रिलेशनशिप एडवाइज- मैं अमीर और गर्लफ्रेंड गरीब घर से:  है तो ये लव मैरिज, पर क्या हमारा सोशल क्लास गैप रिश्ते में दरार बन सकता है
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रिलेशनशिप एडवाइज- मैं अमीर और गर्लफ्रेंड गरीब घर से: है तो ये लव मैरिज, पर क्या हमारा सोशल क्लास गैप रिश्ते में दरार बन सकता है

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1 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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सवाल: मैं 5 साल से रिलेशनशिप में हूं। हमने दिल्ली यूनिवर्सिटी में साथ में पढ़ाई की है। अब हम दोनों अच्छी जॉब कर रहे हैं, फाइनेंशियली स्टेबल हो गए हैं। मेरी पार्टनर ने यहां तक आने के लिए बहुत लंबा सफर तय किया है। वह बहुत छोटे से गांव से आती है, जहां पढ़ाई-लिखाई के लिए भी बहुत सुविधाएं नहीं थीं। मेरे पापा फर्स्ट क्लास ऑफिसर थे तो मेरे लिए यह सब बहुत आसान था। अब हम शादी करने के बारे में सोच रहे हैं। लेकिन कभी-कभी ये ख्याल आता है कि हम दोनों के डिफरेंट सोशल, कल्चरल और इकोनॉमिक बैकग्राउंड्स की वजह से दिक्कत न हो। क्या हमारे घरवाले इसे स्वीकार करेंगे? वैसे तो हम दोनों की कंपैटिबिलिटी अच्छी है, लेकिन कभी-कभी उसकी आदतों और व्यवहार में उसकी इनसिक्योरिटी दिखती है। मुझे क्या करना चाहिए। मुझे इससे कैसे डील करना चाहिए?

एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा

जवाब: आप दोनों का रिश्ता सचमुच बेहद खूबसूरत है। आपकी पार्टनर ने गांव से निकलकर जो मुकाम हासिल किया, वो अपने आप में एक इंस्पिरेशन है। आपने उसे स्पेस दिया, साथ खड़े रहे। ये प्यार की असली ताकत है। लेकिन शादी का ख्याल आने पर बैकग्राउंड का डर सताने लगा, इस बारे में थोड़ा सोचने की जरूरत है। हमारे आसपास का समाज यह सिखाता है कि समान बैकग्राउंड में की गई शादी लंबी टिकती है। पर सच ये है कि रिश्ते बैकग्राउंड से नहीं, समझदारी से चलते हैं।

पहले ये समझिए कि ये डर कहां से आता है, फिर देखिए कि इसे कैसे ताकत बनाया जाए।

क्लास गैप असल में क्या है?

क्लास गैप तो कोई समस्या ही नहीं है। ये बस दो अलग-अलग दुनिया हैं। आपकी पार्टनर ने अभाव देखा है, शायद इसलिए पैसे को लेकर उनकी आदतों में फर्क हो। आपने हमेशा भरपूर पाया, इसलिए खर्च में ढील देते होंगे। ये फर्क नहीं है, दो अलग स्कूल ऑफ लाइफ हैं। असल सवाल ये नहीं कि फर्क है या नहीं, फर्क तो हर रिश्ते में होता है। सवाल ये है कि जब फर्क सामने आएगा, तो आप क्या करेंगे?

मान लीजिए आप रेस्टोरेंट में हैं। आप कहते हैं कि चलो आज कुछ महंगा खाना ट्राई करें। ऐसे में वो कह सकती हैं कि नहीं, घर पर ही अच्छा खाना बना लेंगे। आप सोच सकते हैं कि ये कंजूसी है। वहीं, वो इसे फिजूलखर्ची समझती हैं। अगर आप चुप रह गए, तो ये छोटी बात बड़ी दीवार बन जाएगी। लेकिन अगर आप बैठकर बात करें तो दोनों कुछ-न-कुछ एक दूसरे से सीखेंगे।

फर्क से ज्यादा बातें कॉमन हैं

आप दोनों की एजुकेशन एक जैसी है, जॉब एक जैसी है, फाइनेंशियल स्टेबिलिटी है। ये असली बराबरी है। अब जो छोटे फर्क दिखते हैं, जैसे बोलचाल, खाने की आदत, फैमिली से मिलने का तरीका तो ये क्लास नहीं, ग्रोथ स्टोरी का हिस्सा हैं। आपकी पार्टनर की बोलचाल में गांव की सादगी है, आपके तरीकों में शहर की पॉलिश है। दोनों अपने आप में सुंदर हैं।

जब कॉन्फ्लिक्ट आए, तो क्या करें?

