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6 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा
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सवाल- मेरी उम्र 28 साल है। मेरे बॉयफ्रेंड और मेरे स्वभाव में काफी अंतर है। मैं अपनी भावनाएं खुलकर एक्सप्रेस करती हूं, नाराज भी होती हूं, लड़ भी लेती हूं, लेकिन वह कभी गुस्सा नहीं दिखाता। एक बार मैं उसका बर्थडे भूल गई, एक बार मिलने का समय देकर जाना भूल गई, लेकिन उसने कभी शिकायत नहीं की। अगले दिन ऐसे मिला, जैसे कुछ हुआ ही न हो। शुरू में मुझे लगता था कि वह बहुत समझदार है, लेकिन अब सोचने लगी हूं कि क्या कोई इंसान सचमुच कभी नाराज नहीं होता? उसमें पैशन की कमी है या वो अपने इमोशंस दबाता है।
एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा
जवाब- आपका सवाल केवल आपके बॉयफ्रेंड के बारे में नहीं है। ये इंसानी भावनाओं को समझने से जुड़ा हुआ एक महत्वपूर्ण सवाल है। कुछ लोग मानते हैं कि जो व्यक्ति कभी गुस्सा नहीं करता, वह सबसे ज्यादा मैच्योर होता है। लेकिन मनोविज्ञान हमें बताता है कि ‘गुस्सा न दिखना’ और ‘गुस्सा न आना’ दो बिल्कुल अलग चीजें हैं।
असल सवाल यह नहीं है कि वह नाराज होता है या नहीं।
असल सवाल यह है कि वह अपनी नाराजगी के साथ क्या करता है?
गुस्सा एक नॉर्मल फीलिंग
मनोविज्ञान के अनुसार गुस्सा (एंगर) एक बेसिक ह्यूमन इमोशन है। जिस तरह हमें दुख, खुशी, डर और शर्म महसूस होती है, उसी तरह गुस्सा भी महसूस होता है। इसलिए कोई व्यक्ति कभी नाराज ही न हो, इस बात की संभावना बहुत कम है।
अगर कोई व्यक्ति कहता है कि उसे कभी गुस्सा नहीं आता, तो आमतौर पर इनमें से एक बात हो सकती है-
- वह वास्तव में इमोशनली बहुत स्थिर है।
- वह टकराव (कॉन्फ्लिक्ट) से बचता है।
- उसने अपनी भावनाओं को दबाना सीख लिया है।
- वह अपनी भावनाओं को पहचान नहीं पाता।

1. टकराव से बचना (कॉन्फ्लिक्ट अवॉइडेंस)
हमारे सारे इमोशनल रिएक्शन अपनी परवरिश और आसपास के माहौल से विकसित होते हैं। कुछ लोग बचपन से सीखते हैं कि—
- बहस करना गलत है।
- गुस्सा दिखाना बुरा है।
- नाराजगी रिश्ते तोड़ देती है।
- अपनी जरूरतें बताना स्वार्थी होना है।
ऐसे लोग अक्सर शांति बनाए रखने के लिए अपनी असली भावनाएं छिपाने लगते हैं। बाहर से वे बहुत शांत दिखते हैं, लेकिन अंदर से परेशान हो सकते हैं।
2. लोगों को खुश करना (पीपुल प्लीजिंग)
कई लोगों की पहचान इस बात से जुड़ी होती है कि दूसरे लोग उन्हें कितना पसंद करते हैं। वे अपने बारे में अच्छा महसूस करने के लिए दूसरों के अप्रूवल पर निर्भर होते हैं। ऐसे लोगों के मन में यह विश्वास बैठ जाता है कि—
- अच्छे लोग कभी किसी को दुखी नहीं करते।
- अच्छे लोग गुस्सा नहीं करते।
- अच्छे लोग हमेशा समझौता करते हैं।
- अच्छे लोग अपनी जरूरतों से पहले दूसरों का ध्यान रखते हैं।
इस वजह से वे रिश्तों में अपनी असली भावनाओं को व्यक्त करने की बजाय दूसरों को खुश रखने को प्राथमिकता देने लगते हैं। वे अक्सर—
- शिकायत नहीं करते, भले ही उन्हें तकलीफ हो रही हो।
- ‘ना’ नहीं कहते, भले ही उनका मन न हो।
- गुस्सा या नाराजगी जाहिर नहीं करते।
- अपनी जरूरतों और अपेक्षाओं को दबा देते हैं।
- दूसरों की सुविधा के लिए खुद को असुविधा में डाल देते हैं।
- रिश्ते में असहमति होने पर भी चुप रह जाते हैं।
समस्या यह है कि शुरुआत में यह व्यवहार समझदारी, सहनशीलता या परिपक्वता जैसा दिखाई देता है। लेकिन लंबे समय में व्यक्ति के भीतर नाराजगी और थकान जमा होने लगती है। यह थकान बिल्कुल हेल्दी नहीं है।

