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नई दिल्ली6 घंटे पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि खतरनाक या रेबीज से संक्रमित आवारा कुत्तों को इंजेक्शन लगाकर मारा जा सकता है, लोगों की जान की हिफाजत जरूरी है और गरिमा के साथ जीने में कुत्तों के खतरे से मुक्त होकर रहने का अधिकार भी शामिल है।
मंगलवार को दिए गए इस मामले पर आखिरी फैसले के साथ ही कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश के खिलाफ दाखिल सभी याचिकाएं खारिज कर दी।
कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों के पुनर्वास और नसबंदी पर नवंबर 2025 में दिए गए निर्देश ही लागू होंगे। जो अफसर इनका पालन न करें, उन पर अवमानना का केस चले।

नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, हाईवे जैसे पब्लिक प्लेस से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश जारी किए थे।
कोर्ट ने कहा था कि आवारा कुत्तों को जहां से पकड़ें, नसबंदी और टीकाकरण के बाद वहीं न छोड़ें। ऐसे कुत्तों को शेल्टर होम्स में रखें। अदालत ने सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर भी बैन लगाया था।
इसके बाद कई डॉग लवर्स और NGO ने इन निर्देशों को रद्द कराने के लिए कई याचिकाएं दाखिल की थीं। हालांकि इन याचिकाओं की संख्या की जानकारी नहीं दी गई है।
मंगलवार के आदेश की 8 अहम बातें
- राज्य सरकारें पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) के नियमों को मजबूत करें और सही तरीके से लागू करें।
- हर जिले में पूरी तरह काम करने वाला एक ABC सेंटर (एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर) बनाया जाए।
- जहां आवारा कुत्तों की आबादी ज्यादा है, वहां जरूरत के हिसाब से ABC सेंटरों की संख्या बढ़ाई जाए।
- जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर भी ये नियम लागू करने पर फैसला लिया जाए और उसे तय समय में लागू किया जाए।
- एंटी-रेबीज दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
- NHAI नेशनल हाईवे पर आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाए, जैसे पुराने ट्रांसपोर्ट वाहनों का इस्तेमाल कर उन्हें हटाना। NHAI इसकी मॉनिटरिंग भी करे।
- रेबीज से संक्रमित और बेहद खतरनाक कुत्तों को कानून के तहत और जरूरत पड़ने पर यूथेनेशिया (दया मृत्यु) जैसे कदम उठाए जा सकते हैं ताकि लोगों का जीवन सुरक्षित रहे।
- कोर्ट के आदेश लागू करने वाले नगर निगम और सरकारी अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा दी जाए। सामान्य तौर पर उनके खिलाफ FIR और सख्त कार्रवाई न की जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने 3 राज्यों में कुत्तों के काटने की घटनाएं गिनाईं
राजस्थान के श्री गंगानगर में एक महीने में कुत्तों के काटने की 1084 घटनाएं सामने आईं। छोटे बच्चों को गंभीर चोटें आईं, जिनमें चेहरों पर गहरे घाव शामिल हैं।
तमिलनाडु में साल के पहले चार महीनों में कुत्तों के काटने की लगभग 2 लाख घटनाएं दर्ज की गईं।
सूरत में एक जर्मन यात्री को कुत्ते ने काट लिया।

पिछली 8 सुनवाई को विस्तार से समझें…
- 29 जनवरी 2026: जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा था कि कोर्ट निजी पक्षों की दलीलें पूरी करके आज ही सुनवाई खत्म करना चाहती है। इसके बाद राज्यों को एक दिन का मौका दिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…
- 9 जनवरी, 2026: एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर के वकील ने कहा कि सभी कुत्ते आक्रामक नहीं होते। दिल्ली एम्स में गोल्डी नाम का एक कुत्ता है, जो सालों से वहां है लेकिन कभी किसी को नहीं काटा। इस बात पर कोर्ट ने टैगोर के वकील को फटकार लगाते हुए कहा था- ऐसे कुत्तों को अच्छा दिखाने या महान साबित करने की कोशिश न करें। पूरी खबर पढ़ें…
- 8 जनवरी, 2026: जस्टिस नाथ ने कहा था कि कुत्ते इंसानों का डर पहचान लेते हैं इसलिए काटते हैं। इस पर एक वकील (कुत्तों के फेवर वाले) ने इनकार किया। फिर जस्टिस ने कहा- अपना सिर मत हिलाइए, ये बात मैं पर्सनल एक्सपीरियंस से बोल रहा हूं। पूरी खबर पढ़ें…
- 7 नवंबर 2025: कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, रेलवे स्टेशनों आदि से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश जारी किया। आदेश में कहा गया कि ठिकानों से हटाए गए कुत्ते फिर वहीं वापस नहीं छोड़े जाएं। पढ़ें पूरी खबर…
- 3 नवंबर 2025: मुख्य सचिवों की व्यक्तिगत बुलाने के लिए कहा। जब बिहार के मुख्य सचिव ने चुनाव के कारण छूट मांगी, तो कोर्ट ने यह अनुमति नहीं दी। कहा कि चुनाव में आपकी भूमिका विशेष नहीं है, इसलिए आपको पेश होना ही होगा। पढ़ें पूरी खबर…
- 27 अक्टूबर 2025: राज्यों को फटकार लगाई। कहा कि आवारा कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं से देश की छवि को नुकसान पहुंचता है। पढ़ें पूरी खबर…
- 22 अगस्त 2025: पहले के आदेश में बदलाव किया। नसबंदी-टीकाकरण के बाद उन्हें वापस उनके इलाके में छोड़ने को कहा। सार्वजनिक जगहों पर निर्दिष्ट फीडिंग-जोन घोषित करना। पढ़ें पूरी खबर…
- 11–14 अगस्त 2025: कोर्ट ने पहली बार डॉग्स को सड़कों से उठाकर शेल्टर होम में रखने का आदेश दिया था। पढ़ें पूरी खबर…

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सुप्रीम कोर्ट बोला-कुत्ते के काटने पर भारी मुआवजा तय होगा: जो आवारा कुत्तों को लेकर चिंतित, वे अपने घर ले जाएं; उन्हें ऐसे नहीं छोड़ सकते

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के हमलों पर सख्त टिप्पणी में कहा था- बच्चों या बुजुर्गों को कुत्तों के काटने, चोट लगने या मौत के हर मामले में हम राज्य सरकारों से भारी मुआवजा दिलवाएंगे, क्योंकि उन्होंने पिछले 5 सालों में नियमों को लागू करने के लिए कुछ नहीं किया। पूरी खबर पढ़ं…









