वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई:  मुस्लिम पक्ष बोला- बदलाव लागू हुए तो नुकसान की भरपाई नहीं; कोर्ट बोला- राहत के लिए मजबूत दलीलें लाइए
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वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: मुस्लिम पक्ष बोला- बदलाव लागू हुए तो नुकसान की भरपाई नहीं; कोर्ट बोला- राहत के लिए मजबूत दलीलें लाइए

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नई दिल्ली1 घंटे पहले

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नए वक्फ कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत पाने के लिए मामले को और मजबूत करना चाहिए।

सुनवाई के दौरान CJI बीआर गवई बोले- “हर कानून के पक्ष में संवैधानिकता की धारणा होती है। अंतरिम राहत के लिए, आपको एक बहुत मजबूत और स्पष्ट मामला बनाना होगा। वरना, संवैधानिकता की धारणा बनी रहेगी।”

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कुल तीन मुद्दे हैं, जिन पर रोक लगाने की मांग की गई है और उस पर मैंने जवाब दाखिल कर दिया है। इन मुद्दों पर सुनवाई को सीमित किया जाए।

याचिकाकर्ताओं के वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने इसका विरोध किया और कहा- कोई भी सुनवाई टुकड़ों में नहीं हो सकती। यह वक्फ संपत्तियों पर कब्जे का मामला है।

सिब्बल ने कहा कि सिर्फ तीन मुद्दे नहीं हैं। पूरे वक्फ पर अतिक्रमण का मुद्दा है। सरकार तय नहीं कर सकती कि कौन से मुद्दे उठाए जाएं। अगर प्रावधान लागू हुए नुकसान तो भरपाई मुश्किल होगी।

मंगलवार को 3 घंटे तक याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद बेंच ने मामला बुधवार, 21 मई तक के लिए स्थगित कर दिया। बेंच अब केंद्र सरकार का पक्ष सुनेगी।

याचिकाकर्ताओं की दलीलें

  • 2025 के संशोधनों को वक्फ पर कब्जा करने के लिए डिजाइन किया गया है, जो गैर-न्यायिक है। संशोधनों ने “एक बार वक्फ, हमेशा वक्फ” के सिद्धांत को निरस्त कर दिया है।
  • रजिस्ट्रेशन न होने से वक्फ की वैधता पर असर नहीं होता था। केवल जुर्माना लगता था। संशोधन के बाद अगर रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ तो वक्फ को मान्यता नहीं मिलेगी।
  • कानून में जांच के लिए कोई प्रक्रिया-डेडलाइन तय नहीं है। जमीन के एक टुकड़े पर भी विवाद होने पर पूरी संपत्ति का वक्फ दर्जा खत्म हो जाएगा।
  • यह शर्त रखी गई है कि केवल 5 साल तक इस्लाम का पालन करने वाला व्यक्ति ही वक्फ बना सकता है, जिसे स्वयं में असंवैधानिक बताकर चुनौती दी गई।
  • पहले वक्फ बोर्ड का CEO मुस्लिम होना जरूरी था। अब गैर मुस्लिम हो सकता है, यह वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने का प्रयास है।

सरकार की दलीलें…

  • वक्फ अपने स्वभाव से ही धर्मनिरपेक्ष अवधारणा है। संवैधानिकता के अनुमान को देखते हुए इसे रोका नहीं जा सकता।
  • 2013 के संशोधन के बाद वक्फ संपत्तियों में 1600% की बढ़ोतरी हुई है।
  • संसद द्वारा पारित कानून को आम तौर पर रोका नहीं जा सकता।

कोर्ट ने केंद्र को तीन निर्देश दिए थे…

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था- अंतरिम राहत देने पर विचार करेंगे

इससे पहले कोर्ट ने इस मुद्दे पर 15 मई को सुनवाई की थी। तब CJI बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह ने केंद्र और याचिकाकर्ता को 19 मई तक हलफनामा पेश करने को कहा था। हालांकि, इसको लेकर जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

केंद्र की और से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और याचिकाकर्ताओं की ओर से कपिल सिब्बल ने दलीलें पेश कीं। बेंच ने कहा कि अंतरिम राहत दिए जाने के मुद्दे पर हम 20 मई को विचार करेंगे।

