सक्सेस मंत्रा- सही वक्त पर सही फैसला लेने का हुनर:  सफलता के लिए क्यों जरूरी है ये हुनर, जानें स्मार्ट निर्णय लेने के 5 टिप्स
महिला

सक्सेस मंत्रा- सही वक्त पर सही फैसला लेने का हुनर: सफलता के लिए क्यों जरूरी है ये हुनर, जानें स्मार्ट निर्णय लेने के 5 टिप्स

Spread the love


13 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी

  • कॉपी लिंक

क्या आपने कभी सोचा है कि एक फैसला आपकी जिंदगी को कहां से कहां पहुंचा सकता है? साल 1985में जब स्टीव जॉब्स के कंपनी से मतभेद बढ़े तो उन्हें एप्पल छोड़कर जाना पड़ा। उस वक्त कोई भी कह सकता था कि उनका करियर खत्म हो गया, लेकिन स्टीव ने हार नहीं मानी। उन्होंने ‘नेक्स्ट’ और ‘पिक्सर’ जैसी कंपनियां शुरू कीं। वे हर वक्त सीखते रहे, कस्टमर्स की जरूरतें समझते रहे। इसके बाद 1997 में स्टीव जॉब्स एप्पल में फिर वापस आए और इसे दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंपनी बना दिया। यह सब उनके सही निर्णयों का कमाल था।

अब सोचिए, अगर उस वक्त स्टीव ने भावनाओं में बहकर गलत कदम उठाया होता तो क्या होता? शायद हम आज ‘iPhone’ या ‘मैकबुक’ को नहीं जानते। यही है निर्णय लेने की कला। एक ऐसा हुनर जो हमें सही रास्ता दिखाता है, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों।

निर्णय लेना कोई जादू नहीं, बल्कि एक कला है। यह कला हमें सिखाती है कि कैसे हम अपने दिल और दिमाग का सही तालमेल बैठाकर जिंदगी के हर मोड़ पर बेहतर फैसले ले सकते हैं।

आज के सक्सेस मंत्रा में समझते हैं कि निर्णय लेने की कला क्या है, यह क्यों जरूरी है और इसे कैसे सीखा जा सकता है।

दिल और दिमाग के संगम से आती है निर्णय लेने की कला

हमारे दिमाग का काम करने का तरीका बड़ा अनोखा है। नोबेल पुरस्कार विजेता डैनियल कैनमैन अपनी किताब ‘थिंकिंग, फास्ट एंड स्लो’ में बताते हैं कि इंसान दो तरह से सोचता है:

तेज और सहज: यह वह सोच है जो हमें तुरंत फैसले लेने में मदद करती है। जैसे, सड़क पर अचानक गाड़ी देखकर रुक जाना। इसे कैनमैन ‘सिस्टम 1’ कहते हैं।

धीमा और तार्किक: यह सोच गहराई से विश्लेषण करती है, जैसे- नई नौकरी चुनते वक्त सारी चीजों को तौलना। इसे ‘सिस्टम 2’ कहते हैं।

सफल लोग करते हैं दोनों का सही इस्तेमाल

  • स्टीव जॉब्स ने जब एप्पल छोड़ा तो उनका दिल टूटा होगा। इसके बावजूद उन्होंने अपनी भावनाओं को काबू में रखा। उन्होंने तर्क के साथ नए रास्ते चुने और ‘Next’ व ‘Pixar’ जैसी कंपनियों पर काम शुरू किया। इसका नतीजा ये हुआ कि ‘Pixar’ ने दुनिया को टॉय स्टोरी जैसी फिल्म दी और Next की तकनीक ने एप्पल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
  • भारत के दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा ने 2008 में जब जगुआर लैंड रोवर (JLR) को खरीदने का फैसला लिया तो कई लोग हैरान थे। उस वक्त JLR घाटे में थी, लेकिन रतन टाटा ने तात्कालिक नुकसान से परे भविष्य को देखा। उनका यह निर्णय न सिर्फ टाटा मोटर्स के लिए मुनाफे का सौदा बना, बल्कि भारतीय ऑटो इंडस्ट्री को ग्लोबल मंच पर मजबूत पहचान भी दिलाई।
QuoteImage

आप ध्यान से देखेंगे तो समझेंगे कि दोनों मामलों में तर्क से काम लिया गया। दोनों ही दिग्गजों ने अपने मौजूदा हालात को समझा, भविष्य की संभावनाओं को परखा और फिर कदम उठाया।

QuoteImage

क्यों जरूरी है निर्णय लेने की कला?

