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नई दिल्ली4 घंटे पहले
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पाकिस्तान के सीजफायर तोड़ने पर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 10 मई की रात 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने मंगलवार को लगातार दूसरे दिन भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष पर संसदीय समिति को ब्रीफ किया। आज संजय झा (JDU), श्रीकांत शिंदे (शिवसेना) और के कनिमोझी (DMK) के लीडरशिप वाले 3 डेलिगेशन को ब्रीफ किया गया।
मिसरी ने सभी डेलिगेशन के सदस्यों को पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर भारत के एजेंडे और इसकी बारीकियों को समझाया। बैठक में TMC की ओर से अभिषेक बनर्जी शामिल रहे, वे संजय झा (JDU) के डेलिगेशन में शामिल हैं। जो जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, इंडोनेशिया और सिंगापुर जाएगा।
दरअसल, अभिषेक को TMC सांसद यूसुफ पठान की जगह डेलिगेशन में जोड़ा गया है। सरकार की पहले जारी लिस्ट में यूसुफ पठान का नाम था, लेकिन TMC चीफ ममता बनर्जी ने पार्टी से पूछे बिना पठान को शामिल करने पर नाराजगी जाहिर की थी।
इसके बाद केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने ममता से बात की थी और फिर अभिषेक का नाम फाइनल हुआ था।

ब्रीफिंग में शामिल होने के बाद किसने क्या कहा
- सलमान खुर्शीद: जो कुछ हुआ, दो देशों के बीच हुआ संजय झा के डेलिगेशन में शामिल कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा- भारत और पाकिस्तान के बीच अंडरस्टैंडिंग में किसी ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया, कोई मध्यस्थता नहीं हुई, लेकिन जब दुनिया में ऐसी चीजें होती हैं तो अलग-अलग लोग संदेश भेजने की कोशिश करते हैं। जो कुछ भी हुआ है, वह सिर्फ दो देशों के बीच हुआ है।
- श्रीकांत शिंदे: पाकिस्तान-आतंकवाद पर भारत ने बहुत झेला शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा- कल (21 मई) हमारा समूह UAE और साउथ अफ्रीका रवाना होगा। यह ब्रीफिंग हमारे लिए उपयोगी साबित होगी। हम अन्य देशों को इस बारे में जागरूक करेंगे कि भारत पिछले कई सालों से पाकिस्तान और आतंकवाद के हाथों क्या झेल रहा है।
- एसएस अहलूवालिया: पाकिस्तान पूरी दुनिया में झूठ फैला रहा अलग-अलग बातें फैलाई जा रही हैं, खास तौर पर पाकिस्तान में मीडिया ने 7 मई को क्या हुआ, 22 अप्रैल को क्या हुआ, 7 से 11 मई के बीच क्या हुआ। वे पूरी दुनिया में झूठ फैला रहे हैं। एक राष्ट्र और सभी दलों के प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे दूसरे देशों में जाएं और वहां के विधायकों/व्यापारिक समुदाय/बुद्धिजीवियों से मिलें और उन्हें बताएं कि वास्तव में वहां क्या हुआ था।
- राजीव राय: जब राष्ट्र रहेगा तभी को पार्टी रहेगी हमारा क्या रुख है, पहलगाम से लेकर युद्ध विराम तक क्या-क्या घटनाएं हुईं और पाकिस्तान किस तरह शामिल था, हम क्या उम्मीद करते हैं, इन सभी पर चर्चा हुई। हमें पाकिस्तान को बेनकाब करना है और उन्हें यह एहसास कराना है कि भारत कभी भी पाकिस्तान, उनकी सेना या उनके लोगों के खिलाफ नहीं था। हमने आतंकी कैंप पर हमला किया। हम राष्ट्र के प्रतिनिधि के तौर पर जा रहे हैं, राष्ट्र सर्वोच्च है। कोई पार्टी नहीं है। अगर राष्ट्र रहेगा, तभी पार्टी और राजनीति रहेगी।
59 सदस्यों का डेलिगेशन दुनिया को ऑपरेशन सिंदूर के बारे में बताएगा
केंद्र सरकार ने 59 सदस्यों वाले 7 डेलिगेशन (ग्रुप) की घोषणा की है। इसमें 51 नेता और 8 राजदूत हैं। NDA के 31 और 20 दूसरे दलों के हैं, जिसमें 3 कांग्रेस नेता भी हैं। ये डेलिगेशन दुनिया के बड़े देशों, खासकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सदस्य देशों का दौरा करेगा। वहां ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर भारत का रुख रखेगा।
दरअसल, भारत ने 23 मिनट के ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया था। इसमें 9 आतंकी ठिकाने तबाह किए गए थे। इसके बाद के एक्शन में पाकिस्तानी एयरबेसेस को निशाना बनाया था। 10 मई की शाम 5 बजे भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर हो गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने X पर इसका ऐलान किया था।
कांग्रेस के दिए 4 नाम में से केवल एक को चुना
कांग्रेस ने केंद्र को 4 कांग्रेस नेताओं के नाम डेलिगेशन में शामिल करने के लिए दिए थे। इनमें आनंद शर्मा, गौरव गोगोई, सैयद नसीर हुसैन और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नाम थे। केंद्र ने केवल आनंद शर्मा को शामिल किया है। कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले की आलोचना की।
कांग्रेस ने कहा- सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के दिए 4 में से केवल एक नाम (नेता) को शामिल किया गया। यह नरेंद्र मोदी सरकार की पूरी तरह से निष्ठाहीनता को साबित करता है और गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर उसके खेले जाने वाले सस्ते राजनीतिक खेल को दर्शाता है।
शनिवार को कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने X पर लिखा था- शुक्रवार (16 मई) सुबह संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी से बात की थी। उन्होंने विदेश भेजे जाने वाले डेलिगेशन के लिए 4 सांसदों का नाम मांगा था। कांग्रेस ने आनंद शर्मा, गौरव गोगोई, डॉ. सैयद नसीर हुसैन और राजा बरार के नाम दिए थे।’