दोनों पक्षों के वकीलों ने कहा था कि याचिकाओं के मुद्दों पर नजर डालने के लिए जजों को कुछ और वक्त की जरूरत हो सकती है। केंद्र ने भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट जब तक मामले को सुन रहा है, तब तक कानून के अहम प्रावधान लागू नहीं होंगे, यथास्थिति बनी रहेगी।

केंद्र ने 25 अप्रैल को दायर किया था 1300 पेज का हलफनामा

केंद्र ने 25 अप्रैल को दायर हलफनामे में कहा था कि कानून पूरी तरह संवैधानिक है। यह संसद से पास हुआ है, इसलिए इस पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए।

1332 पन्नों के हलफनामे में सरकार ने दावा किया 2013 के बाद से वक्फ संपत्तियों में 20 लाख एकड़ से ज्यादा का इजाफा हुआ। इस वजह से कई बार निजी और सरकारी जमीनों पर विवाद हुआ।

वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने सरकार के आंकड़ों को गलत बताया और कोर्ट से झूठा हलफनामा देने वाले वाले अधिकारी पर कार्रवाई की मांग की।

नए वक्फ कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 70 से ज्यादा याचिकाएं दायर हुई हैं, लेकिन कोर्ट सिर्फ पांच मुख्य याचिकाओं पर ही सुनवाई करेगा। इसमें AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी की याचिका शामिल है।

नया कानून अप्रैल में राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हुआ था। लोकसभा में 288 और राज्यसभा में 128 सांसदों ने इसका समर्थन किया था। कई विपक्षी पार्टियों ने इसका विरोध किया और सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सॉलिसिटर जनरल बोले- लाखों सुझावों के बाद संशोधित कानून बना अब CJI बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज की बेंच मामले पर सुनवाई करेगी। पहले तत्कालीन CJI संजीव खन्ना, जस्टिस पीवी संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच इस मामले पर सुनवाई कर रही थी। जस्टिस खन्ना 13 मई को रिटायर हो गए। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता, जबकि कानून के खिलाफ कपिल सिब्बल, राजीव धवन, अभिषेक मनु सिंघवी, सीयू सिंह दलीलें रख रहे हैं।

17 अप्रैल की सुनवाई में SG मेहता ने कहा था कि संसद से ‘उचित विचार-विमर्श के साथ’ पारित कानून पर सरकार का पक्ष सुने बिना रोक नहीं लगाई जानी चाहिए।

उन्होंने कहा था कि लाखों सुझावों के बाद नया कानून बना है। ऐसे कई उदाहरण हैं, जिनमें गांवों को वक्फ ने हड़प लिया। कई निजी संपत्तियों को वक्फ में ले लिया गया। इस पर बेंच ने कहा कि हम अंतिम रूप से निर्णय नहीं ले रहे हैं।

याचिका में 3 बड़ी बातें…

  • कानून संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 25 (धार्मिक स्वतंत्रता), 26 (धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता), 29 (अल्पसंख्यक अधिकार) और 300A (संपत्ति का अधिकार) का उल्लंघन करता है।
  • वक्फ बोर्ड में गैर-मुसलमानों को शामिल करना और डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर को वक्फ संपत्ति का फैसला करने का अधिकार देना सरकारी दखलंदाजी को बढ़ाता है।
  • यह कानून मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव करता है, क्योंकि अन्य धार्मिक ट्रस्टों पर समान प्रतिबंध नहीं हैं।

16 अप्रैल: पहले दिन की सुनवाई की 3 बड़ी बातें…

1. वक्फ बोर्ड बनाने की प्रक्रिया: कानून के खिलाफ दलील दे रहे कपिल सिब्बल ने कहा,’हम उस प्रावधान को चुनौती देते हैं, जिसमें कहा गया है कि केवल मुसलमान ही वक्फ बना सकते हैं। सरकार कैसे कह सकती है कि केवल वे लोग ही वक्फ बना सकते हैं जो पिछले 5 सालों से इस्लाम को मान रहे हैं? इतना ही नहीं, राज्य कैसे तय कर सकता है कि मैं मुसलमान हूं या नहीं और इसलिए वक्फ बनाने के योग्य हूं?’

