हरियाणा के इकलौते कुरुक्षेत्र भद्रकाली शक्तिपीठ की आरती तैयार:  दिल्ली के जज ने लिखी, बोले- देवी मां सपने में आईं, 52 वाद्ययंत्र बजे – Kurukshetra News
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हरियाणा के इकलौते कुरुक्षेत्र भद्रकाली शक्तिपीठ की आरती तैयार: दिल्ली के जज ने लिखी, बोले- देवी मां सपने में आईं, 52 वाद्ययंत्र बजे – Kurukshetra News

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कुरुक्षेत्र में मां भद्रकाली की आरती करते पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा।

देश के 52 शक्तिपीठों में शामिल कुरुक्षेत्र की शक्तिपीठ श्री देवी कूप भद्रकाली मंदिर की अपनी अलग तरह की आरती होगी। यह हरियाणा की इकलौती शक्तिपीठ है। इसकी नई आरती रची जाने के पीछे रोचक कहानी है। इसके लिरिक्स दिल्ली में तैनात जज स्नेहिल शर्मा ने लिखे।

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उनका कहना है कि सपने में देवी मां से प्रेरणा मिलने के बाद उन्होंने यह आरती लिखी। स्नेहिल शर्मा मंदिर के पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा के बेटे हैं। इसमें 52 वाद्ययंत्रों का इस्तेमाल किया गया है। म्यूजिक व वीडियो के साथ यह आरती कुल 11 मिनट 42 सेकेंड की होगी।

आखिरी नवरात्र पर 30 सितंबर को मंदिर में देवी का जागरण होगा, जिसमें हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी नई आरती लॉन्च करेंगे। इसके साथ ही यह अकेला शक्तिपीठ होगा, जिसकी खुद की आरती होगी।

जय मां भद्रकाली कुरुक्षेत्र वाली…आरती मंदिर की परंपराओं को दर्शाएगी। इसे नई जेनरेशन को ध्यान में रखकर आधुनिक अंदाज में तैयार किया गया है। इस बार आज से शारदीय नवरात्रे आरंभ हो गए हैं। इसलिए मंदिर को सजाया गया है।

भद्रकाली मंदिर में नवरात्रों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

भद्रकाली मंदिर में नवरात्रों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

जानिए…जज को आरती की प्रेरणा कैसे मिली

जज बोले- देवी मां सपने में आईं दैनिक भास्कर एप से बातचीत में स्नेहिल शर्मा ने बताया कि इस आरती को लिखने की प्रेरणा उनको खुद मां भद्रकाली ने दी। 22 अगस्त की रात उनको सपने में मां के दर्शन हुए। वे अगले दिन ही आरती के नए लिरिक्स और कॉन्सेप्ट बनाने में लग गए।

21 दिनों की मेहनत लगी उन्होंने कहा कि इस आरती को तैयार करने में 21 दिन लगे। लिरिक्स तैयार होने के बाद, म्यूजिक डायरेक्टर डॉ. अमित जोशी, सिंगर लवली रामपाल शर्मा और नीतू शर्मा ने इसे तैयार किया। इसके डायरेक्टर राजू मलिकपुर हैं। अब पुराने वर्जन को पूरी तरह से बदलकर आधुनिक और पारंपरिक चीजों के संगम से बनाया गया है।

अपना और मंदिर का महत्व बताएगी आरती स्नेहिल ने बताया कि नई आरती अपना और मंदिर का महत्व खुद बताएगी। इसमें मां भद्रकाली के 8 नाम और उनके स्वरूपों का वर्णन होगा। “रौद्र गुह्य चामुण्डा, दक्षिणा सिद्धकाली। श्मशान महा भद्रकाली, तुम जग रखवाली ॥ जय मां भद्रकाली” साथ ही मंदिर के इतिहास, आरती के महत्व, और मां भद्रकाली के विभिन्न मंदिर की जानकारी भी शामिल हैं। इसके अलावा मंदिर में आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम भी आरती के माध्यम से श्रद्धालुओं तक पहुंचाए जाएंगे।