जयराम ने बताया कि 16 मई को दोपहर तक, राहुल गांधी ने संसदीय कार्य मंत्री को पत्र लिखकर कांग्रेस की ओर से 4 नाम दिए थे।
ओवैसी बोले- पाकिस्तान मानवता के लिए खतरा
AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने 17 मई को कहा था कि पाकिस्तान आतंकवादियों को ट्रेनिंग, फंडिंग और हथियार देकर मानवता के लिए खतरा बन गया है।
उन्होंने कहा था कि पाकिस्तानी डीप स्टेट और पाकिस्तानी सेना का मकसद भारत की अर्थव्यवस्था को विफल करना और समुदायों को विभाजित करना है। ओवैसी ने कहा- ऑल पार्टी डेलिगेशन के साथ जाने पर वे विदेशी सरकारों को पाकिस्तान के इरादों के बारे में बताएंगे।
ओवैसी ने कहा था कि पाकिस्तान खुद को इस्लाम और सभी मुसलमानों का रक्षक बताता है, लेकिन यह बकवास है। भारत में भी 20 करोड़ मुसलमान हैं और वे पाकिस्तान की हरकतों की निंदा करते हैं। पाकिस्तान 1948 से भारत को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है और वह रुकने वाला नहीं है।
पिछली सरकारों ने भी अपना पक्ष रखने के लिए डेलिगेशन विदेश भेजे-
1994: विपक्ष के नेता वाजपेयी ने UNHRC में भारत का पक्ष रखा था ये पहली बार नहीं है, जब केंद्र सरकार किसी मुद्दे पर अपना पक्ष रखने के लिए विपक्षी पार्टियों की मदद लेगी। इससे पहले 1994 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने कश्मीर के मुद्दे पर भारत का पक्ष रखने के लिए विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारतीय डेलिगेशन को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UNHRC) भेजा था।
उस डेलिगेशन में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और सलमान खुर्शीद जैसे नेता भी शामिल थे। तब पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघन के संबंध में UNHRC के सामने एक प्रस्ताव पेश करने की तैयारी में था।
हालांकि, भारतीय डेलिगेशन ने पाकिस्तान के आरोपों का जवाब दिया और नतीजतन पाकिस्तान को अपना प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। उस समय UN में भारत के राजदूत हामिद अंसारी ने भी प्रधानमंत्री राव की रणनीति सफल कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
2008: मुंबई हमलों के बाद मनमोहन सरकार ने डेलिगेशन विदेश भेजा था 2008 में मुंबई हमलों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी आतंकवादी हमलों में पाकिस्तानी लिंक होने से जुड़े दस्तावेजों के साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के डेलिगेशन को विदेश भेजने का फैसला किया था।
भारत ने पाकिस्तान पर सैन्य हमला न करने का फैसला किया था। हालांकि, मनमोहन सरकार के कूटनीतिक हमले के कारण पाकिस्तान पर लश्कर-ए-तैयबा और अन्य आतंकी समूहों के खिलाफ एक्शन लेने के लिए काफी अंतरराष्ट्रीय दबाव पड़ा। यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने पाकिस्तान को पहली बार ग्रे-लिस्ट में भी डाला था।
क्या है ऑपरेशन सिंदूर? 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था। आतंकियों ने 26 टूरिस्ट्स की हत्या की थी। 7 मई को भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और पाक में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी। सेना ने 100 आतंकियों को मार गिराया था। दोनों देशों के बीच 10 मई की शाम 5 बजे से सीजफायर पर सहमति बनी थी।

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ऑपरेशन सिंदूर, जवान बोले- गोली उन्होंने चलाई, धमाका हमने किया; पाकिस्तान इसे दशकों तक याद रखेगा

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर न्यूज एजेंसी ANI ने लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के अखनूर सेक्टर में भारतीय सैनिकों से बातचीत की। जवानों ने बताया कि गोली उन्होंने (पाकिस्तान) चलाई थी, लेकिन धमाका हमने किया।
भारतीय सैनिकों ने ये भी बताया कि हमने पाकिस्तान को ऐसा सबक सिखाया है कि दशकों तक वे याद रखेंगे। भविष्य में कुछ भी करने से पहले सौ बार सोचेंगे। पूरी खबर पढ़ें…
पीएम बोले- पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई सिर्फ स्थगित, हमला हुआ तो मुंहतोड़ जवाब देंगे

पाकिस्तान के साथ सीजफायर के 51 घंटे बाद PM मोदी ने सोमवार रात 8 बजे देश को संबोधित किया था। अपने 22 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री ने पहलगाम हमला, ऑपरेशन सिंदूर, सीजफायर, आतंकवाद, सिंधु जल समझौते और PoK पर बात की थी। PM ने कहा था कि जिन आतंकियों ने हमारी मां-बहनों का सिंदूर मिटाया, हमने उन्हें मिटा दिया। पूरी खबर पढ़ें…








