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नई दिल्ली/भोपाल/ग्वालियर20 मिनट पहलेलेखक: अंशुल वाजपेयी
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कैलिफोर्निया स्थित गेट्टी कंजर्वेशन इंस्टीट्यूट का हेडक्वार्टर में भारतीय संविधान की अंग्रेजी-हिंदी मूल कॉपी नाइट्रोजन बॉक्स में रखी गई हैं।
देश में आज संविधान दिवस मनाया जा रहा है। देश के संविधान में तत्कालीन ग्वालियर (मध्य प्रदेश) रियासत की दरबार पॉलिसी (1923) यानी तत्कालीन समय का संविधान शामिल है। इसकी मूल भावना को केंद्र में रखकर उस समय कानून भी बनाए गए।
देश आजादी से भी कई साल पहले ग्वालियर रियासत के महाराजा माधवराव सिंधिया प्रथम के मार्गदर्शन में बने संविधान की चर्चा आज संविधान दिवस (26 नवंबर) पर इसलिए की जा रही है क्योंकि दरबार पॉलिसी और उस समय के कानून दूरदर्शी सोच के साथ बने थे।
इसीलिए देश आजादी के बाद भी उनका महत्व बरकरार है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब देश का संविधान बना तो दरबार पॉलिसी के कई प्रावधानों को इसमें शामिल किया गया। ग्वालियर रियासत के समय के कानून आज भी फैले हैं। गौर करने वाली बात ये है कि जो कानून ग्वालियर रियासत में देश आजादी से पहले बन गए थे।
ऐसे समझें केंद्र-राज्य और रियासत ग्वालियर के कानून
| केंद्र व राज्य के कानून | रियासत ग्वालियर के कानून |
| सेंट्रल रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 | कानून रजिस्ट्री, रियासत ग्वालियर संवत 1971 |
| इंडियन लिमिटेशन एक्ट 1963 | कानून मियाद समाअत, रियासत ग्वालियर संवत 1971 |
| मप्र नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 | कानून वास्ते तरक्की शहर और कस्बात संवत 1974 |
| वाइल्ड लाईफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 | ग्वालियर के जंगला, परिंदों और जानवरों की हिफाजत नस्ल का कानून संवत 1976 |
| मप्र को-ऑपरेटिव सोसायटीज एक्ट 1960 | कानून को-ऑपरेटिव सोसायटी (रियासत ग्वालियर) संवत 1974 |
| दिवालियापन एक्ट | 1986 कवायद दिवाला (ग्वालियर रियासत) संवत 1994 |
| केंद्रीय सूदखोरी अधिनियम 1978 | कानून सूद (रियासत ग्वालियर) संवत 1974 |
| कंपनीज एक्ट 1956 | ग्वालियर कंपनीज एक्ट संवत 1963 |

संविधान की मूल कॉपी का वजन 13 किलो है। ये पांडुलिपि 45.7X 58.4 सेंटीमीटर के पार्चमेंट पेपर पर लिखी गई। सेलुलोस आधारित पार्चमेंट कागज को खास ट्रीटमेंट से नॉन स्टिक बनाया जाता है। यह पेपर इंग्लैंड के बर्मिंघम शहर से मंगवाया गया था।
ये प्रावधान भी देखिए…
- पंचायत बोर्ड- इसके निर्णय के खिलाफ अपील नहीं होती थी आर्बिट्रेशन का नाम सबसे पहले 1940 में सुनने को मिला। इसमें दोनों पक्ष आर्बीट्रेटर के साथ कई दौर की बैठक करता है और फिर फैसले तक पहुंचा जाता है। ग्वालियर रियासत में पंचायत बोर्ड बनाया जाता था। इसमें स्थानीय ग्राम सभा के सम्मानित लोग पंच की भूमिका निभाते हुए प्रकरणों का निराकरण करते थे। इनके निर्णय के खिलाफ अपील नहीं होती थी।
- लैंड रिकॉर्ड में ऐसी स्पष्टता कि स्याही का रंग, फॉर्मेट सब तय भू-राजस्व संहिता में जमीन के रिकॉर्ड संधारण को लेकर सरकार आज माथापच्ची कर रही है। रिकॉर्ड में कांट-छांट, हेरफेर से बचने डिजिटलाइजेशन किया जा रहा है। ग्वालियर रियासत में फेहरिस्त लैंड रिकॉर्ड मैनुअल संवत-1972 था। इसमें खसरे का प्रारूप बेहद स्पष्ट था। जैसे की इसमें कौन सी एंट्री किस रंग की स्याही से की जाएगी? रोजनामचा-गिरदारी के संबंध में एंट्री के भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
- ग्वालियर रियासत में था क्वारेंटाइन का भी कॉन्सेप्ट देश-विदेश में क्वारेंटाइन का कॉन्सेप्ट तब प्रचलन में आया, जब कोविड महामारी फैली। ग्वालियर रियासत की बात करें तो उस समय कानून निस्बत कोढ़ियान, संवत 1977 था। इसमें कोढ़ जैसी छूने से फैलने वाली बीमारी को रोकने तक के लिए कानून था। इलाज कैसे होगा,इसका भी उल्लेख था।
- पहले भी था सबको समान अधिकार- स्पेशल लॉ का प्रावधान संविधान का आर्टिकल 14,29 व 30- दरबार पॉलिसी का क्लॉज 8 में सभी जाति-धर्म के लोगों को समान अधिकार (क्लाज 8) देने की बात कही गई। हालांकि आकस्मिक स्थिति उत्पन्न होने पर समुदाय के लिए स्पेशल एक्ट बनाना भी आवश्यक बताया गया। संविधान में आर्टिकल-14 में समानता की बात है,जबकि आर्टिकल 29-30 में अल्पसंख्यकों के लिए विशेष कानून का हवाला है।
- जल्द न्याय संविधान का आर्टिकल 21 और दरबार पॉलिसी का क्लॉज 19दरबार पॉलिसी में उस समय स्पीडी जस्टिस (जल्द से जल्द न्याय) पर जोर दिया गया था।ये भी कहा गया था कि जज केवल भगवान के अधीन होगा। न्यायपालिका की स्वतंत्रता को क्लॉज 25 व 27 में समाहित किया गया है। संविधान के आर्टिकल 21 की सुप्रीम कोर्ट ने जब व्याख्या की,तब प्रकरणों के शीघ्र निराकरण की बात पर जोर दिया।
- राज्य की परिभाषा संविधान का आर्टिकल 12- दरबार पॉलिसी का क्लॉज 3इसमें राज्य को परिभाषित किया गया है । दोनों के अनुसार – जिस भी चीज पर शासन का नियंत्रण है,वह राज्य है।

