संजय कुमार का कॉलम:  दक्षिण भारत में अपना प्रदर्शन सुधारना चाहती है भाजपा
टिपण्णी

संजय कुमार का कॉलम: दक्षिण भारत में अपना प्रदर्शन सुधारना चाहती है भाजपा

Spread the love




दक्षिण भारत में भाजपा अपना जनाधार बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। ऐसे में केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में होने जा रहे विधानसभा चुनाव भाजपा को अलग-अलग स्तरों पर चुनावी सफलता दर्ज करने का अवसर देते हैं। आइए, दक्षिण के इन मोर्चों पर भाजपा के प्रयासों और संभावनाओं पर नजर डालते हैं। केरल में एलडीएफ और यूडीएफ के बीच मुकाबला होता रहा है। हर चुनाव के बाद सत्ता इन्हीं दोनों गठबंधनों के पास आती-जाती है। 2021 का चुनाव अपवाद था, जब एलडीएफ ने लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की। भाजपा ने केरल में अपने विस्तार के लिए जी-तोड़ कोशिशें की हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के सुरेश गोपी ने त्रिशूर सीट जीतकर पार्टी का खाता खोला। हाल में 101 सदस्यीय तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा ने 50 वार्ड जीते और बहुमत से सिर्फ एक सीट पीछे रही। 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के नतीजे बताते हैं कि केरल में भाजपा अपना दायरा बढ़ा रही है। 2021 का विधानसभा और हालिया स्थानीय चुनाव भी ऐसा ही इशारा करते हैं। ऐसे में केरल विधानसभा चुनाव में भाजपा पर नजर रखना जरूरी होगा। पार्टी ने राज्य का नाम ‘केरल’ से ‘केरलम’ करके भी अपने पक्ष में सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की है। यह वहां की जनता के लिए भावनात्मक मुद्दा रहा है। तमिलनाडु की बात करें तो वहां परंपरागत रूप से द्रमुक और अन्नाद्रमुक के बीच दो-ध्रुवीय मुकाबला होता रहा है। लेकिन अब वहां चुनावी मैदान में ‘थलापति विजय’ की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कषगम’ (टीवीके) की एंट्री हुई है। अपने पहले बड़े पार्टी सम्मेलन में विजय ने ‘सेकुलर सोशल जस्टिस’ को टीवीके की विचारधारा बताया। उन्होंने भाजपा को वैचारिक शत्रु और डीएमके को राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी ठहराया। उन्होंने वादा किया है कि उनकी राजनीति भ्रष्टाचार से मुक्त होगी, जिसका फोकस समानता, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तीकरण और जाति जनगणना आधारित नीतियों पर होगा। यहां भी भाजपा चुनाव में असर डालने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी माहौल बनाने में तो सफल रही, लेकिन नतीजों में मौजूदगी दर्ज नहीं करा पाई। पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा, लेकिन इन चुनावों से उसे उम्मीद है। 2021 के चुनाव में भाजपा ने अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन में 20 सीटों पर चुनाव लड़ा और 2.6% वोट हासिल किए थे। 2016, 2011 और 2006 के चुनावों में भी वह 3% से कम ही वोट ले पाई थी। भाजपा ने तमिलनाडु में गठबंधन में और अकेले, दोनों ही रणनीतियों से मैदान में उतर कर जनाधार बढ़ाने का प्रयास कर लिया, लेकिन बड़ी सफलता नहीं मिली। अब पार्टी को वहां वोट शेयर बढ़ने की उम्मीद है और इसीलिए जोरदार प्रचार में जुटी है। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष आरएन जयप्रकाश ने आरोप लगाया है कि द्रमुक ने 2021 के चुनावी घोषणा पत्र में 505 वादे किए थे, लेकिन 160 ही पूरे किए। यह बताता है कि सरकार वादा निभाने में विफल हुई। इस कथित नाकामी को चुनावी अवसर मानते हुए भाजपा वहां खुद को एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में पेश करने और साथ ही खुद पर लगाए जा रहे हिंदी थोपने के आरोपों का जवाब देने की कोशिश कर रही है। पार्टी नेता अपने भाषणों में ज्यादा से ज्यादा तमिल अस्मिता की बात कर रहे हैं और तमिल भाषा व संस्कृति के सम्मान पर जोर दे रहे हैं। इधर, महज 30 सीटों वाले पुडुचेरी में अतीत में हुए चुनाव काफी पेचीदा रहे हैं, क्योंकि हार-जीत का अंतर बहुत कम रहा है। पुडुचेरी में एनडीए (बीजेपी और एनआर कांग्रेस का गठबंधन) अपनी सरकार बचाने की कोशिश करेगा। 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के नतीजे बताते हैं कि केरल में भाजपा अपना दायरा बढ़ा रही है। वहीं तमिलनाडु में भी इस बार पार्टी को अपना वोट शेयर बढ़ने की उम्मीद है और इसीलिए वहां वह जोरदार प्रचार में जुटी है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *