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6 घंटे पहले
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सवाल- मैं 30 साल की हूं और एक प्राइवेट कंपनी में काम करती हूं। इस बार करवा चौथ के दिन भी ऑफिस जाना है, लेकिन ससुराल में इस त्योहार को लेकर बहुत उत्साह रहता है। मेरी सास चाहती हैं कि मैं सुबह सरगी से लेकर शाम की पूजा तक, सभी रस्में ठीक से निभाऊं। मुझे भी त्योहार मनाना अच्छा लगता है, लेकिन ऑफिस के साथ घर के सारे काम संभालना मुश्किल हो जाता है।
मेरे पति घर के कामों में बिल्कुल हाथ नहीं बंटाते। जब उनसे मदद मांगती हूं, तो कहते हैं कि ये सब महिलाओं के काम हैं। मेरी थकान को कोई नहीं समझता। मैं अपने पति और सास को कैसे समझाऊं कि त्योहार की तैयारियां हम सबको मिलकर करनी चाहिए?
एक्सपर्ट– डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा
करवा चौथ कई परिवारों के लिए आस्था, प्रेम और परंपरा का त्योहार है। लेकिन कई महिलाओं के लिए यह दिन खुशी के साथ अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी लेकर आता है। नौकरी, घर के काम, व्रत और पूजा की तैयारी। इन सबके बीच उनकी थकान अक्सर अनदेखी रह जाती है।
आप भी ऐसी ही स्थिति में हैं। इसलिए सबसे पहले तो यह समझें कि आपकी परेशानी बिल्कुल जायज है। आपकी थकान और मदद की जरूरत वाजिब है। यह कोई बेजा मांग नहीं है। आपको त्योहार मनाना अच्छा लगता है। आप परिवार की परंपराओं का सम्मान भी करती हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सारी जिम्मेदारी अकेले आप ही संभालें।
सबसे पहले अपनी भावनाओं को समझें
जब आप पूरे दिन ऑफिस में काम करती हैं और घर लौटकर भी सारी जिम्मेदारियां आपको ही निभानी पड़ती हैं, तो थकान होना स्वाभाविक है। अगर इस थकान को समझने के बजाय पार्टनर और फैमिली इसे आपकी ही जिम्मेदारी बताएं तो मन में गुस्सा और दुख पैदा हो सकता है।
मनोविज्ञान में इसे भावनात्मक थकान और मानसिक बोझ से जोड़कर देखा जाता है। मानसिक बोझ का मतलब केवल काम करना नहीं है। इसमें यह सोचना भी शामिल है कि क्या बनाना है, किस चीज की तैयारी करनी है और कौन-सा काम कब पूरा होगा।
हो सकता है कि आप बाहर से सब संभाल रही हों, लेकिन भीतर से परेशान हों। यह भी संभव है कि धीरे-धीरे आपके मन में त्योहार को लेकर उत्साह भी कम होने लगे।
इसलिए अपनी भावनाओं को दबाएं नहीं। खुद से पूछें कि आपको सबसे ज्यादा परेशानी किस बात से है। जैसेकि–
- काम की अधिकता से
- पति के सहयोग न करने से
- अपनी मेहनत को महत्व न मिलने से?
जब आपको अपनी परेशानी साफ समझ आएगी, तब उसे दूसरों के सामने रखना आसान होगा।
पति से इस बारे में बात कैसे करें?
अगर आपके पति कहते हैं कि घर के काम महिलाओं की जिम्मेदारी हैं, तो यह केवल काम के बंटवारे का मामला नहीं है। यह घर और रिश्ते को देखने के उनके नजरिए से भी जुड़ा है।
हो सकता है कि उन्होंने अपने परिवार में हमेशा महिलाओं को ही घर संभालते देखा हो। ऐसे में उन्हें यह व्यवस्था सामान्य लगती हो। लेकिन किसी व्यवस्था का पुराना होना उसे उचित नहीं बना देता।
उनसे बहस करने के बजाय किसी शांत समय पर बात करें। बातचीत की शुरुआत आरोप से न करें। यह न कहें कि आप कभी मेरी मदद नहीं करते। इसके बजाय अपनी परेशानी बताएं।
आप कह सकती हैं-
“मुझे करवा चौथ मनाना अच्छा लगता है। मैं चाहती हूं कि हम इसे खुशी से मनाएं। लेकिन ऑफिस के साथ सारी तैयारी अकेले करना मेरे लिए मुश्किल है। मुझे तुम्हारे सहयोग की जरूरत है।”
इस तरह आप उन्हें दोषी ठहराने के बजाय अपनी जरूरत बता रही हैं।
ध्यान रखें कि बातचीत का उद्देश्य पति को हराना नहीं है। उद्देश्य ऐसी व्यवस्था बनाना है, जिसमें आप दोनों की जरूरतों और मेहनत को महत्व मिले।

जिम्मेदारियों का सही बंटवारा
कई बार परिवार में यह कह देना आसान होता है कि सब मिलकर काम करेंगे। लेकिन जब तक यह तय नहीं होता कि कौन क्या करेगा, तब तक काम का बोझ उसी व्यक्ति पर आ जाता है, जो पहले से सब संभाल रहा होता है।
इसलिए पति के साथ बैठकर कामों की सूची बनाएं। सरगी की तैयारी, पूजा का सामान, बाजार से खरीदारी, घर की सफाई और रात के खाने जैसे सभी काम बांटें।
आप अपनी सुविधा के अनुसार कुछ काम पहले कर सकती हैं। पति बाजार से सामान ला सकते हैं, पूजा की तैयारी कर सकते हैं या रात के खाने की जिम्मेदारी ले सकते हैं। सास भी अपनी इच्छा और क्षमता के अनुसार कुछ काम संभाल सकती हैं।
यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति बराबर काम करे। जरूरी यह है कि काम का बंटवारा सबकी उपलब्धता और क्षमता को ध्यान में रखकर हो।

