सोमवार को चतुर्थी व्रत:  मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्थी पर करें गणेश जी और शिव जी का अभिषेक, जानिए पूजा विधि और मंत्र
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सोमवार को चतुर्थी व्रत: मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्थी पर करें गणेश जी और शिव जी का अभिषेक, जानिए पूजा विधि और मंत्र

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10 घंटे पहले

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सोमवार, 24 नवंबर को मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्थी है, इस तिथि को विनायक चतुर्थी व्रत कहते हैं। इस बार सोमवार को ये चतुर्थी होने से इस दिन गणेश जी के साथ ही शिव जी की भी विशेष पूजा करने का शुभ योग बना है। चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं। मान्यता है कि इस तिथि पर गणेश जी के लिए व्रत-उपवास और पूजा-पाठ करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि, प्रेम, ज्ञान और सफलता बनी रहती है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, सोमवार के स्वामी शिव जी माने गए हैं। इसलिए सोमवार को प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा के बाद भगवान शिव का विधिवत अभिषेक करना चाहिए। जिन लोगों की कुंडली में चंद्र ग्रह से संबंधित दोष हैं, उन्हें इस दिन शिवलिंग पर विराजित चंद्रदेव का अभिषेक करना चाहिए। चंद्र मंत्र सों सोमाय नम: का जप करना चाहिए।

ऐसे कर सकते हैं गणेश चतुर्थी व्रत

गणेश चतुर्थी पर सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें और जल के साथ कुमकुम, फूल और चावल भी डालें। इसके बाद ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करते हुए सूर्य को जल चढ़ाएं।

घर के मंदिर में गणेश प्रतिमा स्थापित करें। भगवान गणेश को जल और पंचामृत चढ़ाएं। पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और मिश्री मिलाकर बनाना चाहिए।

भगवान को सिंदूर, दूर्वा, फूल, चावल, फल, जनेऊ, प्रसाद आदि चीजें चढ़ाएं। अपनी इच्छा अनुसार दक्षिणा चढ़ाएं। धूप-दीप जलाएं। प्रसाद में लड्डू और मोदक चढ़ा सकते हैं। आप चाहें तो दूध से बनी मिठाई भी चढ़ा सकते हैं।

श्री गणेशाय नम: मंत्र का जाप करते हुए पूजा करें। गणेश जी के सामने व्रत करने का संकल्प लें और पूरे दिन अन्न ग्रहण न करें। व्रत में फलाहार, पानी, दूध, फलों का रस आदि चीजों का सेवन किया जा सकता है।

पूजा में भगवान गणेश के 12 नाम मंत्रों का जप भी कम से कम 108 बार करना चाहिए।

ये हैं भगवान गणेश के 12 नाम मंत्र

ऊँ सुमुखाय नम:, ऊँ एकदंताय नम:, ऊँ कपिलाय नम:, ऊँ गजकर्णाय नम:, ऊँ लंबोदराय नम:, ऊँ विकटाय नम:, ऊँ विघ्ननाशाय नम:, ऊँ विनायकाय नम:, ऊँ धूम्रकेतवे नम:, ऊँ गणाध्यक्षाय नम:, ऊँ भालचंद्राय नम:, ऊँ गजाननाय नम:।

पूजा के अंत भगवान से जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें। इसके बाद अन्य भक्तों को प्रसाद वितरित करें। पूजा में चढ़ाई गई दक्षिणा किसी जरूरतमंद को दान करें।

ऐसे कर सकते हैं शिव जी का अभिषेक

गणेश पूजा के बाद शिव जी का अभिषेक करने के लिए स्नान करके बाद घर में पूजा स्थान में शिवलिंग स्थापित करें। शिवलिंग का स्वच्छ जल से अभिषेक करें। गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी चढ़ाएं। इसके बाद जल से भगवान का अभिषेक करें। बिल्वपत्र, चंदन, अक्षत और फूल अर्पित करें। ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें और धूप-दीप जलाएं। भोग में मिठाई अर्पित करें। आरती करें। अंत में भगवान से जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें।

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