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- Vivah Panchami On 25th November, Significance Of Vivah Panchami, The Marriage Of Shri Ram And Sita Took Place On Margashirsha Shukla Panchami, Ram Sita Puja Vidhi
23 घंटे पहले
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आज (25 नवंबर) विवाह पंचमी है। मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पप विवाह पंचमी मनाई जाती है। मान्यता है कि त्रेता युग में इसी तिथि पर भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह हुआ था। इस पर्व पर राम-सीता का विशेष पूजा करने की परंपरा है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, विवाह पंचमी के अवसर पर राम-सीता के मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन-पूजन करते हैं, व्रत रखते हैं। विवाह पंचमी पर ही गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपना ग्रंथ श्रीरामचरितमानस पूर्ण किया था। इस वजह से आज श्रीरामचरितमानस का पाठ खासतौर पर करना चाहिए। ऐसा करने से घर में प्रेम, सकारात्मक ऊर्जा, शांति और आनंद बना रहता है।
विवाह पंचमी पर ऐसे करें श्रीराम-सीता पूजा
- स्नान के बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें।
- घर के मंदिर में पूजा की चौकी तैयार करें। चौकी पर स्वच्छ कपड़ा बिछाकर राम दरबार यानी श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान जी, भरत-शत्रुघ्न की मूर्तियां या चित्र स्थापित करें।
- भगवान की मूर्तियों पर पहले शुद्ध जल चढ़ाएं और फिर पंचामृत से अभिषेक करें। पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और मिश्री से तैयार किया जाता है। पंचामृत के बाद पुनः स्वच्छ जल से स्नान कराएं।
- अभिषेक के बाद श्रीराम-सीता की मूर्तियों को वस्त्र, फूल, हार और आभूषणों से सजाएं। राम जी को दूल्हे और माता सीता को दुल्हन की तरह सजाना चाहिए।
- फल-फूल, नैवेद्य (गाय के दूध से बनी मिठाई), रोली, चावल, पुष्प, धूप-दीप आदि अर्पित करते हुए रां रामाय नम: मंत्र जप करें। मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर भगवान की आरती करें।
- पूजा करते समय सीता-राम, सीता-राम नाम जप कर सकते हैं। श्रीराम रक्षा स्तोत्र या भगवान के अन्य स्तोत्रों का पाठ भी किया जा सकता है।
- विवाह पंचमी पर श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी की भी विशेष पूजा करनी चाहिए। मान्यता है कि हनुमान जी के बिना श्रीराम की पूजा अधूरी मानी जाती है। हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए।
- पूजा के अंत में जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें और फिर प्रसाद ग्रहण करें। अन्य लोगों को भी प्रसाद बांटें।
वैवाहिक जीवन में प्रेम बनाए रखने की कामना से करें राम-सीता की पूजा
मान्यता है कि विवाह पंचमी पर की गई श्रीराम-सीता की पूजा से वैवाहिक जीवन से जुड़ी समस्याएं दूर हो सकती हैं। भगवान राम और माता सीता आदर्श दांपत्य जीवन के प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि जो पति-पत्नी विवाह पंचमी पर श्रद्धा भाव से पूजा करते हैं, उनके वैवाहिक जीवन में आपसी प्रेम, सामंजस्य और शांति बनी रहती है।








