वैशाख महीना 3 अप्रैल से 1 मई तक:  स्नान-दान और विष्णु पूजा का महीना, इसी महीने शुरू होगी उत्तराखंड की चारधाम यात्रा
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वैशाख महीना 3 अप्रैल से 1 मई तक: स्नान-दान और विष्णु पूजा का महीना, इसी महीने शुरू होगी उत्तराखंड की चारधाम यात्रा

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59 मिनट पहले

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वैशाख 3 अप्रैल से शुरू होकर 1 मई की पूर्णिमा तक रहेगा। इसे हिंदू पंचांग का दूसरा महीना माना जाता है। पुराणों में यह भगवान विष्णु का प्रिय महीना बताया गया है, इसलिए इसे माधव मास भी कहा जाता है।

स्कंद पुराण में कहा गया है कि – “न माधवसमो मासः…” यानी वैशाख जितना पुण्य देने वाला दूसरा कोई महीना नहीं है। शास्त्र इस महीने को स्नान, दान, सेवा, संयम और विष्णु-पूजन का समय बताते हैं। यही वजह है कि इस पूरे महीने में जलदान, सुबह स्नान, तुलसी के साथ भगवान विष्णु की पूजा और जरूरतमंद लोगों की मदद का खास महत्व माना जाता है।

व्रत, पर्व और यात्रा, तीनो लिहाज से बेहद खास है वैशाख महीना इस महीने की सबसे अहम तिथि अक्षय तृतीया है। जो इस बार 19 अप्रैल को रहेगी। शास्त्रीय मान्यता है कि इस दिन किए गए दान-पुण्य, जप और शुभ काम अक्षय फल देते हैं। इसी वजह से यह तिथि दान, पूजन और शुभ शुरुआत के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। वैशाख में धार्मिक गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं। इस महीने में उत्तराखंड के चारधाम (गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ) के कपाट खुलते हैं और चारधाम यात्रा शुरू होती है। इसलिए यह महीना व्रत, पर्व और यात्रा, तीनों लिहाज से खास है।

भगवान विष्णु का प्रिय, जलदान करने का महीना इस महीने को भगवान विष्णु का प्रिय महीना कहा गया है। शास्त्रीय परंपरा में विष्णु-पूजन, तुलसी अर्पण, प्रातः स्नान और दान को विशेष फलदायी माना गया है। वैशाख की सबसे बड़ी पहचान है जल और पुण्य। इस समय गर्मी बढ़ने लगती है, इसलिए शास्त्र इस महीने जलदान को सबसे बड़ा धर्म बताते हैं। स्कंद पुराण के वैशाख माहात्म्य में प्यासे को पानी पिलाने, छाया देने और लोकसेवा को बहुत ऊंचा फल देने वाला बताया गया है। इसी परंपरा में प्याऊ लगवाना, राहगीरों के लिए ठंडे पानी की व्यवस्था करना, पशु-पक्षियों के लिए पानी रखना और शीतलता देने वाली चीजों का दान करना खास माना गया। यही कारण है कि इसे केवल पूजा-पाठ का महीना नहीं, बल्कि धर्म और परोपकार का महीना भी कहा जाता है।

इस महीने तीर्थ स्नान और विष्णु पूजा का महीना सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। तीर्थ स्नान नहीं कर सकते तो घर में ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें और तुलसी अर्पित करें। प्रातःकालीन स्नान और विष्णु-पूजन की परंपरा वैशाख से खास तौर पर जुड़ी मानी गई है।

इस महीने जलदान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है। घर, दुकान, मोहल्ले या रास्ते में पानी की व्यवस्था, छत या आंगन में पक्षियों के लिए जलपात्र, जरूरतमंदों को शीतल पेय, सत्तू, गुड़, छाता, जूते या मिट्टी का घड़ा देना उपयोगी भी है और धर्म परंपरा से भी जुड़ा है। स्कंद पुराण की परंपरा में जल और शीतलता देने वाली सेवा को सबसे बड़ा पुण्य बताया गया है।

इस महीने में किन बातों का ध्यान रखें गर्मी की शुरुआत होने की वजह से सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। हीटवेव से बचाव के लिए पर्याप्त पानी पीना, हल्का भोजन लेना, जलयुक्त फल खाना, धूप में निकलते समय सिर ढंकना और दोपहर की तेज गर्मी से बचना जरूरी है। यही कारण है कि इस महीने की धार्मिक परंपराएं भी पानी, छाया और शरीर को शीतल रखने वाली चीजों से जुड़ी हुई हैं।



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