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2027 में प्रस्तावित हरिद्वार महाकुंभ से पहले संत समाज में गुटबाजी खुलकर सामने आने लगी है। 13 अखाड़ों का प्रतिनिधित्व करने वाली अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में दोफाड़ के बाद अब श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन भी दो धड़ों में बंट गया है। शुक्रवार को हरिद्वार में दोनों गुट आमने-सामने आ गए। दोनों ने अलग-अलग अखाड़ा परिषद गुटों का समर्थन करते हुए एक-दूसरे पर अखाड़े की परंपराओं और संपत्ति को लेकर गंभीर आरोप लगाए। साथ ही अपने-अपने पक्ष में संतों का बहुमत होने का दावा भी किया। एक पक्ष का नेतृत्व अखाड़ा परिषद (निरंजनी गुट) के अध्यक्ष महंत रविन्द्र पुरी कर रहे हैं, जबकि दूसरे पक्ष की अगुवाई श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के मुखिया महंत भगत राम कर रहे हैं। पंजाब से आए संतों ने रविन्द्र पुरी के सामने रखा विवाद पंजाब से आए नया उदासीन अखाड़े के वरिष्ठ संत महंत गणेश दास ने रविन्द्र पुरी और महामंत्री हरिगिरि महाराज की मौजूदगी में कहा कि पिछले 10-12 सालों से अखाड़े और उनके इष्ट देवताओं के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने अखाड़े की व्यवस्था और संपत्तियों पर कब्जा कर लिया है तथा संत समाज और देवताओं का अपमान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की शिकायत अखाड़ा परिषद को सौंप दी गई है और उन्हें भरोसा दिलाया गया है कि जल्द बैठक बुलाकर विवाद का समाधान किया जाएगा। रविन्द्र पुरी बोले- केन्द्र सरकार कराए निष्पक्ष जांच अखाड़ा परिषद (निरंजनी गुट) के अध्यक्ष महंत रविन्द्र पुरी ने पूरे मामले की सरकारी जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस संबंध में गृह मंत्री, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और पंजाब के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा जाएगा, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद का विधिवत चुनाव पहले ही हो चुका है और उनका कार्यकाल पांच साल का है। ऐसे में कुछ लोगों के इकट्ठा होकर अलग से चुनाव करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी पदाधिकारी का निधन होता है तो केवल उसी रिक्त पद का चुनाव होता है, पूरी कार्यकारिणी का नहीं। महंत भगत राम बोले- नकली पदाधिकारी बनकर अखाड़े को नुकसान पहुंचाने की कोशिश दूसरे गुट के मुखिया महंत भगत राम ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कुछ लोग पंजाब से खुद को नकली अध्यक्ष और सचिव बताकर अखाड़े की छवि खराब करना चाहते हैं। उनका आरोप है कि इन लोगों की मंशा अखाड़े की संपत्ति पर कब्जा करने की है। उन्होंने कहा कि नया उदासीन अखाड़े का मुख्यालय कनखल, हरिद्वार में है और सभी धार्मिक गतिविधियां तथा पूजा-पद्धति यहीं से संचालित होती है। बाबा श्रीचंद्र और गुरु संगत साहिब की मूल प्रतिमाओं की पूजा भी यहीं होती है, जिसका रिकॉर्ड प्रशासन और पुराने कुंभ आयोजनों में मौजूद है। भगत राम ने कहा कि पिछले 20 सालों में अखाड़े का विकास हुआ है और इसी वजह से कुछ लोग विरोध कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अखाड़े की परंपराएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और विरोध करने वाले लोग अखाड़े की मर्यादा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। शुक्रवार को दोनों गुटों ने अलग-अलग बैठकें और शक्ति प्रदर्शन किए। दोनों पक्षों का दावा है कि अधिकांश संत उनके साथ हैं और वही नया उदासीन अखाड़े का वैध प्रतिनिधित्व करते हैं। इससे संत समाज के भीतर विवाद और गहरा गया है।
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