परंपरा का सम्मान और सास से बातचीत
आपकी सास के लिए करवा चौथ का विशेष महत्व हो सकता है। संभव है कि वह इस त्योहार को परिवार की परंपरा और बहू की भागीदारी से जोड़कर देखती हों। उन्हें यह भी लग सकता है कि रस्में ठीक से निभाना परिवार के प्रति सम्मान दिखाने का तरीका है।
ऐसे में सीधे यह कहने से बचें कि इतनी रस्में जरूरी नहीं हैं। इससे उन्हें लग सकता है कि आप उनकी मान्यताओं को महत्व नहीं देतीं।
इसके बजाय अपनी स्थिति समझाएं। आप कह सकती हैं–
“मम्मीजी, मुझे भी करवा चौथ मनाना अच्छा लगता है। मैं चाहती हूं कि सभी रस्में अच्छी तरह हों। लेकिन उस दिन ऑफिस भी जाना है। अगर हम कुछ तैयारियां पहले कर लें और बाकी काम मिलकर करें, तो मैं भी त्योहार का आनंद ले पाऊंगी।”
इस बातचीत में अपनी बात स्पष्ट रखें। केवल इसलिए हां न कहें कि उन्हें बुरा लग सकता है। सम्मान का मतलब अपनी परेशानी छिपाना नहीं है।
आप उनसे यह भी पूछ सकती हैं कि किन रस्मों को वह सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानती हैं। इससे जरूरी तैयारियों को प्राथमिकता देना आसान होगा।
अपनी सीमाएं तय करना सीखें
कई महिलाएं परिवार को खुश रखने के लिए अपनी जरूरतों को पीछे रख देती हैं। उन्हें लगता है कि मना करने पर लोग उन्हें स्वार्थी समझेंगे। कभी-कभी उन्हें एक अच्छी बहू या अच्छी पत्नी साबित करने का दबाव भी महसूस होता है।
लेकिन हर अपेक्षा पूरी करना आपकी जिम्मेदारी नहीं है। आप नौकरी करती हैं। आपको आराम की जरूरत है। आपको अपनी सेहत का ध्यान रखने का भी अधिकार है।
इसका मतलब यह नहीं कि आपको हर रस्म से दूरी बना लेनी चाहिए। आप अपनी सुविधा के अनुसार तैयारी कर सकती हैं। कुछ काम कम कर सकती हैं। कुछ तैयारियां पहले पूरी कर सकती हैं।
पति का सहयोग एहसान नहीं, साझेदारी
घर के कामों में मदद करना और घर की जिम्मेदारी साझा करना दो अलग बातें हैं। मदद का अर्थ है कि घर की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति की है और दूसरा कभी-कभी उसका हाथ बंटा रहा है। साझेदारी का अर्थ है कि दोनों घर को अपनी साझी जिम्मेदारी मानते हैं।
अगर पति कहते हैं कि घर के काम महिलाओं के हैं, तो उनसे पूछें कि क्या नौकरी करने के बाद घर और परिवार की सारी जिम्मेदारी भी केवल पत्नी की होनी चाहिए।
बात को केवल करवा चौथ तक सीमित न रखें। त्योहार के दिन की परेशानी अक्सर रोजमर्रा की असमान व्यवस्था को सामने लाती है। इसलिए जरूरी है कि आप दोनों सामान्य दिनों में भी काम बांटने पर बात करें।

अगर पति आपकी बात न समझे, तो क्या करें?
हो सकता है कि पहली बातचीत में पति आपकी बात स्वीकार न करें। वे पुरानी सोच का हवाला दें या कहें कि पहले भी महिलाएं सब करती थीं। ऐसी स्थिति में तुरंत बहस बढ़ाने के बजाय अपनी बात पर शांत और स्पष्ट रहें।
उन्हें समझाएं कि परिस्थितियां बदल गई हैं। नौकरी और घर की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। परिवार का साथ मिलने से त्योहार का आनंद भी बढ़ता है।
अगर हर बार आपकी जरूरतों को खारिज किया जाता है, तो इस समस्या को गंभीरता से लें। बार-बार होने वाली अनदेखी रिश्ते में नाराजगी और भावनात्मक दूरी बढ़ा सकती है।
आप दोनों किसी भरोसेमंद मैरिज काउंसलर की मदद भी ले सकते हैं। इससे बातचीत को बेहतर दिशा मिल सकती है।

त्योहार बोझ नहीं, खुशी का मौका
करवा चौथ का उद्देश्य परिवार में प्रेम और जुड़ाव बढ़ाना है। अगर इसकी तैयारियां ही तनाव का कारण बन जाएं, तो परिवार को अपनी व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।
आप पति और सास के साथ मिलकर ऐसा तरीका चुन सकती हैं, जिसमें परंपरा भी निभे और आपकी सेहत व समय का भी ध्यान रखा जाए। हर रस्म को बिल्कुल उसी तरह करना जरूरी नहीं, जैसे वह पहले होती थी। परिवार की परिस्थितियों के अनुसार बदलाव किए जा सकते हैं।
याद रखें कि–
- अपनी थकान बताना शिकायत करना नहीं है।
- परिवार का सहयोग मांगना कमजोरी नहीं है।
- अपनी सीमा तय करना परिवार से दूरी बनाना भी नहीं है।

अंतिम बात
आपको परिवार की परंपराओं का सम्मान करने और अपनी जरूरतों का ध्यान रखने में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है। एक स्वस्थ रिश्ते में दोनों के लिए जगह होती है। त्योहार की खुशी तभी टिकाऊ होगी, जब उसकी जिम्मेदारी भी साझा होगी।
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