15 साल पुरानी गाड़ियों पर बैन का मामला कोर्ट पहुंचा:  गुरुग्राम में गडकरी-दिल्ली CM के खिलाफ याचिका दायर; रिकॉर्ड मंगाया गया – gurugram News
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15 साल पुरानी गाड़ियों पर बैन का मामला कोर्ट पहुंचा: गुरुग्राम में गडकरी-दिल्ली CM के खिलाफ याचिका दायर; रिकॉर्ड मंगाया गया – gurugram News

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दिल्ली में ट्रैफिक जाम की फाइल फोटो। इनसेट में दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के फोटो।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी समेत 10 वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ गुरुग्राम की एडिशनल सेशन कोर्ट मे याचिका दायर की गई है। मामला मोटर वाहन अधिनियम से जुड़ा है, जिसमें दिल्ली सरकार पर वाहनों की जब्ती और स्क्रैपि

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गुरुग्राम के सीनियर एडवोकेट मुकेश कुल्थिया की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि पिछले एक दशक से दिल्ली सरकार और विभिन्न केंद्रीय एजेंसियां सुप्रीम कोर्ट, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और अन्य संस्थाओं का झूठा हवाला देकर जनता की वैध और रजिस्टर्ड गाड़ियों को जबरन जब्त कर स्क्रैपिंग एजेंसियों को सौंप रही हैं।

एडवोकेट ने इसे केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और इसके संशोधित नियमों (2019, 2021, 2022, 2023) का खुला उल्लंघन बताया है। उधर, इस याचिका पर एडिशनल सेशन कोर्ट ने संज्ञान लिया है। साथ ही मामले की गंभीरता को देखते हुए सीजेएम कोर्ट से रिकॉर्ड तलब किए है।

याचिकाकर्ता गुरुग्राम के सीनियर एडवोकेट मुकेश कुल्थिया।

याचिकाकर्ता गुरुग्राम के सीनियर एडवोकेट मुकेश कुल्थिया।

एडवोकेट ने दायर याचिका में क्या कहा, 4 पॉइंट में जानिए

  • वाहनों की उम्र 15 साल, फिर जब्त क्यों कर रही सरकार : एडवोकेट मुकेश कुल्थिया ने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम में स्पष्ट है कि वाहन की वैध उम्र 15 वर्ष है और इसके बाद 5-5 साल के लिए रिन्युअल की व्यवस्था है। फिर भी सरकार और अधिकारी किस अधिकार से जनता की गाड़ियां जब्त कर रहे हैं? यह जनता की संपत्ति की लूट है और संविधान के मूल अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
  • कानून का उल्लंघन कर रही सरकार : एडवोकेट ने आगे बताया है कि यह कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 300ए (संपत्ति का अधिकार), 19(1)(ड) (आवागमन की स्वतंत्रता), 19(1)(ग) (व्यवसाय की स्वतंत्रता) और 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन है। यह मामला क्रिमिनल रिवीजन नंबर सीआरआर-438/2025 के तहत दर्ज किया गया है, जो मूल रूप से मुकदमा संख्या कॉमी-436/2025 का पुनरीक्षण है।
  • पांच जुलाई को दाखिल की थी पहली याचिका : उन्होंने बताया कि यह मामला पहले 5 जुलाई 2025 को गुरुग्राम की मजिस्ट्रेट अदालत में कॉमी-436/2025 के तहत दाखिल किया गया था, लेकिन पूर्व स्वीकृति के अभाव में इसे खारिज कर दिया गया। इस आदेश को चुनौती देते हुए एडवोकेट मुकेश कुल्थिया ने एडिशनल सेशन कोर्ट में रिवीजन याचिका दाखिल की। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीजेएम कोर्ट से रिकॉर्ड मांगते हुए इसका संज्ञान लिया है।
  • CM, मंत्री समेत याचिका में ये आरोपी: एडवोकेट मुकेश कुल्थिया की ओर से दायर याचिका में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता, मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, पूर्व परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत के अलावा – गृह सचिव, भारत सरकार गोविंद गोहन, दिल्ली परिवहन विभाग की सचिव/आयुक्त निहारिका राय, पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा, स्पेशल सीपी ट्रैफिक अजय चौधरी, एडिशनल सीपी ट्रैफिक दिनेश गुप्ता को आरोपी बनाया गया है। इनके अलावा वीरेंद्र शर्मा सदस्य, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CQAM) को भी आरोपी बनाया गया है।
अधिवक्ता मुकेश कुल्थिया की ओर से उपलब्ध कराया गया कोर्ट का आदेश।