2. पुरानी वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन पर: सिब्बल ने कहा- यह इतना आसान नहीं है। वक्फ सैकड़ों साल पहले बनाया गया है। अब ये 300 साल पुरानी संपत्ति की वक्फ डीड मांगेंगे। यहां समस्या है। इस पर SG ने कहा- वक्फ का रजिस्ट्रेशन 1995 के कानून में भी था। सिब्बल साहब कह रहे हैं कि मुतवल्ली को जेल जाना पड़ेगा। अगर वक्फ का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ तो वह जेल जाएगा। यह 1995 से है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘अंग्रेजों से पहले वक्फ रजिस्ट्रेशन नहीं होता था। कई मस्जिदें 13वीं, 14वीं सदी की है। इनके पास रजिस्ट्रेशन या सेल डीड नहीं होगी। ऐसी संपत्तियों को कैसे रजिस्टर करेंगे। उनके पास क्या दस्तावेज होंगे? वक्फ बाई यूजर मान्य किया गया है, अगर आप इसे खत्म करते हैं तो समस्या होगी।’

3. बोर्ड मेंबर्स में गैर-मुस्लिम: सिब्बल ने कहा, ‘केवल मुस्लिम ही बोर्ड का हिस्सा हो सकते थे। अब हिंदू भी इसका हिस्सा होंगे। यह अधिकारों का हनन है। आर्टिकल 26 कहता है कि नागरिक धार्मिक और समाजसेवा के लिए संस्था की स्थापना कर सकते हैं।

इस मसले पर CJI और SG के बीच तीखी बहस हुई। कोर्ट ने पूछा कि क्या सरकार हिंदू धार्मिक बोर्ड में मुस्लिमों को शामिल करेगी? SG ने कहा कि वक्फ परिषद में पदेन सदस्यों के अलावा दो से ज्यादा गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं होंगे।

इस पर बेंच ने कहा, ‘नए एक्ट में वक्फ परिषद के 22 सदस्यों में से आठ मुस्लिम होंगे। इसमें दो ऐसे जज हो सकते हैं, जो मुस्लिम न हों। ऐसे में बहुमत गैर मुस्लिमों का होगा। इससे संस्था का धार्मिक चरित्र कैसे बचेगा?’

क्यों हो रहा कानून का विरोध…

पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में हिंसा हुई

  • 11 अप्रैल: जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में वक्फ कानून के खिलाफ प्रदर्शन हुए। कुछ स्थानीय संगठनों और नेताओं ने कानून को अल्पसंख्यक अधिकारों के खिलाफ बताया। स्थिति तनावपूर्ण बनी तो हुर्रियत नेताओं को नजरबंद किया गया।
  • 12 अप्रैल: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में वक्फ कानून के विरोध में 11-12 अप्रैल को हिंसा हुई थी। भीड़ ने बमबारी की और सरकारी वाहनों को आग के हवाले कर दिया था। प्रदर्शनकारियों ने ट्रेनों पर भी हमला किया था। इस हिंसा में 3 लोग मारे गए थे, जबकि 15 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। 300 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
मुर्शिदाबाद में प्रदर्शन के दौरान भीड़ हिंसक हो गई और पुलिसवालों पर पत्थरबाजी की गई।

मुर्शिदाबाद में प्रदर्शन के दौरान भीड़ हिंसक हो गई और पुलिसवालों पर पत्थरबाजी की गई।

  • 12 अप्रैल: त्रिपुरा के उनाकोटी जिले में 4 हजार लोगों की रैली हिंसक हुई। SDPO सहित कम से कम 18 पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसके बाद पुलिस ने 18 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया।
  • 13 अप्रैल: असम के सिलचर में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया। मधुरबंद इलाके में बिना परमिशन हजारों लोग जुट गए। पुलिस उन्हें रोकने की कोशिश की। पहले धक्का-मुक्की की, फिर पत्थर फेंके। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को भी लाठी चार्ज करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने धार्मिक और भाजपा मुर्दाबाद के नारे लगाए। तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) के अध्यक्ष और अभिनेता विजय ने वक्फ कानून को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

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