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- Avdheshanand Giri Maharaj Life Lesson. Maintain Purity Of Mind And Exterior, This Increases Balance, Peace And Prosperity In Life
हरिद्वार30 मिनट पहले
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पवित्रता ईश्वर की जीवंत अभिव्यक्ति मानी गई है। भारतीय चिंतन में पवित्रता को ही ऐश्वर्य, विभूति, माधुर्य, लक्ष्मी और समृद्धि का आधार कहा गया है। इसलिए बाहरी परिवेश के साथ-साथ मन, मानस और चित्त की शुचिता भी आवश्यक है। जब हमारा मन पवित्र होता है, उसके विचार निर्मल होते हैं और हमारा बाह्य आचरण भी स्वच्छ रहता है, तब जीवन में संतुलन, शांति और समृद्धि स्वाभाविक रूप से बढ़ती है। यही आंतरिक-बाह्य पवित्रता हमें अधिक उन्नति की ओर ले जाती है।
आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए जीवन की समृद्धि का आधार क्या है?
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