अधिवक्ता मुकेश कुल्थिया की ओर से उपलब्ध कराया गया कोर्ट का आदेश।

अधिवक्ता ने इस धाराओं में कार्रवाई की मांग की अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि वाहनों की जब्ती और स्क्रैपिंग की कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं का उल्लंघन करती है। उन्होंने बीएनएस धारा 303, 309 चोरी और डकैती, धारा 318(4) धोखाधड़ी, धारा 198, 199 लोक सेवक द्वारा कानून की अवहेलना और धारा 61(1)(2) आपराधिक षड्यंत्र, धारा 336(1) जालसाजी, बीएनएसएस धारा 33, 210 आपराधिक प्रक्रिया की वैधानिक संरचना के तहत कार्रवाई की मांग की है।

जल्द सुनवाई होने की उम्मीद अधिवक्ता मुकेश कुल्थिया ने बताया कि गुरुग्राम की एडिशनल सेशन कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई जल्द होने की उम्मीद है। यदि कोर्ट याचिकाकर्ता के हक में कोई फैसला करती है तो यह दिल्ली सरकार और संबंधित अधिकारियों के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है।

दिल्ली में जगा जाम और एयर क्वालिटी इंडेक्स दर्शाता बोर्ड। (फाइल फोटो)

दिल्ली में जगा जाम और एयर क्वालिटी इंडेक्स दर्शाता बोर्ड। (फाइल फोटो)

यहां जानिए दिल्ली में पुराने वाहनों को लेकर क्या चल रहा…

एनजीटी ने नवंबर 2014 में दिया था आदेश NGT ने 26 नवंबर, 2014 को एक आदेश दिया था। इस आदेश में कहा गया था कि 15 साल से पुराने वाहनों को सार्वजनिक जगहों पर खड़ा नहीं किया जा सकता। अगर ऐसे वाहन कहीं खड़े हुए मिलते हैं, तो पुलिस उन्हें उठाकर ले जाएगी। यह नियम सभी तरह की गाड़ियों पर लागू होता है फिर चाहे वे टूव्हीलर हों, चार पहिया या भारी वाहन हों। सुप्रीम कोर्ट ने भी 29 अक्टूबर 2018 के अपने आदेश में कहा था कि ऐसे एंड ऑफ लाइफ (ईओएल) वाहन NCR में नहीं चलेंगे।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने किया था आदेश इसी साल कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CQAM) ने एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए हर रोज बढ़ते पॉल्यूशन को कंट्रोल करने के लिए जारी किए थे। इसमें कहा गया था कि दिल्ली में 31 जुलाई, 2025 से 10 साल से पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों को एक जुलाई 2025 से किसी भी पेट्रोल पंप पर पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा जो वाहन चालक इसका उल्लंघन करते पाए जाएंगे तो वाहन जब्त कर लिए जाएंगे। धरकपड़ के लिए सभी पेट्रोल पंपों पर विशेष ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर (ANPR) कैमरे लगाने की भी तैयारी थी।

बैन पर नाराज हो गई थी जनता, उठाए थे कई सवाल इस आदेश के आते ही दिल्ली के लोगों ने नाराजगी जताते हुए यही दलील दी थी कि यदि कोई गाड़ी फिट है प्रदूषण नहीं फैला रही है तो सिर्फ उम्र देखकर उसे क्यों बैन कर दिया जााए। बहुत से लोगों का कहना था कि उनकी गाड़ी 10-15 साल पुरानी हो गई है, लेकिन बहुत कम यूज कर पाएं हैं इसलिए गाड़ी एकदम फिट है और प्रदूषण नहीं फैल रहा है।

31 अक्टूबर तक स्थगित की कार्रवाई विरोध बढ़ने पर दिल्ली में एंड-ऑफ-लाइफ (EOL) या ओवरएज वाहनों पर फ्यूल प्रतिबंध 1 नवंबर तक स्थगित कर दिया गया है। 22 दिन पहले वायु गुणवत्ता आयोग (CAQM) की मंगलवार को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया था। पहले जारी किए गए निर्देशों के अनुसार, ऐसे वाहनों को 1 जुलाई से दिल्ली में ईंधन नहीं दिया जाना था। अब इन्हें 31 अक्टूबर तक राहत दी गई है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने 3 जुलाई को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) से ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया था।

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पुराने वाहनों को 1 नवंबर से नहीं मिलेगा फ्यूल:दिल्ली सहित 5 शहरों में नियम लागू होगा; पहले 1 जुलाई से बैन लगना था

दिल्ली में एंड-ऑफ-लाइफ (EOL) या ओवरएज वाहनों पर फ्यूल प्रतिबंध 1 नवंबर तक स्थगित कर दिया गया है। वायु गुणवत्ता आयोग (CAQM) की मंगलवार को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। जो डीजल गाड़ियां 10 साल से पुरानी और पेट्रोल गाड़ियां 15 साल से पुरानी होती हैं उन्हें EOL वाहन कहा जाता है। पहले जारी किए गए निर्देशों के अनुसार, ऐसे वाहनों को 1 जुलाई से दिल्ली में ईंधन नहीं दिया जाना था। अब इन्हें 31 अक्टूबर तक राहत दी गई है। (पूरी खबर पढ़ें)



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