रिसर्च में दावा- हमारे 80%विचार बिना भाषा के होते हैं:  हमारी सोच से 4 सेकंड पहले दिमाग में तस्वीर बन चुकी होती है, खाली वक्त में दिमाग नई चीज गढ़ने में व्यस्त रहता है
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रिसर्च में दावा- हमारे 80%विचार बिना भाषा के होते हैं: हमारी सोच से 4 सेकंड पहले दिमाग में तस्वीर बन चुकी होती है, खाली वक्त में दिमाग नई चीज गढ़ने में व्यस्त रहता है

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क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप ‘सोच’ रहे होते हैं, तो आपके दिमाग के भीतर असल में क्या चल रहा होता है? अमेरिका के लेखक माइकल पोलन ने इस सवाल का जवाब खोजने के लिए खुद को वैज्ञानिक प्रयोग- डिस्क्रिप्टिव एक्सपीरियंस सैंपलिंग, का हिस्सा बनाया, तो नतीजे हैरान करने वाले थे। पोलन बताते हैं कि हम अकसर मानते हैं कि अंतर्मन में सोच शब्दों या वाक्यों में चलती है, लेकिन नई रिसर्च बताती है कि हमारे 80% विचार बिना भाषा के होते हैं और हम जब तक उसे समझते या प्रकट करते हैं, उससे चार सेकंड पहले ही दिमाग उस पर फैसला कर चुका होता है। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि हमारे मन की धारा में शब्द केवल एक छोटा हिस्सा हैं। असल में हमारे विचार अक्सर धुंधली तस्वीरों, संवेदनाओं या ‘बिना शब्दों वाले स्वरूपों और अनुभवों के रूप में तैरते रहते हैं। तथ्य – 25% लोग ही ऐसे हैं, जिनकी सोच शब्दों में चलती है हर्लबर्ट के शोध से पता चला है कि अंतरमन में चल रही सोच की प्रक्रिया जटिल है। दुनिया में 25% लोग ऐसे हैं, जो हर समय शब्दों में सोचते हैं। करीब 20% विचार ऐसे होते हैं, जिनमें न कोई तस्वीर होती है, न शब्द। वे सिर्फ एक ‘जान लेने’ का अहसास होते हैं। दिमाग का भटकना हमारा 30-50% समय ‘डे-ड्रीमिंग’ या मन के भटकने में बीतता है। विशेषज्ञों के अनुसार, डार्विन और आइंस्टीन जैसे दिग्गज इसलिए सफल हुए थे, क्योंकि वे घंटों ‘कुछ न करने’ और पैदल चलने में बिताते थे, जिससे उनके अवचेतन को रचनात्मक विचार बुनने का समय मिल पाता था। 50 साल से चल रहा शोध अवचेतन पर 50 साल से शोध कर रहे मनोवैज्ञानिक रसेल हर्लबर्ट सोचने की प्रक्रिया के दौरान दिमाग या अंतर्मन में क्या चल रहा है, इसे समझने के लिए नया प्रयोग कर रहे हैं। माइकल पोलन इसका हिस्सा हैं। पोलन के कान में एक ‘बीपर’ लगाया गया, जो अचानक बजता था। बीप बजते ही पोलन को लिखना होता था कि उस पल उनके मन में क्या चल रहा था। नतीजा पोलन ने पाया कि उनके विचार शब्दों से पहले की स्थिति (प्री-वर्बल) थे। दूसरा- जब हम ‘कुछ नहीं’ कर रहे होते हैं, तब भी हमारा दिमाग बड़े बदलावों की तैयारी कर रहा होता है। ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी की मनोवैज्ञानिक कलिना क्रिस्टोफ ने ‘न्यूरो-फिनोमेनोलॉजी’ के जरिए खुलासा किया है। उन्होंने पाया कि हमारे सचेत होने से 4 सेकंड पहले ही दिमाग के ‘हिप्पोकैम्पस’ हिस्से में गतिविधि शुरू होती है। यानी, एक विचार आपके मन में आने से पहले ही अवचेतन स्तर पर तैयार हो चुका होता है।



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