राजधानी लखनऊ में अग्निकांड को लेकर अमर उजाला ने दमकल विभाग को चेताने के लिए दस जून से एक अभियान चलाया था। यह एक सप्ताह तक चला था। अभियान में बाजार, कोचिंग सेंटर, अस्पताल और हॉस्टल को शामिल किया गया। हैरत की बात तो यह है कि इतना कुछ होने के बाद भी दमकल विभाग सिर्फ निरीक्षण तक सीमित रहा है।
दिल्ली के मालवीय नगर में होटल कम गेस्ट हाउस में हुए अग्निकांड में कई लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। ऐसी घटना लखनऊ में नहीं हो इसलिए अभियान की शुरुआत की। सिर्फ नोटिस के खेल तक सीमित रह चुके दमकल विभाग की थोड़ी नींद खुल गई। मुख्य अग्निशमन अधिकारी अंकुश मित्तल और उनके अंतर्गत आने वाले फायर स्टेशनों के एफएसओ ने करीब 450 रेस्टोरेंट, क्लब और होटलों का निरीक्षण किया। मगर विभाग को निरीक्षण में क्या खामियां मिलीं और उन्होंने इस पर क्या कार्रवाई की। यह कभी भी विभाग ने जारी नहीं किया।
दमकल विभाग भी सिर्फ फोटो जारी करता रहा
हद तो यह हो गई कि सीएफओ साहब सिर्फ नोटिस भेजने की कार्रवाई प्रचलित होने तक की बात तक सीमित रह गए। मगर कभी कोई कार्रवाई नहीं की। एफएसओ भी सिर्फ मॉक ड्रिल कराते और फोटो खिंचवाते रहे। दमकल विभाग भी सिर्फ फोटो जारी करता रहा। कार्रवाई धरातल पर शून्य रहीं। अगर, विभिन्न प्रतिष्ठानों को नोटिस भी देते तो विभाग वहीं, तक सीमित भी रहता। शायद दमकल विभाग को इसी तरह की घटना का इन्तजार था, जो आज घट भी गई। ऐसे में अगर अभी भी नींद नहीं टूटी तो शहर में इससे बड़ा हादसा होगा।