5 घंटे पहले
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किताबों से जानिए, कैसे मानसिक स्वतंत्रता की ओर बढ़ना चाहिए? क्यों अपनी प्रतिक्रिया पर नियंत्रण रखना जरूरी है?
विचारों पर नियंत्रण रखना ही स्वतंत्रता है हम अकसर यह मान लेते हैं कि हमारी बेचैनी की वजह लोग या परिस्थितियां हैं। हमें परेशान घटनाएं नहीं करतीं, उन घटनाओं के बारे में हमारी सोच करती है। यदि कोई आपको अपमानित करता है, तो अपमान शब्दों में नहीं, उनको लेकर आपकी स्वीकृति में है। हर बात पर प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं, मानसिक स्वतंत्रता की ओर बढ़ें। (द आर्ट ऑफ लिविंग -शेरॉन लेबेल)
सच्ची शक्ति स्वयं को संतुलित रखने में है दुनिया आपके अनुसार नहीं चलेगी। लोग आपकी निंदा करेंगे, परिस्थितियां विपरीत होंगी, योजनाएं असफल होंगी। जब आप बाहरी हालात पर नियंत्रण नहीं रख सकते, तब अपनी प्रतिक्रिया पर नियंत्रण रखें। जो अपने चरित्र को मजबूत बनाता है, वह हर तूफान में स्थिर रहता है। सच्ची शक्ति स्वयं को संतुलित रखने में है। (द इनर सिटाडेल -पियरे हडोट)
स्वयं को समझना किसलिए जरूरी है हम अकसर स्वयं से वैसा व्यवहार नहीं करते, जैसा हम अपने प्रिय लोगों से करते हैं। स्वयं के प्रति उदार होना कमजोरी नहीं, भावनात्मक परिपक्वता है। जब आप अपनी कमियों को स्वीकारते हैं, तब उनसे सीख पाते हैं। आत्म-करुणा सिखाती है कि आप अपूर्ण होकर भी मूल्यवान हैं। स्वयं को समझें और स्वीकारें। (सेल्फ कम्पैशन -क्रिस्टिन नेफ)
अपने मन को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेना चाहिए हमारे मन में हर दिन हजारों विचार आते हैं। लेकिन हर विचार सच नहीं होता। फिर भी हम उसे सच मान लेते हैं। ‘मैं योग्य नहीं हूं’, ‘मैं असफल हो जाऊंगा’, ‘लोग मेरा मजाक उड़ाएंगे’- ये केवल विचार हैं, तथ्य नहीं। समस्या तब शुरू होती है जब हम इन विचारों को अपनी पहचान बना लेते हैं। जब आप यह समझ लेते हैं कि आप अपने विचार नहीं हैं, उन्हें देखने वाले हैं, तब डर की पकड़ ढीली पड़ती है। मन को शांत करने का सबसे सरल तरीका है उसे ज्यादा गंभीरता से न लें। (यू आर नॉट योर थॉट्स -एमी जॉनसन)