3. भावनाओं को दबाना (इमोशनल सप्रेशन)
अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना (इमोशनल रेगुलेशन) और भावनाओं को दबाना (इमोशनल सप्रेशन) दो अलग चीजें हैं। इन दोनों के फर्क हम कुछ इस तरह समझ सकते हैं-
- इमोशनल रेगुलेशन (हेल्दी तरीका)
- अपनी भावना को पहचानना और स्वीकार करना।
- गुस्सा आने पर भी सम्मानजनक तरीके से बात करना।
- नाराजगी, दुख या असहमति को व्यक्त कर पाना।
- भावनाओं पर प्रतिक्रिया देने से पहले सोच पाना।
उदाहरण: “मुझे गुस्सा आया है, लेकिन मैं शांति से अपनी बात रखूंगा।”
इमोशनल सप्रेशन (अनहेल्दी तरीका)
- गुस्से, दुख या नाराजगी को स्वीकार न करना।
- अपनी असली भावनाओं को छिपाना।
- बार-बार ‘कोई बात नहीं’ कहकर खुद को समझाना।
- टकराव से बचने के लिए चुप रह जाना।
उदाहरण: “मुझे गुस्सा नहीं होना चाहिए।”https://www.bhaskar.com/”अगर मैंने कुछ कहा तो बात बढ़ जाएगी।”

न हर गुस्सा बुरा, न हर शांति अच्छी
कई लोग मानते हैं कि रिश्ते में कभी गुस्सा न होना सबसे अच्छी बात है। लेकिन मनोविज्ञान कहता है कि किसी भी रिश्ते की सेहत इस बात से नहीं तय होती कि उसमें कितने झगड़े होते हैं, बल्कि इस बात से तय होती है कि लोग अपनी नाराजगी और असहमति को कैसे व्यक्त करते हैं।
न हर गुस्सा बुरा होता है और न हर शांति अच्छी। कभी-कभी सम्मानजनक तरीके से अपनी नाराजगी व्यक्त करना भी रिश्ते को मजबूत बनाता है। इसीलिए यह समझना जरूरी है कि हेल्दी गुस्से और अनहेल्दी साइलेंस में क्या फर्क है। यह फर्क हमें बताता है कि कोई व्यक्ति अपनी भावनाओं को स्वस्थ तरीके से संभाल रहा है या सिर्फ टकराव से बचने के लिए उन्हें दबा रहा है।

