3 घंटे पहले
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हममें से अधिकांश ने अपने जीवन में कभी न कभी ‘फीडस्मैक’ का अनुभव किया है। किसी मीटिंग के बीच, गलियारे में यूं ही चलते समय या परफॉर्मेंस रिव्यू के दौरान कोई व्यक्ति अचानक ऐसे शब्द कह देता है, जो हमारे मानसिक संतुलन को हिला देते हैं। कई लोग आज भी वर्षों पहले मिली किसी कठोर टिप्पणी से प्रभावित रहते हैं। निगेटिव फीडबैक चाहे जिस तरीके से दिया गया हो, उसमें छिपे सत्य को पहचानना हम सभी के लिए जरूरी है। जब अगली बार कठोर प्रतिक्रिया आपको अचानक चौंका दे, तो ये चार कदम आजमाएं …
1) स्वयं को संभालें और मूल भावनाओं से समझें गहरी और धीमी सांसें लेना आपको यह याद दिलाता है कि आप पूरी तरह से सुरक्षित हैं। अपनी भावनाओं पर ध्यान दें। क्या आप आहत महसूस कर रहे हैं, डरे हुए हैं, शर्मिंदा हैं या लज्जित महसूस कर रहे हैं? जितना आप इन मूल भावनाओं को समझेंगे, उतना ही कम आप गुस्सा, बचाव की भावना या डर जैसी प्रतिक्रियाओं में कभी उलझेंगे। अभी से ही स्वयं को संभालना शुरू करें।
2) बात समझने की कोशिश करें, सवाल पूछें जिज्ञासु बने रहें। हमेशा सवाल पूछें और उदाहरण भी मांगें। उसके बाद केवल सुनें। कही जा रही बातों से स्वयं को पूरी तरह अलग रखें। उसमें खुद को उलझा न लें। इससे आप तुरंत ही मूल्यांकन करने की जरूरत से भी बच सकते हैं। जो बोला जा रहा है उसे समझने की कोशिश करें। लेकिन उसे अपने आप पर हावी मत होने दें। सवाल पूछना बंद न करें। हर हाल में सवाल पूछना जरूरी है।
3) प्रतिक्रिया न दें, खुद को संभलने का समय दें फीडबैक मिलने के बाद उस बातचीत से पूरी तरह बाहर निकल जाएं। हो सके तो यह स्पष्ट करें कि आपको सोचने के लिए कुछ समय चाहिए होगा। इसके बाद आप खुद को संभलने की अनुमति भी दें। सरल शब्दों में कहें कि मेरे लिए यह बहुत जरूरी है कि मैं इसे सही तरीके से समझूं। मुझे थोड़ा समय और चाहिए। मैं थोड़ा सोच-विचार कर आपको अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया बता सकता हूं।
4) कमियां निकालने के बजाय सच्चाई खोजें जो कहा गया, उस पर विचार करें। फीडबैक में कमियां ढूंढने के बजाय सच्चाई खोजें। संदेश को ध्यान से परखें, जब तक उसमें छिपा सच न मिले। उस व्यक्ति से दोबारा बात करें। यह स्वीकार करते हुए कि आपने क्या सुना, क्या स्वीकार किया और आगे क्या करना है। जब आप सामने वाले की स्वीकृति की चाह के बिना अपनी बात रखेंगे, तो आपको बचाव की जरूरत नहीं पड़ेगी।








