सरकार का दावा- E-20 पेट्रोल से गाड़ियों को नुकसान नहीं:  बेचने से पहले टेस्टिंग कराई; सुप्रीम कोर्ट में कहा था- अभी एक्सपेरिमेंट, रिजल्ट अगले साल पता चलेगा
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सरकार का दावा- E-20 पेट्रोल से गाड़ियों को नुकसान नहीं: बेचने से पहले टेस्टिंग कराई; सुप्रीम कोर्ट में कहा था- अभी एक्सपेरिमेंट, रिजल्ट अगले साल पता चलेगा

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नई दिल्ली2 घंटे पहले

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2013 और 2014 के दौरान पेट्रोल में 1.5% एथेनॉल मिलाया जा रहा था। अब 20% ब्लेंडिंग की जा रही। - Dainik Bhaskar

2013 और 2014 के दौरान पेट्रोल में 1.5% एथेनॉल मिलाया जा रहा था। अब 20% ब्लेंडिंग की जा रही।

पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को लेकर हो रहे विरोध के बीच शनिवार को सरकार ने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग का काम रातों-रात नहीं हुआ। यह एक जांची-परखी, साइंटिफिक और स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस और इससे गाड़ियों को कई नुकसान नहीं है। इसे पेट्रोल में मिलाने की ग्लोबल प्रैक्टिस अपनाई है और टॉप एजेंसियां भी इसकी टेस्ट कर चुकीं हैं।

एथेनॉल ब्लेंडिंग पर दिल्ली में हुई इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की ओर से शामिल एक्सपर्ट वर्तिका शुक्ला ने यह बात कही। वर्तिका शुक्ला ने बताया कि देश में साल 2013 और 2014 के दौरान पेट्रोल में सिर्फ 1.5% एथेनॉल मिलाया जा रहा था।

अब इस प्रोग्राम के तहत पेट्रोल में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) की जा रही है। 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग के टारगेट को तय समय से पांच साल पहले यानी दिसंबर 2025 तक ही पूरा कर लिया गया है।

हालांकि सरकार ने 4 दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का प्रोग्राम अभी भी एक्सपेरिमेंट है। इसका पूरा असर अगले साल तक पता चलेगा।

टेस्टिंग में गाड़ियों को नुकसान पहुंचने का कोई सबूत नहीं मिला

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की ओर से शामिल एक्सपर्ट और इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व CMD वर्तिका शुक्ला के अलावा बजाज ऑटो के सर्कल हेड मनप्रीत सिंह, टीवीएस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत कृष्णन मौजूद रहे।

उनके साथ टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी, मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती, हुंडई इंडिया के पुनीत आनंद और हीरो मोटो के आशुतोष वर्मा भी शामिल हुए।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बड़े पैमाने पर हुई टेस्टिंग में गाड़ियों को नुकसान पहुंचने का कोई सबूत नहीं मिला है। सोशल मीडिया पर गाड़ी के परफॉर्मेंस को लेकर चल रहे दावों के बीच एक्सपर्ट्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की है।

हाई परफॉर्मेंस फार्मूला वन कारों में भी इस्तेमाल हो रहा एथेनॉल

वर्तिका शुक्ला ने बताया कि इस प्रोग्राम का मकसद कार्बन एमिशन को कम करना है। यह फ्यूल पूरी तरह से भारत स्टेज VI (BS VI) मानकों के अनुरूप है। वहीं विक्रम गुलाटी ने कहा कि हाई परफॉर्मेंस वाली फार्मूला वन रेसिंग कारों में भी एथेनॉल बेस्ड फ्यूल का इस्तेमाल होता है।

मारुति को E20 फ्यूल में कोई गड़बड़ी नहीं मिली

मारुति के राहुल भारती ने कहा कि भारत ने 2023 से E20 फ्यूल को अनिवार्य किया है। मुख्य चिंता 2023 से पहले बनी और बेची गई गाड़ियों को लेकर है, जिसका समाधान होना जरूरी है। हालांकि, हमें अपनी टेस्टिंग में E20 फ्यूल में कोई भी चिंताजनक बात नहीं मिली है।

पूर्व IOCL चीफ बोले- अफवाहें ज्यादा, साइंटिफिक एविडेंस नहीं

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के पूर्व चेयरमैन बी अशोक ने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम से भारत की एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत हुई, किसानों की आय बढ़ी और कार्बन उत्सर्जन कम हुआ।

उन्होंने साफ किया कि साइंटिफिक स्टडीज में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि E20 फ्यूल से गाड़ी के इंजन को नुकसान पहुंचता है या माइलेज पर बड़ा असर पड़ता है। इसे लेकर जो चिंताएं जताई जा रही हैं, वे सिर्फ गलतफहमियां या बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावे हैं।

भारत में क्यों हो रहा विरोध?

  • भारत में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल के इस मिश्रण यानी E20-पेट्रोल का विरोध हो रहा है। खासकर 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के मालिक परेशान हैं।
  • उनका दावा है कि इस फ्यूल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा, मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया और इंजन के पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे हैं।
  • हालांकि, भारत सरकार का कहना है कि एथेनॉल से माइलेज में मामूली कमी जरूर आती है, लेकिन इससे गाड़ी का पिकअप और इंजन परफॉर्मेंस बेहतर होता है।

सियाम जैसी टॉप एजेंसियां टेस्टिंग कर चुकीं

एक्सपर्ट शुक्ला ने बताया कि विशेष रूप से साल 2018 में एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) को एक स्ट्रक्चर्ड यानी व्यवस्थित तरीके से सभी स्टेकहोल्डर्स के सामने चर्चा और विचार-विमर्श के लिए रखा गया था। यह पूरा प्रोग्राम साइंटिफिक एविडेंस पर बेस्ड है।

एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरर्स और उन्हें सपोर्ट करने वाली मुख्य एजेंसियों का पूरा सपोर्ट है। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और सियाम जैसी टॉप एजेंसियां इसकी टेस्टिंग कर चुकी हैं।

वर्तिका शुक्ला के अनुसार, पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का यह प्रोग्राम दुनिया भर में अपनाई जाने वाली ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिसेस के बिल्कुल अनुरूप है। इसके जरिए फॉसिल फ्यूल यानी जीवाश्म ईंधन को ‘ग्रीन’ बनाया जा रहा है, ताकि पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन को काफी हद तक कम किया जा सके।

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