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रविवार, 15 फरवरी को शिव पूजा का महापर्व महाशिवरात्रि है। इस पर्व पर भगवान शिव की पूजा खासतौर पर रात में करने की परंपरा है। महाशिवरात्रि को महारात्रि भी कहा जाता है, क्योंकि इस तिथि पर रात में की जाने वाली पूजा अक्षय पुण्य देने वाली मानी जाती है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, शिवपुराण में लिखा है कि पुराने समय में फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की रात भगवान शिव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। उस समय ब्रह्मा और विष्णु के बीच विवाद चल रहा था। दोनों देवताओं खुद को श्रेष्ठ बता रहे थे। इस विवाद को शांत कराने के लिए भगवान शिव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए और इन दोनों देवताओं को अपनी महिमा बताई थी। जब शिवलिंग प्रकट हुआ, तब भगवान शिव ने आकाशवाणी के माध्यम से कहा था कि जो भक्त फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात में जागकर शिवलिंग का पूजन करेगा, उसे विशेष कृपा प्राप्त होगी। इसी कारण महाशिवरात्रि की रात जागरण करने और शिव पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस रात विधि-विधान से शिव पूजा करने वाले भक्तों को शिव कृपा प्राप्त होती है और उनके जीवन के कष्ट दूर होते हैं। इस तिथि पर भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग में दर्शन-पूजन करना चाहिए। महाशिवरात्रि यानी महारात्रि का पर्व मार्कण्डेय पुराण के श्री दुर्गा सप्तशती में तीन प्रकार की दारुण रात्रियों का उल्लेख है। इन तीन रात्रियों को कालरात्रि, महारात्रि और मोहरात्रि कहा गया है। होली का पर्व कालरात्रि के रूप में मनाया जाता है। जबकि दीपावली और शरद पूर्णिमा को मोहरात्रि का पर्व माना गया है। हालांकि कुछ विद्वान दीपावली को कालरात्रि का पर्व भी मानते हैं। शिवरात्रि को विशेष रूप से महारात्रि का कहा गया है, क्योंकि यह रात्रि साधना और भक्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। हिन्दू धर्म में अधिकतर त्योहार सूर्योदय के बाद मनाने की परंपरा है, लेकिन कुछ पर्व हैं, जिन्हें रात में मनाना चाहिए। इनमें होली, दीपावली, शरद पूर्णिमा, जन्माष्टमी, शिवरात्रि और नवरात्रि प्रमुख हैं। इन पर्वों में रात्रि का महत्व है, क्योंकि यह समय साधना, ध्यान और ईश्वर से जुड़ने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। महाशिवरात्रि की रात चारों प्रहर की जाती है शिव पूजा महाशिवरात्रि की रात चारों प्रहरों में भगवान शिव का अभिषेक और पूजन करने की परंपरा है। भक्त दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल और बेलपत्र से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करते हैं। शिवलिंग का ध्यान करते हैं। पूरी रात जागकर भगवान की कथाएं पढ़ी-सुनी जाती हैं। मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात भगवान शिव और माता पार्वती पृथ्वी का भ्रमण करते हैं। वे अपने भक्तों की भक्ति और आस्था को देखते हैं और सच्चे मन से पूजा करने वालों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इसी विश्वास के चलते श्रद्धालु इस रात उपवास करते हैं, मंदिरों में पूजा करते हैं और मंत्र के मंत्रों का जप करते हैं।
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