ये सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। फर्क से डरिए मत, उसे हैंडल करने का प्लान बनाइए। दोनों मिलकर एक कॉन्फ्लिक्ट रिजॉल्यूशन जर्नल शुरू करें। हर हफ्ते 30 मिनट बैठें, लिखें-

  • इस हफ्ते क्या फर्क लगा?
  • मैंने कैसी प्रतिक्रिया दी?
  • बचपन में मैंने पैसे, रिश्ते कैसे देखे?
  • वो कैसे देखती है?
  • अगली बार क्या नया तरीका ट्राई करेंगे?

मान लीजिए एक सिचुएशन है। वो पैसे बचाना चाहती है और आप घूमना चाहते हैं, तो बीच का रास्ता अपनाना बेहतर विकल्प होगा। हर महीने एक बजट ट्रिप करें, बाकी सेविंग में रखें।

फैमिली को कैसे तैयार करें?

शादी से पहले दोनों परिवारों के बीच खुलकर बातचीत होनी जरूरी है, खासकर तब जब दोनों अलग कल्चरल या सोशल बैकग्राउंड से हैं। आपकी पार्टनर को आपके घर की लग्जरी, नियम या लाइफस्टाइल शुरू में थोड़ा असहज कर सकते हैं, जबकि आपको उसके गांव की सादगी, परंपराएं या व्यवहार अलग लग सकते हैं।

इस फर्क को मिटाने के लिए दोनों फैमिलीज को एक-दूसरे की जर्नी, स्ट्रगल और वैल्यू सिस्टम के बारे में पहले से बताएं। जब दोनों तरफ समझ और सम्मान होगा, तभी रिश्ते की नींव मजबूत बनेगी। ग्राफिक में देखिए-

क्लास गैप का बच्चों पर क्या असर होगा?

शादी के बाद सबसे बड़ा सवाल ये होता है कि इस गैप का बच्चों पर क्या असर होगा। इसका जवाब है कि हां, फर्क पड़ेगा, लेकिन ये सकारात्मक फर्क होगा। आपका बच्चा बचपन से ही दो अलग-अलग तरह की दुनिया देखेगा।

उसकी मां ने जहां मेहनत से सबकुछ हासिल किया है, दूसरी ओर पिता प्रिविलेज के बाद भी अपनी जिम्मेदारी नहीं भूले हैं। ऐसे में वह न तो फिजूलखर्ची करेगा, न ही किसी अभाव से डरेगा। आप दोनों मिलकर उसे बैलेंस्ड वर्ल्ड व्यू देंगे। मिक्स बैकग्राउंड वाले बच्चे ज्यादा एम्पैथेटिक (सहानुभूतिपूर्ण) और एडाप्टिव (बदलाव को स्वीकारने वाले) होते हैं। बस आपको रोल मॉडल बनना है। एक-दूसरे की तारीफ करनी है, फर्क को सेलिब्रेट करना है। उसे ही अपनी ताकत बनाना है।

क्लास डिफरेंस ब्रिज बन सकता है

आपकी पार्टनर का संघर्ष आपकी ताकत है, आपका प्रिविलेज उसकी सिक्योरिटी है। क्लास गैप कोई दीवार नहीं है। इसे ब्रिज की तरह इस्तेमाल करें। रिश्ते को गिल्ट या जजमेंट से नहीं, ग्रेस और समझदारी से हैंडल कीजिए।

5 साल का प्यार, शेयर्ड एजुकेशन, फाइनेंशियल स्टेबिलिटी, ये किसी भी बैकग्राउंड से बड़ी बराबरी है। शादी कीजिए, लेकिन पहले कॉन्फ्लिक्ट हैंडलिंग का प्लान बनाइए। याद रखिए, रिश्ते समानता से नहीं, समझ से चलते हैं। आप दोनों में वो समझ है, बस उसे रोज प्रैक्टिस करना है।

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