जिंदगी में हर कदम पर हमें फैसले लेने पड़ते हैं। सुबह क्या खाना है से लेकर करियर का कौन सा रास्ता चुनना है। हर निर्णय हमारी जिंदगी को प्रभावित करता है। सही फैसले हमें आत्मविश्वास देते हैं, रास्ते आसान करते हैं और सफलता की सीढ़ी चढ़ने में मदद करते हैं।

निर्णय लेने में माहिर लोगों के सफल होने चांस 30% ज्याादा

हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू की एक स्टडी कहती है कि जो लोग निर्णय लेने में माहिर होते हैं, वे अपने करियर में औसतन 30% ज्यादा सफल होते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वे सही वक्त पर सही कदम उठा पाते हैं। स्टीव जॉब्स और रतन टाटा इसका जीता-जागता सबूत हैं।

हालांकि, सिर्फ करियर ही नहीं, यह कला हमारे रिश्तों को भी मजबूत बनाती है। जब आप सोच-समझकर अपने दोस्तों या परिवार के लिए फैसले लेते हैं तो नतीजे हमेशा सकारात्मक होते हैं।

निर्णय लेने की कला को कैसे बेहतर करें?

यह कला कोई जन्मजात गुण नहीं है। इसे सीखा और सुधारा जा सकता है। यहां कुछ आसान टिप्स हैं, जो आपके फैसलों को मजबूत बनाएंगे:

रुकें और सांस लें: जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें। एक पल रुकें, गहरी सांस लें, और सोचें। इससे आपका दिमाग शांत होगा।

तथ्यों को परखें: कोई भी फैसला लेने से पहले कम से कम 2-3 जरूरी बातों की जानकारी जुटाएं। अगर जॉब स्विच करनी है तो सैलरी, वर्क कल्चर और ग्रोथ के बारे में पता करें।

अपने इमोशंस को समझें: खुद से पूछें कि क्या मैं डर से यह फैसला ले रहा हूं? या गुस्से में? भावनाओं को पहचानें और उन्हें काबू में रखें।

छोटे कदम से शुरुआत करें: बड़े फैसले से पहले छोटे-छोटे फैसलों का अभ्यास करें। कब क्या पहनना है, क्या खाना है, जैसे फैसले भी सोच-समझकर लें।

सबसे बुरा क्या हो सकता है: हर फैसले से पहले सोचें कि अगर यह गलत हुआ तो क्या होगा? क्या आप उसका सामना कर सकते हैं?

पिछले अनुभवों से सीखें: अपनी पुरानी गलतियों को याद करें और उन्हें दोहराने से बचें।

डेनियल कैनमैन लिखते हैं कि स्लो थिंकिंग में मेहनत लगती है, लेकिन यह आपको सही रास्ते पर ले जाती है। ये टिप्स आपके रोजमर्रा के फैसलों को आसान बनाएंगे और आत्मविश्वास बढ़ाएंगे।

भावनाएं और तर्क हैं एक सिक्के के दो पहलू

निर्णय लेते वक्त भावनाएं और तर्क एक-दूसरे के पूरक होते हैं। भावनाएं हमें जोश देती हैं, तो तर्क हमें सही दिशा। स्टीव जॉब्स ने जब एप्पल से निकाले जाने के बाद नया रास्ता चुना तो उनके दिल में कुछ नया करने की चाहत थी। ऐसे में तर्क ने उन्हें सही दिशा दी। उसी तरह, रतन टाटा का JLR खरीदना भी भावनाओं और तर्क का शानदार मेल था।

एक बार अपने फैसलों पर गौर करें। क्या आप सिर्फ दिल की सुनते हैं या सिर्फ दिमाग की? असली कला तो इन दोनों को साथ लेकर चलने में है।

अपने फैसलों से लिखें अपनी कहानी

निर्णय लेने की कला वह चाबी है, जो आपके सपनों को हकीकत में बदल सकती है। स्टीव जॉब्स ने अपने फैसलों से तकनीक की दुनिया बदल दी। रतन टाटा ने भारत को गर्व करने का मौका दिया। ये दोनों हमें सिखाते हैं कि सही वक्त पर सही फैसला कितना बड़ा बदलाव ला सकता है।

आज से ही अपने फैसलों पर ध्यान दें। हर छोटा-बड़ा निर्णय आपकी जिंदगी की किताब का एक पन्ना है। इसे सोच-समझकर लिखें, क्योंकि आपकी कहानी आपके हाथ में है। अगली बार जब कोई फैसला लेना हो तो रुकें, सोचें, और फिर आगे बढ़ें। कौन जानता है, शायद आपका अगला फैसला आपकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बन जाए।

…………….. ये आलेख भी पढ़िए सक्सेस मंत्रा- इंपैथी: जब दूसरे का दुख-दर्द अपना हो जाए: इंपैथी ही है माइक्रोसॉफ्ट की सफलता का राज

साल 2014 में सत्य नडेला जब माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ बने, तब कंपनी दुनिया की सबसे ताकतवर टेक कंपनियों में से एक थी। तकनीकी रूप से बेहतरीन, रेवेन्यू भी बढ़ रहा था। पूरा आलेख पढ़िए…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *