14 घंटे पहले
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आज (17 अप्रैल) वैशाख अमावस्या है। इस अमावस्या पर पितर देव के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों को तृप्ति मिलती है। घर-परिवार के मृत सदस्यों को पितर देव माना जाता है। वैशाख अमावस्या और शुक्रवार का योग होने से इस दिन महालक्ष्मी और भगवान विष्णु का विशेष अभिषेक करना चाहिए, इसके अलावा शुक्र ग्रह की भी पूजा करनी चाहिए।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, वैशाख अमावस्या का व्रत सुख-समृद्धि और सफलता देने वाला माना जाता है। शुक्रवार और अमावस्या के योग में शुक्र की विशेष पूजा करेंगे, तो कुंडली में इस ग्रह से संबंधित दोषों का असर कम हो सकता है। जानिए शुक्र ग्रह की पूजा विधि…
पूजन सामग्री- सफेद फूल, चावल, दूध, दही, घी, मिश्री, सफेद मिठाई, दीपक, धूप बत्ती।
पूजन विधि- सबसे भगवान गणेश की पूजा करें। गणेश पूजा के बाद शुक्र ग्रह की पूजा करने का संकल्प लें।
दीपक और धूप-बत्ती जलाएं। शुक्र देव की प्रतिमा पर सफेद फूल और चावल अर्पित करें। अगर शुक्र देव की प्रतिमा न हो, तो शिवलिंग की पूजा कर सकते हैं।
दूध-मिठाई का भोग लगाएं। शुक्र ग्रह के मंत्र ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः का जप करें।
शिवलिंग की पूजा कर रहे हैं, तो शिव जी को बिल्व पत्र, धतूरा, फूल चढ़ाएं। शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें।
चावल, दूध, मिश्री का दान करें। परफ्यूम या इत्रा का दान भी कर सकते हैं। पूजा के अंत में भगवान से जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें।
भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की ऐसे करें पूजा
पूजन सामग्री- लाल, पीले और सफेद फूल, चावल, तुलसी के पत्ते, दूध, फल, मिठाई, दीपक, धूप बत्ती, चंदन
पूजा विधि – सबसे पहले प्रथम पूजन भगवान गणपति की पूजा करें। गणेश पूजन के बाद भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा का संकल्प करें।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करें। दीपक, धूप बत्ती जलाएं।
भगवान की प्रतिमाओं पर जल चढ़ाएं। अगर तस्वीर की पूजा कर रहे हैं, तो थोड़ा सा जल छिड़कें। फूल चढ़ाएं। वस्त्र अर्पित करें। चंदन लगाएं।
तुलसी पत्तों के साथ मिठाई का भोग लगाएं। दूध-फल भी अर्पित करें।
विष्णु मंत्र- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय, लक्ष्मी मंत्र – ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः का जप करें।
आरती करें। पूजा के अंत में भगवान से जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें। प्रसाद बांटें और खुद भी लें।
ऐसे करें पितरों के लिए धूप-ध्यान
दोपहर में करीब 12 बजे गाय के गोबर से बना कंडा (उपला) जलाएं और जब कंडे से धुआं निकलना बंद जो जाए, तब अंगारों पर गुड़-घी डालें, पितरों का ध्यान करें। हथेली में जल लें और अंगूठे की ओर से पितरों को अर्पित करें। आप चाहें, खीर-पुड़ी भी अर्पित कर सकते हैं। धूप-ध्यान के बाद गाय, कुत्ते और कौएं को भी खाना खिलाएं।
अमावस्या पर कर सकते हैं ये शुभ काम
अमावस्या पर पितरों के नाम से जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं। अनाज, जूते-चप्पल, खाना, छाता, पानी, मटका, धन का दान भी करें।
वैशाख अमावस्या पर पीपल को जल चढ़ाएं, परिक्रमा करें और पेड़ के नीचे दीपक जलाएं। पीपल की कम से कम 7 परिक्रमा करनी चाहिए।
हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। आपके पास पर्याप्त समय हो, तो सुंदरकांड का पाठ भी कर सकते हैं।









