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नई दिल्ली2 मिनट पहले
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सूचना और प्रसारण मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, शिपिंग मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने गुरुवार को दिल्ली में जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
भारत सरकार के विदेश, शिपिंग, पेट्रोलियम, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने गुरुवार को देश में कच्चे तेल और गैस की किल्लत को लेकर जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सरकार ने माना कि देश में हालात चुनौतीपूर्ण हैं और घबराहट के कारण देशभर में सिलेंडर बुकिंग में कई गुना बढ़ोतरी देखी गई है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का करीब 60% LPG आयात करता है, जिसमें से लगभग 90% सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आती है। देश में रोजाना करीब 50 लाख LPG सिलेंडर की डिलीवरी की जाती है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश में कच्चे तेल की सप्लाई की स्थिति पूरी तरह संतोषजनक है और देश के करीब एक लाख पेट्रोल पंपों में से किसी पर भी ईंधन खत्म होने (ड्राई-आउट) की स्थिति नहीं है।
अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग के बीच भारत में LPG की डिमांड बढ़ गई है। देशभर में गैस सिलेंडर एजेंसियों के बार लम्बी लाइनें लग रही हैं। सिलेंडरों की कालाबाजारी भी होने लगी है। राज्यों में ₹900 के घरेलू गैस सिलेंडर के लिए ₹1800 तक वसूले जा रहे हैं।

जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्रालयों ने क्या कहा, पढ़िए…
पेट्रोलियम मंत्रालय : मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी (मार्केटिंग और ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने कहा-
- देश में पेट्रोल-डीजल और LPG की उपलब्धता को लेकर स्थिति काफी सहज और संतोषजनक है। भारत रोजाना करीब 55 लाख बैरल कच्चे तेल का इस्तेमाल करता है और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर होने के कारण पेट्रोल-डीजल जैसे उत्पादों की उपलब्धता को लेकर भरोसा बना हुआ है।
- 9 मार्च को पेट्रोलियम मंत्रालय ने Essential Commodities Act के तहत सभी रिफाइनरियों को LPG उत्पादन अधिकतम करने का आदेश दिया था। इसके बाद घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है और अब यह 25% से बढ़कर 28% हो गया है।
- भारत सरकार हर तिमाही राज्यों को केरोसिन आवंटित करती है। हर तीन महीने में लगभग 1 लाख किलोलीटर केरोसिन राज्यों को दिया जाता है। आज जारी किए गए नए आदेश के तहत राज्य सरकारों को अतिरिक्त 48 हजार किलोलीटर केरोसिन और जारी किया जाएगा।
- घरेलू बाजार में LPG की सप्लाई डिमांड और सप्लाई दोनों के मैनेजमेंट पर निर्भर करती है। सरकार सभी मोर्चों पर कार्रवाई कर रही है। जहां तक सप्लाई का सवाल है, हम घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, ताकि वितरण पारदर्शी और प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जा सके।

शिपिंग मंत्रालय : मंत्रालय के अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा ने बताया-
- पर्शियन गल्फ क्षेत्र में भारतीय जहाजों की संख्या फिलहाल 28 है और यह संख्या पहले जैसी ही बनी हुई है। इन जहाजों में कुल 778 भारतीय नाविक सवार हैं। इन 28 जहाजों में से 24 होर्मुज स्ट्रैट के पश्चिमी हिस्से में हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक मौजूद हैं। वहीं चार जहाज होर्मुज के पूर्वी हिस्से में हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक सवार हैं। सरकार इन सभी जहाजों और उनके क्रू की सुरक्षा पर लगातार नजर रख रही है।
- हाल में विदेशी झंडे वाले कुछ जहाजों पर भारतीय नाविकों से जुड़े समुद्री हादसे हुए हैं। इन जहाजों पर कुल 78 भारतीय नाविक मौजूद थे। इनमें से 70 नाविक सुरक्षित निकल आए हैं, जबकि चार नाविक घायल हुए हैं और उनकी हालत स्थिर है। इन घटनाओं में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई है, जबकि एक नाविक अब भी लापता बताया जा रहा है।
विदेश मंत्रालय : मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा-
- तेहरान स्थित भारतीय दूतावास उन भारतीय नागरिकों की मदद कर रहा है जो ईरान छोड़ना चाहते हैं। उन्हें आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते बाहर निकलने में सहायता दी जा रही है, जहां से उपलब्ध वाणिज्यिक उड़ानों का उपयोग किया जा सकता है।
- तेहरान में हमारा दूतावास भारतीय नागरिकों को वीज़ा सुविधा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय भूमि सीमा पार करने में भी मदद कर रहा है। हमारे कई नागरिक इस विकल्प का लाभ उठाकर भारत लौट चुके हैं।
- हम अन्य भारतीय नागरिकों से भी आग्रह करते हैं कि जो लोग ईरान छोड़ना चाहते हैं, वे दूतावास द्वारा दी जा रही इस सहायता का लाभ उठाएं। हमारे दूतावास ने इस संबंध में एक एडवाइजरी भी जारी की है।
- स्कायलाइट नाम का यह विशेष कॉमर्शियल शिप हमले का शिकार हुआ था, जिसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई और एक अब भी लापता है। दूसरा शिप, जिस पर हमला हुआ था, वह एमकेडी व्योम था। उसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी, जबकि 16 अन्य भारतीय सुरक्षित अपने घर लौट चुके हैं।

सप्लाई संकट की 2 वजह
1. होर्मुज स्ट्रेट का लगभग बंद होना
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा।
दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है।
2. प्लांट पर ड्रोन हमले से LNG का प्रोडक्शन रुका
पिछले हफ्ते अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर स्ट्राइक की थी। इसके जवाब में ईरान ने UAE, कतर, कुवैत और सऊदी जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है।
ईरान के ड्रोन हमले के बाद भारत को गैस सप्लाई करने वाले सबसे बड़े देश कतर ने अपने LNG प्लांट का प्रोडक्शन रोक दिया है। इससे भारत में गैस की सप्लाई घट गई है। भारत अपनी जरूरत की 40% LNG (करीब 2.7 करोड़ टन सालाना) कतर से ही आयात करता है।

कब तक सुधरेंगे हालात?
इंडियन ऑयल के मुख्य महाप्रबंधक (LPG) के.एम. ठाकुर का कहना है कि ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है और घबराहट में सिलेंडर बुकिंग न करें। सरकार अब अमेरिका जैसे देशों से वैकल्पिक कार्गो मंगाने पर विचार कर रही है।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर G7 देश अपने इमरजेंसी तेल भंडार से सप्लाई जारी करने पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि ग्लोबल मार्केट में ऊर्जा संकट को कम किया जा सके। रूस और अल्जीरिया से भी अतिरिक्त कच्चा तेल आने की उम्मीद है।
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