स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र:  जब मन प्रतिकूल परिस्थितियों के बारे में ज्यादा सोचता है, तब वह अस्थिर हो जाता है
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स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र: जब मन प्रतिकूल परिस्थितियों के बारे में ज्यादा सोचता है, तब वह अस्थिर हो जाता है

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  • Avdheshanand Giri Maharaj Life Lesson. When The Mind Thinks Too Much About Adverse Circumstances, It Becomes Unstable.

हरिद्वार12 घंटे पहले

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मनुष्य के बंधन और मोक्ष का मूल कारण उसका मन है। मन सुख-दुख, लाभ-हानि, जय-पराजय और मान-अपमान के विचारों में उलझा रहता है। जब मन प्रतिकूल परिस्थितियों या दुखद अनुभवों पर अधिक चिंतन करता है, तो वह अस्थिर हो जाता है। मन सदा अनुकूलता चाहता है और प्रतिकूलता से भागता है। यही प्रवृत्ति उसे बंधन में बांधे रखती है, लेकिन जब मन स्थिर, संतुलित और निष्पक्ष हो जाता है, तब वह शांत हो जाता है।

आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए हमारा मन कब दुर्बल हो जाता है?

आज का जीवन सूत्र जानने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें।

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