ग्वालियर रियासत में फेहरिस्त लैंड रिकॉर्ड मैनुअल संवत-1972 में खसरे का प्रारूप।
26 नवंबर 1949 को लागू क्यों नहीं हुआ था संविधान?
संविधान सभा ने 2 साल 11 महीने और 17 दिन की कड़ी मेहनत के बाद 26 नवंबर 1949 को संविधान एडॉप्ट किया था। हालांकि, कानूनी रूप से इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया, जिस दिन हम सब रिपब्लिक डे मनाते हैं।
भारत के संविधान की मूल अंग्रेजी कॉपी में 1 लाख 17 हजार 369 शब्द हैं। जिसमें 444 आर्टिकल, 22 भाग और 12 अनुसूचियां हैं। 26 जनवरी, 1930 को कांग्रेस ने देश की पूर्ण आजादी का नारा दिया था। इसी की याद में संविधान को लागू करने के लिए 26 जनवरी, 1950 तक इंतजार किया गया।
1929 में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पहली बार पूर्ण स्वराज की शपथ ली गई थी। उस अधिवेशन में अंग्रेज सरकार से मांग की गई थी कि भारत को 26 जनवरी, 1930 तक संप्रभु दर्जा दे दिया जाए। फिर 26 जनवरी, 1930 को पहली बार पूर्ण स्वराज या स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था।
इसके बाद 15 अगस्त, 1947 तक यानी अगले 17 सालों तक 26 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता रहा। इस दिन के महत्व की वजह से 1950 में 26 जनवरी को देश का संविधान लागू किया गया और इसे गणतंत्र दिवस घोषित किया गया।

प्रेम बिहारी संविधान की मूल कॉपी को लिखते हुए। वे उस वक्त देश के सबसे बड़े कैलीग्राफी आर्टिस्ट माने जाते थे।
प्रेम बिहारी ने हाथ से लिखी संविधान की मूल कॉपी
डॉ. भीमराव अंबेडकर को संविधान सभा की ड्राफ्टिंग सभा का अध्यक्ष होने के नाते संविधान निर्माता होने का श्रेय दिया जाता है। मगर प्रेम बिहारी वे शख्स हैं जिन्होंने अपने हाथ से अंग्रेजी में संविधान की मूल कॉपी यानी पांडुलिपि लिखी थी।
देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने खुद कैलीग्राफर प्रेम बिहारी से संविधान की मूल कॉपी लिखने की गुजारिश की थी। प्रेम बिहारी ने न केवल इसे स्वीकार किया था बल्कि इसके बदले फीस लेने से भी इनकार किया था।
संविधान को हाथ से लिखने में प्रेम बिहारी को 6 महीने लगे थे। इस दौरान 432 निब घिस गईं थीं। प्रेम बिहारी को संविधान हाल में एक कमरा दिया गया, जो बाद में संविधान क्लब हो गया।
भारत का संविधान दुनिया में अकेला है, जिसके हर भाग में चित्रकारी
इसमें राम-सीता से लेकर अकबर और टीपू सुल्तान तक के चित्र हैं। इन्हें शांति निकेतन के नंदलाल बोस की अगुआई वाली टीम ने अपनी कला से सजाया। उनके भी नाम संविधान की मूल कॉपी में लिखे हैं।
संविधान की हिंदी कॉपी कैलीग्राफर वसंत कृष्ण वैद्य ने हाथ से लिखी है। इसका कागज अलग है। इसे हैंडमेड पेपर रिसर्च सेंटर पुणे में बनाया गया है। संविधान की हिंदी कॉपी में 264 पन्ने हैं, जिसका वजन 14 किलोग्राम है।

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भास्कर एक्सप्लेनर- संविधान लिखने में 432 निब घिस गईं: मूल कॉपी का वजन 13 किलो, नाइट्रोजन चैंबर में क्यों रखा गया है

क्या आप जानते हैं कि हमारा संविधान किसने लिखा? कुछ लोगों के मन में डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम आएगा, जबकि इस इस सवाल का सही जवाब प्रेम बिहारी नारायण रायजादा हैं। डॉ. अंबेडकर को संविधान सभा की ड्राफ्टिंग सभा का अध्यक्ष होने के नाते संविधान निर्माता होने का श्रेय दिया जाता है, मगर प्रेम बिहारी वे शख्स हैं जिन्होंने अपने हाथ से अंग्रेजी में संविधान की मूल कॉपी यानी पांडुलिपि लिखी थी। इस काम में उन्हें 6 महीने लगे और कुल 432 निब घिस गईं। पूरी खबर पढ़ें…








