33 मिनट पहले
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शुक्रवार, 10 जुलाई को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है, इसे योगिनी एकादशी कहते हैं। यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा पाने की इच्छा से किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के पुण्य से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। इस व्रत से वैसा ही पुण्य मिलता है, जैसा पुण्य यज्ञ करने से मिलता है। एकादशी व्रत करना चाहते हैं, तो इसकी तैयारी दशमी तिथि की शाम से करनी चाहिए। इस बार तिथियों की गड़बड़ की वजह से कई पंचांग में 11 जुलाई को भी एकादशी तिथि बताई गई है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, योगिनी एकादशी व्रत में जो लोग निराहार यानी भूखे नहीं रह पाते हैं, वे एक समय फलाहार कर सकते हैं, इसके साथ ही दूध और फलों का रस भी पी सकते हैं। जो लोग एकादशी व्रत नहीं कर पा रहे हैं, वे इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा कर सकते हैं, अगर विधिवत पूजा नहीं कर पा रहे हैं, तो विष्णु जी को जल और तुलसी चढ़ाकर भी सामान्य पूजा कर सकते हैं। ग्रंथों में लिखा है कि भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करने से भी पूरे व्रत का पुण्य मिल सकता है।
ऐसे कर सकते हैं एकादशी व्रत
- जो लोग एकादशी व्रत करना चाहते हैं, उन्हें एक दिन पहले यानी दशमी तिथि (9 जुलाई) की शाम संतुलित भोजन करना चाहिए। रात में भगवान विष्णु का पूजन करें, मंत्र जप करें, आप चाहें तो ग्रंथ भी पढ़ सकते हैं या प्रवचन, भजन सुन सकते हैं।
- योगिनी एकादशी (10 जुलाई) की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, सूर्य को जल चढ़ाएं। घर के मंदिर में भगवान गणेश, विष्णु जी और महालक्ष्मी का पूजन करें। भगवान के सामने एकादशी व्रत करने का संकल्प लें।
- पूजा में विष्णु-महालक्ष्मी की मूर्तियों को गंगाजल से स्नान कराएं। पंचामृत चढ़ाएं।
- चंदन, रोली, धूप, दीप और लाल-पीले फूलों से श्रृंगार करें।
- भगवान को तुलसी के साथ मिठाई, मौसमी फलों का भोग लगाएं।
- ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।
- पूजा के बाद व्रत करने वाले भक्त को दिनभर निराहार रहना चाहिए। भूखे रहना संभव न हो तो दिन में एक बार फलाहार कर सकता है।
- एकादशी की रात में भी भजन-कीर्तन करते हुए भगवान का ध्यान करना चाहिए। भगवान की कथाएं पढ़-सुन सकते हैं।
- वाणी और व्यवहार पर नियंत्रण रखें। क्रोध-निंदा से बचें। मन को स्थिर और शांत रखें। जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, जल आदि का दान करें।
- अगले दिन यानी द्वादशी (11 जुलाई) को सूर्योदय के समय भगवान विष्णु की पूजा करें। शुद्ध सात्विक खाना बनाएं और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं। इसके बाद स्वयं भोजन करें। इस तरह ये व्रत पूरा होता है।