पैशन की कमी या अलग व्यक्तित्व
यहां एक और बड़ी गलतफहमी भी हो सकती है। बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर मेरा पार्टनर मुझसे लड़ता नहीं, तो शायद उसे मेरी परवाह ही नहीं है। लेकिन मनोविज्ञान कहता है कि पैशन का मतलब सिर्फ गुस्सा करना नहीं होता है।
वो पैशनेट है या नहीं, इसे आप इन पैरामीटर्स पर भी परख सकते हैं।
- क्या वह आपके लिए समय निकालता है?
- क्या वह आपकी मदद करता है?
- क्या वह आपकी परेशानियों में साथ देता है?
- क्या वह आपको समझने की कोशिश करता है?
- क्या वह रिलेशनशिप में इन्वेस्ट करता है?
अगर वो आपके लिए ये सारी चीजें कर रहा है तो ये सब भी पैशन की ही अभिव्यक्ति है।
संभव है कि आप भावनाओं को शब्दों और प्रतिक्रियाओं के जरिए व्यक्त करती हों, जबकि आपका पार्टनर प्यार को इन तरीकों से व्यक्त करता हो—
- मदद कर
- साथ देकर
- जिम्मेदारी निभाकर
- समय देकर
सबसे जरूरी बात
एक स्वस्थ रिश्ते की पहचान यह नहीं है कि उसमें झगड़े नहीं होते हैं। पहचान यह है कि दो लोग इन चार चीजों में एक-दूसरे के साथ सुरक्षित महसूस करते हैं—
- अपनी खुशी बताने में।
- अपना दुख बताने में।
- अपनी नाराजगी बताने में।
- अपनी जरूरतें बताने में।
आपको क्या करना है?
अगर आपका पार्टनर अपनी नाराजगी जाहिर नहीं करता तो रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए आप ये स्टेप्स ले सकती हैं-
सेफ स्पेस दें- कई बार लोग इसलिए चुप रहते हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि बोलने से झगड़ा बढ़ जाएगा। उन्हें भरोसा दिलाएं कि अगर वे किसी बात पर असहमत या नाराज भी होंगे, तो भी आप उनकी बात को शांति से सुनेंगी।
सीधे पूछने के बजाय ऑब्जर्व करें- जब आपको लगे कि कोई बात उन्हें बुरी लगी है, तो सीधे कहने की बजाय प्यार से पूछें- “मुझे लगा कि उस बात से तुम्हें ठेस पहुंची है, क्या हम इस बारे में बात कर सकते हैं?”
उनके फैसले की तारीफ करें- अगर वे किसी प्लान के लिए मना करते हैं या अपनी कोई अलग राय रखते हैं तो उस फैसले की तारीफ करें। इससे उन्हें यह महसूस होगा कि रिश्ते में अपनी राय बताना सेफ है।
झगड़ों में ब्लेम न करें- जब आप अपनी बात कहें तो ध्यान रखें कि बातचीत ‘ब्लेम गेम’ में न बदले। जब वे देखेंगे कि नाराजगी जताने का मतलब सिर्फ तेज बोलना नहीं होता, तो वो भी धीरे-धीरे बात करना सीखेंगे।

अंतिम बात
रिश्ते में दो अलग-अलग स्वभाव के लोगों का होना बिल्कुल नॉर्मल है। कोई व्यक्ति एक्सप्रेसिव हो सकता है, तो कोई शांत हो सकता है। लेकिन ‘शांत रहने’ और ‘इमोशंस को दबाने’ के बीच एक बारीक लाइन होती है। अगर आपके पार्टनर की शांति उनकी गहरी समझदारी और मैच्योरिटी है, तो यह रिश्ते के लिए एक खूबसूरत तोहफा है। लेकिन अगर यह शांति टकराव के डर या भावनाओं को दबाने की वजह से है, तो इस पर मिलकर काम करने की जरूरत है।
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आपकी परेशानी बहुत सामान्य है। बहुत से लोग अपने पार्टनर के अतीत के बारे में सुनकर असहज महसूस करते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि आप असुरक्षित, पजेसिव या गलत हैं। अक्सर ऐसी स्थिति में असली समस्या पार्टनर का पास्ट नहीं, बल्कि उस पास्ट से जुड़ी हमारी अपनी भावनाएं होती हैं। पूरी खबर पढ़ें…