पीठाध्यक्ष बताएंगे आरती का अर्थ जज स्नेहिल शर्मा ने बताया कि आरती की शुरुआत में मंदिर के पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा आरती की महत्ता बताएंगे। आरती में लिरिक्स का मतलब भी समझाया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को आरती को अच्छे से समझ सकें। आरती के नए वर्जन में उसके 18 अंतरे (पैराग्राफ) को 3-3 के गैप में रखा गया है। नए वर्जन में आरती के हर शब्द को श्रद्धालु समझ सकेंगे।

यहां गिरा था मां सती का दाहिना टखना पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा ने बताया कि “शास्त्रों के अनुसार देवी सती के यज्ञ में आत्मदाह के बाद भगवान शिव उनके मृत शरीर को लेकर पूरे ब्रह्मांड में घूम रहे थे। तब सृष्टि के कल्याण के लिए भगवान शिव के मोह को भंग करने के लिए भगवान विष्‍णु ने अपने सुदर्शन चक्र को देवी सती की मृत देह पर चला दिया। इससे देवी सती की देह 52 भाग में विभक्त हो गई। उनकी देह के अंग धरती पर जहां-जहां गिरे वे शक्तिपीठ कहलाए।

मंदिर परिसर में मौजूद पवित्र कुआं मंदिर परिसर में मां भद्रकाली की प्रतिमा के सामने एक पवित्र कुआं है। माना जाता है कि यह वही कुआं है, जहां माता सती का टखना गिरा था। टखना गिरने के कारण ही यहां कुआं बन गया। इस कुएं को मंदिर कमेटी ने चारों ओर से सुरक्षा की दृष्टि से कवर किया हुआ है। श्रद्धालु दूर से ही कुएं के दर्शन करते हैं।

मंदिर परिसर में मां भद्रकाली की प्रतिमा के सामने पवित्र कुआं है।

मंदिर परिसर में मां भद्रकाली की प्रतिमा के सामने पवित्र कुआं है।

पांडवों ने शुरू की घोड़े चढ़ाने की परंपरा, आज भी कायम इस शक्तिपीठ का इतिहास महाभारत काल से भी जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि महाभारत के युद्ध से पहले पांडवों ने यहीं पर माता से जीत की मन्नत मांगी थी। फिर जीतने पर युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण और अपने भाइयों के साथ आकर यहां पर अपने सबसे सुंदर घोड़े दान किए थे। श्रद्धालु अपनी मन्‍नत पूरी होने पर श्रद्धानुसार सोने, चांदी, संगमरमर और मिट्टी के घोड़े चढ़ाते हैं। खास बात ये है कि यहां घोड़े भी जोड़े में ही चढ़ते हैं। नारियल और प्रसाद की जगह मन्नत पूरी होने पर घोड़े ही अर्पित करते हैं।

श्री कृष्ण की कुलदेवी हैं भद्रकाली ​​​​​​​मां भद्रकाली यदुवंशियों की कुलदेवी हैं। द्वापर काल में भगवान श्री कृष्ण और दाऊ बलराम का मुंडन संस्कार भद्रकाली शक्तिपीठ में ही हुआ था। इस शक्तिपीठ में शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती, राम मंदिर ट्रस्ट अयोध्या के महंत नृत्य गोपाल दास, संत मुरारी बापू, श्रीश्री रविशंकर, अवधूत स्वामी शिवानंद और स्वामी अवधेशानंद सहित कई धर्मगुरु, संत-महात्मा मां भद्रकाली के दर्शन कर पूजा-अर्चना कर चुके हैं।

थानेसर में 4 कूपों का वर्णन ​​​​​​​तीर्थांक पुराण में थानेसर में 4 कूपों- चंद्र कूप, रूद्र कूप, विष्णु कूप और देवी कूप का वर्णन मिलता है। यहां ब्रह्मसरोवर परिसर में चंद्र कूप है, जिसे द्रौपदी कूप के नाम से भी जाना जाता है। स्थाण्वीश्वर महादेव मंदिर में रूद्र कूप और भद्रकाली मंदिर में देवी कूप का वर्णन मिलता है।पिछले साल ही सन्निहित सरोवर के पास श्री लक्ष्मी-नारायण मंदिर में खुदाई के समय कूप मिला। दावा है कि यह कूप ही विष्णु कूप है, जो करीब 100 फुट गहरा है।



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