शाह बोले- विपक्ष जेल को CM-PM हाउस बनाना चाहता है:  राहुल ने संसद में लालू को बचाने वाला अध्यादेश फाड़ा था, सरकार गई तो सुर बदले
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शाह बोले- विपक्ष जेल को CM-PM हाउस बनाना चाहता है: राहुल ने संसद में लालू को बचाने वाला अध्यादेश फाड़ा था, सरकार गई तो सुर बदले

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नई दिल्ली4 घंटे पहले

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न्यूज एजेंसी ANI को इंटरव्यू देते अमित शाह। इसमें उन्होंने तीन बिलों, उपराष्ट्रपति चुनाव समेत कई मुद्दों पर बात की। - Dainik Bhaskar

न्यूज एजेंसी ANI को इंटरव्यू देते अमित शाह। इसमें उन्होंने तीन बिलों, उपराष्ट्रपति चुनाव समेत कई मुद्दों पर बात की।

गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को संविधान (130वां संशोधन) विधेयक पर विपक्ष के विरोध को गलत बताया। उन्होंने कहा, ‘क्या कोई मुख्यमंत्री (CM), प्रधानमंत्री (PM) या मंत्री जेल से सरकार चला सकता है। वे चाहते हैं कि उन्हें जेल से सरकार चलाने का विकल्प मिले।’

न्यूज एजेंसी ANI के इंटरव्यू में शाह ने जगदीप धनखड़ का इस्तीफा, खुद की गिरफ्तारी, संसद में विपक्ष के विरोध पर चर्चा की।

उन्होंने कहा, “कभी देश का प्रधानमंत्री जेल जाए तो क्या जेल से प्रधानमंत्री सरकार चलाए, वो क्या ठीक है? कोई मुख्यमंत्री जेल से शासन चलाए, ये क्या ठीक है? जिस भी दल का बहुमत है, उसका कोई अन्य व्यक्ति आकर शासन चलाएगा। आपकी बेल हो जाए तो आप फिर पद संभाल लीजिए।’

दरअसल, केंद्र ने 20 अगस्त को संविधान (130वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश किया। इसमें प्रावधान है कि कोई प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री या किसी भी मंत्री को गिरफ्तारी या 30 दिन तक हिरासत में रहने पर पद छोड़ना होगा। शर्त यह है कि जिस अपराध के लिए हिरासत या गिरफ्तारी हुई है, उसमें 5 साल या ज्यादा की सजा का प्रावधान हो। विपक्ष इसका विरोध कर रहा है।

शाह के इंटरव्यू की 6 बातें, कहा- धनखड़ ने इस्तीफा निजी वजह से दिया

  • नए बिल से हमारे मुख्यमंत्रियों पर भी सवाल उठेंगे: ‘आज देश में एनडीए गठबंधन के मुख्यमंत्री ज्यादा हैं। प्रधानमंत्री भी एनडीए से हैं। ऐसे में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक से सिर्फ विपक्ष पर ही सवाल खड़े नहीं होते बल्कि हमारे मुख्यमंत्रियों पर भी सवाल उठेंगे। अगर फर्जी मामला है तो देश के उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट आंखें बंद करके नहीं बैठे हुए हैं, वे जमानत दे सकते हैं। कांग्रेस सरकार में भी ऐसा प्रावधान था कि अगर सत्र अदालत ने किसी को दो साल जेल की सजा सुनाई है तो उस सदस्य की सदस्यता अपने आप चली जाती थी।’
  • जेल जाने के बाद भी दिल्ली के सीएम ने भी इस्तीफा नहीं दिया: आजकल नई परंपरा आ गई है। दो साल पहले ऐसा कोई मामला नहीं था। आरोप लगने के बाद नेता इस्तीफा देते थे। रिहाई के बाद ही राजनीति में शामिल होते थे। लेकिन तमिलनाडु के कुछ मंत्रियों ने जेल में रहने के बावजूद मंत्रीपद से इस्तीफा नहीं दिया था। दिल्ली के सीएम और गृहमंत्री ने भी इस्तीफा नहीं दिया था। राजनीति को बदनाम करने और सामाजिक नैतिकता को इस स्तर तक गिराने के लिए हम इससे सहमत नहीं हैं।’
  • राहुल ने लालू को बचाने अध्यादेश क्यों फाड़ा: “लालू यादव को बचाने के लिए मनमोहन सिंह सरकार अध्यादेश लाई थी। उसे राहुल गांधी ने क्यों फाड़ा, क्या औचित्य था? अगर उस दिन नैतिकता थी तो क्या आज नहीं है, क्योंकि आप लगातार तीन चुनाव हार चुके हैं।” दरअसल, 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने राजनीति में अपराधियों की एंट्री रोकने के लिए एक फैसला सुनाया था। इसमें 2 साल या उससे अधिक की सजा पाने वाले राजनेताओं की सदस्यता रद्द और 6 साल ज्यादा वक्त तक चुनाव न लड़ने का फैसला सुनाया गया था। मनमोहन सरकार ने फैसले के खिलाफ अध्यादेश लाई। इसी दौरान राहुल ने सड़क पर ही अध्यादेश फाड़ने की बात कही।
  • मुझे गिरफ्तार किया गया, लेकिन मैंने पद नहीं लिया: “मुझ पर आरोप लगने पर जैसे ही CBI ने समन दिया, मैंने दूसरे ही दिन इस्तीफा दे दिया। अरेस्ट तो मैं बाद में हुआ था। बाद में केस चला, फैसला भी आया, जिसमें कहा गया कि पॉलिटिकल वेंडेटा (राजनीतिक बदले के लिए) का केस था। मैं पूर्णतया निर्दोष हूं। मेरी जमानत पहले हो गई थी, फैसला बाद में आया। ये पॉलिटिकल वेंडेटा का केस था, मेरा इससे दूर-दूर तक जुड़ाव नहीं था।” शाह का यह मामला सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस से जुड़ा है। सीबीआई ने 25 जुलाई, 2010 को सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में शाह को गिरफ्तार किया था। वे 3 महीने तक जेल में रहे। 29 अक्टूबर, 2010 को जमानत पर रिहा हुए। इसके बाद अक्टूबर 2010 से सितम्बर 2012 तक उन्हें गुजरात से बाहर रहने को कहा गया। 30 दिसम्बर 2014 को सीबीआई कोर्ट ने शाह को इस मामले में बरी कर दिया था।
  • जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर: “बात का बतंगड़ नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्या के कारण इस्तीफा दिया है। किसी को इस मुद्दे को ज्यादा खींचने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।”
  • रेड्डी को उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बनाने पर: ‘उन्होंने सलवा जुडूम को खारिज कर दिया और आदिवासियों के आत्मरक्षा के अधिकार को खत्म कर दिया। इसी वजह से इस देश में नक्सलवाद दो दशकों से ज्यादा समय तक चला। मेरा मानना है कि वामपंथी विचारधारा ही (विपक्ष द्वारा सुदर्शन रेड्डी को चुनने का) मानदंड रही होगी।’ उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी का एनडीए प्रत्याशी सीपी राधाकृष्णन से मुकाबला है।

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