इंस्पायरिंग:  तरीका आपका हो सकता है, लेकिन जज्बा टीम का हो तभी जीत मुमकिन है – श्रेयस अय्यर
अअनुबंधित

इंस्पायरिंग: तरीका आपका हो सकता है, लेकिन जज्बा टीम का हो तभी जीत मुमकिन है – श्रेयस अय्यर

Spread the love


2 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

क्रिकेटर श्रेयस अय्यर चोट के बाद अब फिर मैदान में वापसी को लेकर चर्चा में हैं, केकेआर की कप्तानी से उन्होंने जो सीखा-समझा, उन्हीं की जुबानी…

मैं मानता हूं कि मैदान पर ही नहीं, कई बार मैदान के बाहर भी असली फैसले कप्तान और कोच ही लेते हैं। वजह साफ है कि टीम का हर खिलाड़ी खुश रहे, फोकस्ड रहे और उसका ध्यान सिर्फ एक चीज पर हो, वो है टीम को जिताना। जिम्मेदारी कभी एक की नहीं होती, सबकी बराबर होती है। हम एक-दूसरे पर दोष नहीं डाल सकते। आजादी देनी होगी और भरोसा भी करना होगा।

आजादी के साथ जिम्मेदारी भी आती है। अगर आप आगे बढ़कर कह सकें कि हां, गलती मेरी थी… या मैं इसकी जिम्मेदारी लेता हूं, तो हर लीडर आपको और अधिक सपोर्ट करेगा। लीडर को ऐसे लोग पसंद होते हैं जो अपनी गलती मानना जानते हैं। कुछ करने निकले हैं, तो गलतियां होंगी ही। फर्क इतना है कि जो शांत रहते हैं, वो कम गलती करते हैं और वही लंबे समय तक टिकते हैं। एक अच्छा लीडर यही शांति टीम के हर मेंबर तक पहुंचाता है।

मैं खिलाड़ियों को खुली आजादी देता हूं। मेरा कोई फेवरेट ग्रुप नहीं होता, जिनके साथ मैं अलग से बैठूं। कई बार मैं अकेले रहना पसंद करता हूं क्योंकि मैं नहीं चाहता कि बाहर से ऐसा लगे कि मैं कुछ खास खिलाड़ियों पर ध्यान देता हूं। खिलाड़ी जैसे हैं, वैसे ही मुझे पसंद हैं। मैदान के बाहर आप जैसे चाहें रहें, लेकिन मैदान पर सबका माइंडसेट एक होना चाहिए… जीत और टीम के लिए पूरी तरह समर्पित। इसके अलावा मुझे कुछ नहीं चाहिए।

जब आप टीम को इतनी आजादी देते हैं, तो वो भी समझते हैं कि लीडर हमारे साथ खड़ा है। मैं ऐसा लीडर हूं जो चाहे जैसे हालात हों, टीम का साथ देता है। मैं इन्सटिंक्ट पर फैसले लेता हूं… कई बार ऐसे आउट-ऑफ-द-बॉक्स फैसले भी जिनकी कोई कल्पना नहीं कर सकता। यही मेरा तरीका है, जो काम आता है।

मैं फैसले खुद लेना पसंद करता हूं, लेकिन सबके साथ खूब विचार भी करता हूं। सबकी राय सुनता हूं क्योंकि टीम की कामयाबी में हर किसी का इनपुट जरूरी है। दूसरों की सोच से मुझे बहुत सीखने को मिलता है। अगर किसी की बात सही लगती है, तो मैं उसे मैदान पर लागू करता हूं। आखिर में बात टीम की होती है, आपकी नहीं। आप हर बार क्रेडिट नहीं ले सकते। सभी लोग जब एक ही सोच में काम करते हैं, तो नतीजे अपने आप आते हैं। मेरे लिए बस एक बात मायने रखती है, आप मैदान पर 110% दे रहे हैं या नहीं। अगर दे रहे हैं, तो तरीका आपका हो सकता है, लेकिन जज्बा टीम का होना चाहिए।

जीवन में डिसिप्लिन और रूटीन बहुत जरूरी हैं अगर आप टीम में डिसिप्लिन लेकर आते हैं तो यही एक मजबूत सेटअप बनाता है। डिसिप्लिन बहुत जरूरी है। अगर सुबह नौ बजे मैच है, तो आपको पता होना चाहिए कि रात को कब सोना है। देर से सोएंगे, तो शरीर साथ नहीं देगा। शुरू में शायद ये बातें समझ नहीं आतीं, लेकिन अनुभव के साथ आपको एहसास होता है कि क्या मदद करता है और क्या नहीं। मेरे लिए रूटीन और डिसिप्लिन ने बहुत फर्क पैदा किया है। (तमाम इंटरव्यूज में)



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *