में जाते हैं, सूर्य की धूप कम प्रभावशाली होती जाती है और मेलानिन का निर्माण कम होते जाता है। इसलिए वहां के लोग हल्की या गोरी त्वचा वाले होते हैं। हालांकि आज के आधुनिक शोध बताते हैं कि स्वस्थ आहार और पोषण के जरिए मेलानिन के उत्पादन को नियंत्रित किया जा सकता है, यानी कुछ हद तक गोरा रंग पाया जा सकता है।
आहार से मिल सकता है गोरापन : रिसर्च
स्वयं के प्रयासों से त्वचा को प्राकृतिक रूप से निखारने के कुछ उपाय हैं तथा इनमें आहार की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। गाजर, टमाटर, पपीता, तरबूज, पत्तेदार हरी सब्जियां और मेवे जैसी चीजें मेलानिन निर्माण को नियंत्रित करने में सहायक हैं। ग्रीन टी और नींबू का सेवन भी त्वचा को प्राकृतिक रूप से चमकदार बनाता है। शोध बताते हैं कि विटामिन सी युक्त आहार (जैसे नींबू, संतरा, मौसंबी) त्वचा में कोलेजन के निर्माण को बढ़ाते हैं और उम्र बढ़ने के लक्षणों को कम करते हैं। विटामिन-बी12 युक्त चीजें (दही, छाछ) भी त्वचा को स्वस्थ और मुलायम बनाए रखती हैं। बर्थ कंट्रोल गोलियों से भी मेलानिन का उत्पादन बढ़ता है, यानी सांवले रंग में बढ़ोतरी होती है। इसलिए गोरे रंग के इच्छुक लोग बर्थ कंट्रोल के अन्य उपायों पर विचार कर सकते हैं।
नवीनतम रिसर्च यह भी दिखाती है कि प्राकृतिक फेस पैक्स, हल्दी और दही का मिश्रण, एलोवेरा जेल और गुलाब जल का नियमित उपयोग त्वचा के रंग को संतुलित और चमकदार बनाता है। इसके अतिरिक्त, नींबू, शहद और दूध के मिश्रण से हल्का स्क्रब तैयार करके त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाना भी त्वचा को गोरा दिखाने में मददगार होता है।
इन सभी उपायों के माध्यम से मेलानिन के उत्पादन को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे त्वचा का रंग प्राकृतिक रूप से निखर सकता है। हालांकि यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि काला या गोरा होना मुख्यतः आनुवंशिक है और इसे पूरी तरह बदला नहीं जा सकता। वैसे भी अब अनेक लोग गोरे रंग को सुंदरता का पैमाने नहीं मानते हैं। किंतु सतत प्रयास, संतुलित आहार, धूप से बचाव और प्राकृतिक तरीकों से त्वचा की देखभाल कर हम नैचुरल ग्लो को जरूर बढ़ा सकते हैं।








