भाजपा की ओर से राज्यसभा चुनाव के लिए आठ प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद सबसे ज्यादा हलचल रुहेलखंड और ब्रज क्षेत्र में है। बदायूं से ताल्लुक रखने वाले लोध समाज के नेता केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा का टिकट कटना भी बड़े सियासी उलटफेर का इशारा कर रहा है। बदायूं के स्थानीय विधायकों के लिए भी ये खतरे की घंटी बताई जा रही है। वहीं, धर्मपाल सिंह को टिकट मिलना लोध बिरादरी के बड़े नेताओं के टकराव का नतीजा माना जा रहा है।
बीएल वर्मा बदायूं जिले के बिल्सी विधानसभा क्षेत्र के गांव ज्योरा पारवाला के मूल निवासी हैं। वह 26 नवंबर 2020 को राज्यसभा सदस्य बने और इस समय वह केंद्र में उपभोक्ता मामले, खाद्य व सार्वजनिक वितरण विभाग के राज्यमंत्री हैं। उनका कार्यकाल नवंबर में पूरा हो रहा है। बीएल वर्मा ऐसे नेता हैं जो सीधे चुनाव लड़कर जीतने के बजाय कभी विधान परिषद तो कभी राज्यसभा के जरिये सत्ता में बने रहे।
कल्याण सिंह के उत्तराधिकारी की जंग में धर्मपाल को मिला मौका
बीएल वर्मा पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के करीबियों में शामिल रहे और उनके करीब रहकर सत्ता में चमकते रहे। पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत कल्याण सिंह के बेटे एटा के पूर्व सांसद राजवीर सिंह और बीएल वर्मा के बीच खुद को कल्याण सिंह का असली उत्तराधिकारी साबित करने की होड़ रही है।
सूत्र बताते हैं कि दोनों के बीच अरसे से जो खटास है उसकी वजह से भाजपा का परंपरागत लोध राजपूत वोट बैंक न छिटके, इसलिए इसी वर्ग के धर्मपाल सिंह को राज्यसभा भेजने की तैयारी है। धर्मपाल राज्यसभा जाएंगे तो वह पूरे प्रदेश में लोध वोट बैंक को साध सकेंगे। बताया जा रहा है कि एटा में सपा प्रत्याशी से चुनाव हारने वाले राजवीर सिंह को भी इसीलिए राज्यसभा टिकट से दूर रखा गया है।







