जज कैश कांड-सुप्रीम कोर्ट का लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस:  पूछा- राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव नामंजूर फिर जांच पैनल क्यों बनाया, संसद में यह कैसे हुआ
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जज कैश कांड-सुप्रीम कोर्ट का लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस: पूछा- राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव नामंजूर फिर जांच पैनल क्यों बनाया, संसद में यह कैसे हुआ

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नई दिल्ली40 मिनट पहले

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14 मार्च 2025 को जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास से 500-500 रुपए के जले नोटों के बंडलों से भरे बोरे मिले थे। - Dainik Bhaskar

14 मार्च 2025 को जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास से 500-500 रुपए के जले नोटों के बंडलों से भरे बोरे मिले थे।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को नोटिस जारी किया है। जस्टिस यशवंत वर्मा ने याचिका में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए बनाई जांच समिति को चुनौती दी है।

याचिका में जजों की जांच अधिनियम की प्रक्रिया के तहत अकेले लोकसभा से बनाई गई 3 सदस्यों वाली समिति की वैधता को चुनौती दी गई थी।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने लोकसभा स्पीकर के कार्यालय और दोनों सदनों के महासचिवों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है।

कोर्ट ने कहा- जस्टिस दत्ता ने पूछा- संसद में इतने सारे सांसद और कानूनी विशेषज्ञ मौजूद थे, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, संसद में मौजूद कानूनी विशेषज्ञों ने इसे होने कैसे दिया।

14 मार्च को दिल्ली में जज के आधिकारिक आवास के स्टोररूम में आग लगने के बाद जले हुए नोटों के बंडल मिले थे। इसके बाद के घटनाक्रम में उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी 2026 को होगी।

याचिका में दावा- जांच पैनल भारतीय संविधान का उल्लंघन

7 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनल कमेटी की रिपोर्ट और CJI खन्ना की जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की सिफारिश के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया था। उन्होंने अब न्यायाधीश (जांच) अधिनियम के तहत शुरू की गई कार्यवाही को चुनौती देते हुए यह याचिका दायर की है।

याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि एक रिट, आदेश या निर्देश जारी किया जाए जिसमें 12 अगस्त 2025 के लोकसभा स्पीकर की कार्रवाई को असंवैधानिक घोषित किया जाए। साथ ही इसे रद्द किया जाए।

लोकसभा अध्यक्ष ने जज जांच अधिनियम 1968 की धारा 3(2) के तहत जांच पैनल बनाया है। यह कार्रवाई भारत के संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 का उल्लंघन है। कानून की प्रक्रिया के उलट है।

इससे पहले हाईकोर्ट के तीन जजों की इंटरनल जांच में जस्टिस वर्मा को दोषी पाया गया था। उन्हें पद से हटाने की सिफारिश की गई थी।

इसके बाद केंद्र सरकार ने संसद में जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया। संसद के 146 सदस्यों के प्रस्ताव को अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया।

संसद में महाभियोग लाने की प्रक्रिया क्या है…

1968 के जजों (जांच) अधिनियम के अनुसार एक बार जब किसी जज को हटाने का प्रस्ताव किसी भी सदन मेंस्वीकार कर लिया जाता है, तो स्पीकर या चेयरमैन जैसा भी मामला हो, उन आधारों की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति का गठन करेगा, जिनके आधार पर निष्कासन (लोकप्रिय शब्दों में महाभियोग) की मांग की गई है।

जस्टिस वर्मा के वकील ने कहा कि संसद के दोनों सदनों में उनके निष्कासन से जुड़े प्रस्ताव पेश करने के लिए यह जरूरी है कि जांच समिति लोकसभा और राज्यसभा दोनों संयुक्त रूप से बनाएं, न कि अकेले लोकसभा स्पीकर।

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