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12 घंटे पहले
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कल (16 दिसंबर) सूर्य वृश्चिक राशि से निकलकर धनु राशि में प्रवेश कर रहा है, इसलिए इस दिन धनु संक्रांति मनाई जाएगी। हालांकि धनु संक्रांति की तारीख को लेकर पंचांग भेद भी हैं, कुछ पंचांग में 15 दिसंबर को धनु संक्रांति बताई गई है, लेकिन अधिकतर ज्योतिषियों का मत है कि धनु संक्रांति 16 दिसंबर को मनाना ज्यादा शुभ है।
ज्योतिष में सूर्य के राशि परिवर्तन की घटना को संक्रांति कहा जाता है। सूर्य करीब एक महीने तक धनु राशि में रहेगा और इस महीने को खरमास कहा जाता है। खरमास में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, जनेऊ संस्कार जैसे मांगलिक कामों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहते हैं।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, सूर्य 14 जनवरी तक धनु राशि में रहेगा। 16 दिसंबर तक धनु संक्रांति पर सूर्य पूजा करनी चाहिए। सुबह जल्दी जागना चाहिए और सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल चढ़ाना चाहिए। इसके बाद अगले एक महीने तक सूर्य देव अपने गुरु बृहस्पति की राशि धनु में रहेंगे यानी गुरु की सेवा करेंगे।
एक साल में दो बार आता है खरमास
हिन्दी पंचांग के एक वर्ष में दो बार खरमास आता है। एक बार तब जब सूर्य धनु राशि में रहता है और दूसरा तब जब सूर्य मीन राशि में रहता है। धनु और मीन राशि का स्वामी बृहस्पति है। मान्यता है कि खरमास के समय में सूर्य देव अपने गुरु बृहस्पति की सेवा में करते हैं, इस वजह से वे किसी भी शुभ काम में उपस्थित नहीं हो पाते हैं।
शुभ कामों की शुरुआत पंचदेवों की पूजा के साथ ही होती है। पंचदेवों में गणेश, शिव, विष्णु, देवी दुर्गा और सूर्य शामिल हैं। सूर्य अपने गुरु की सेवा में कर रहे होते हैं और इस कारण वे विवाह, जनेऊ, गृह प्रवेश जैसे शुभ कामों में शामिल नहीं हो पाते हैं, इस वजह से खरमास में मांगलिक कामों के लिए मुहूर्त नहीं रहते हैं।
धनु संक्रांति पर करें ये शुभ काम
धनु संक्रांति पर गंगा, यमुना, नर्मदा और शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। अगर नदी में स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो घर पर ही पानी में गंगाजल डालकर स्नान कर सकते हैं। स्नान करते समय पवित्र नदियों और तीर्थों का ध्यान करना चाहिए, ऐसा करने से भी घर पर तीर्थ स्नान के समान पुण्य मिलता है।
धनु संक्रांति पर दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को धन, अनाज, कपड़े, जूते-चप्पल, खाना, तिल-गुड़, फल आदि चीजें दान करनी चाहिए। किसी गोशाला में हरी घास और गायों की देखभाल के लिए धन का दान करना चाहिए।
इस दिन महादेव, भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का अभिषेक करना चाहिए। गणेश जी को दूर्वा और मोदक चढ़ाएं। हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। बाल गोपाल को माखन-मिश्री का भोग तुलसी के साथ लगाएं। शिव जी विधिवत पूजा न कर पाएं तो जल और बिल्व पत्र चढ़ाकर भी सामान्य पूजा कर सकते हैं।
खरमास में विवाद, गुस्सा और किसी के साथ दुर्व्यवहार करने से बचना चाहिए। किसी का अपमान न करें। खरमास पूजा-पाठ के साथ ही आत्मचिंतन का समय है। इस मास में धर्म-कर्म के साथ ही अपनी सेहत सुधारने के लिए योग-ध्यान को अपनी जीवन शैली में शामिल करें।
इस महीने में ग्रंथों का अध्ययन करना चाहिए और उनकी सीख को जीवन में उतारने का संकल्प लेना चाहिए। किसी संत के प्रवचन सुनें।
नियमित रूप से इष्टदेव के मंत्रों का जप करें। जैसे ऊँ नम: शिवाय, श्री गणेशाय नम:, ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय, कृं कृष्णाय नम:, रां रामाय नम:, श्री राम दूताय नम:, श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा। मंत्र जप कम से कम 108 बार करना चाहिए। इसके लिए रुद्राक्ष की माला का इस्तेमाल कर सकते हैं।








