4 घंटे पहले
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हिंदू पंचांग में 2026 में जेठ का महीना 30 के बजाय 59 दिनों का है। क्योंकि इस बार एक एक्स्ट्रा महीना इसमें जुड़ा है। जिसे अधिक मास कहते हैं। एक्स्ट्रा महीना जुड़ने के बावजूद कैलेंडर गड़बड़ नहीं होगा।
ये हिंदी कैलेंडर का गणित है, इसलिए हर ढाई साल बाद ऐसा होता है। अब सवाल है कि ये होता कैसे है और ऐसा करने की जरूरत ही क्यों पड़ती है, अधिक मास किसे कहते हैं ? इन सब सवालों के जवाब जानते हैं।
पहले ये जान लीजिए- हिंदी कैलेंडर का जेठ महीना 2 मई से शुरू होकर 29 जून को खत्म होगा। इसी बीच 30 दिन का अधिक मास भी रहेगा, जो कि 17 मई से 15 जून तक होगा। इस तरह जेठ महीना 59 दिनों का रहेगा।
अब समझते हैं अधिक मास का गणित

खगोलीय कालगणना: सूर्य-चंद्रमा की घड़ी में तालमेल बनाता है अधिक मास
अधिक मास का सबसे खास खगोलीय पक्ष यह है कि यह सूर्य और चंद्रमा की दो अलग-अलग घड़ियों को एकसाथ चलाए रखता है। चंद्रमा की घड़ी तिथि, पक्ष और महीना बताती है। सूर्य की घड़ी मौसम, साल और संक्रांति का संकेत देती है। दोनों में स्वाभाविक अंतर है, क्योंकि चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर घूमता है और पृथ्वी सूर्य के चारों ओर। अधिक मास इस अंतर को खत्म नहीं करता, बल्कि समय-समय पर संतुलित करता है। यह भारतीय कालगणना की व्यावहारिक और वैज्ञानिक व्यवस्था है।
अधिक मास न जोड़ा जाए तो जुलाई-अगस्त में मनेगी दीपावली
अधिक मास ऐसी व्यवस्था है जो चंद्रमा पर आधारित महीनों को सूर्य वाले महीनों के साथ मिलाए रखती है। अगर ये एक्स्ट्रा महीना कभी न जोड़ा जाए, तो चंद्रमा से बनी तिथियां हर साल सौर कैलेंडर के हिसाब से करीब 11 दिन पहले आने लगेंगी। इसका असर यह होगा कि हमारे त्योहार 3 साल बाद करीब 1 महीना पहले और 9 साल बाद पूरे 3 महीने पहले आने लगेंगे।
ऐसी स्थिति में, अक्टूबर-नवंबर में आने वाली दीपावली खिसककर जुलाई-अगस्त में आ जाएगी। मतलब, जो त्योहार अभी सर्दी या शरद ऋतु में आते हैं, वो धीरे-धीरे बरसात या गर्मी जैसे दूसरे मौसमों में पहुंच सकते हैं। अधिक मास इसी गड़बड़ी को रोकता है और इसी की वजह से हमारे त्योहार हमेशा अपने सही मौसम से जुड़े रहते हैं। जैसे- होली हमेशा वसंत में, दीपावली शरद ऋतु में और चातुर्मास वर्षा ऋतु में ही आते हैं।

एक्स्ट्रा महीना जोड़ने की व्यवस्था सिर्फ हिंदू धर्म में नहीं है
दुनिया के कई कैलेंडरों में चांद और सूरज की चाल को आपस में मिलाने के लिए एक एक्स्ट्रा महीना जोड़ने की वैज्ञानिक व्यवस्था अपनाई जाती है। यह व्यवस्था केवल हिंदू पंचांग तक सीमित नहीं है, बल्कि चीनी कैलेंडर सहित अन्य जगहों पर भी इसी तकनीक का इस्तेमाल होता है। ताकि उनके त्योहार और मौसम हमेशा सही तालमेल में रहें। चूंकि चंद्रमा का साल सूरज के साल से करीब 11 दिन छोटा होता है, इसलिए समय के इस बड़े अंतर को भरने के लिए बीच-बीच में एक पूरा एक्स्ट्रा महीना जोड़ दिया जाता है, जिसे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है।













