सुप्रीम कोर्ट के 53वें चीफ जस्टिस बनेंगे जस्टिस सूर्यकांत:  CJI बीआर गवई ने नाम की सिफारिश की; 14 महीने का होगा कार्यकाल
टिपण्णी

सुप्रीम कोर्ट के 53वें चीफ जस्टिस बनेंगे जस्टिस सूर्यकांत: CJI बीआर गवई ने नाम की सिफारिश की; 14 महीने का होगा कार्यकाल

Spread the love


नई दिल्ली11 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
5 अक्टूबर 2018 में जस्टिस सूर्यकांत को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट चीफ जज बनाया गया था। - Dainik Bhaskar

5 अक्टूबर 2018 में जस्टिस सूर्यकांत को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट चीफ जज बनाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस भूषण आर गवई ने सोमवार को केंद्र सरकार से सीनियर जज जस्टिस सूर्यकांत को उनका उत्तराधिकारी बनाए जाने की सिफारिश की है। उनका नाम मंजूरी के लिए केंद्रीय कानून मंत्रालय को भेज दिया गया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में 53वें CJI नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

परंपरा है कि मौजूदा CJI अपने उत्तराधिकारी के नाम की सिफारिश तभी करते हैं, जब उन्हें कानून मंत्रालय से ऐसा करने का आग्रह किया जाता है। मौजूदा CJI गवई का कार्यकाल 23 नवंबर को खत्म हो रहा है।

उनके बाद जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर को CJI के तौर पर शपथ लेंगे। वे 9 फरवरी 2027 को रिटायर होंगे। उनका कार्यकाल लगभग 14 महीने का होगा। सुप्रीम कोर्ट के जज 65 साल की उम्र में रिटायर होते हैं।

2019 में सुप्रीम कोर्ट जज बने थे जस्टिस सूर्यकांत

जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार में हुआ था। उन्होंने 1981 में हिसार के स्टेट पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज से ग्रेजुएशन किया था। इसके बाद 1984 में रोहतक की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी लॉ की डिग्री ली। 1984 में हिसार डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में वकालत शुरू की। 1985 में जस्टिस सूर्यकांत पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे।

मार्च 2001 में उन्हें सीनियर एडवोकेट नॉमिनेट किया गया। 9 जनवरी 2004 को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में परमानेंट जज बनने तक वे हरियाणा के एडवोकेट जनरल रहे। जस्टिस सूर्यकांत को 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में प्रमोट किया गया था।

CJI बनने वाले हरियाणा के पहले शख्स होंगे जस्टिस सूर्यकांत

जस्टिस सूर्यकांत इंडियन ज्यूडीशियरी की टॉप पोस्ट पर पहुंचने वाले हरियाणा से पहले शख्स होंगे। उनके नाम की सिफारिश करते हुए CJI गवई ने कहा कि जस्टिस सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट की कमान संभालने के लिए उपयुक्त और सक्षम हैं।

10वीं की परीक्षा देने गए तब पहली बार शहर देखा था

जस्टिस सूर्यकांत हरियाणा के हिसार के एक गुमनाम से गांव पेटवाड़ से शुरू हुई। वे सत्ता के गलियारों से जुड़े विशेषाधिकारों से दूर पले-बढ़े। उनके पिता एक शिक्षक थे। आठवीं तक उन्होंने एक गांव के स्कूल में ही पढ़ाई की, जहां बैठने के लिए बेंच नहीं थीं।

दूसरे गांव वालों की तरह जस्टिस सूर्यकांत ने अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए खाली समय में खेतों में काम किया। पहली बार शहर तब देखा जब वे दसवीं की बोर्ड परीक्षा देने हिसार के एक छोटे से कस्बे हांसी गए थे।

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *