2020 दिल्ली दंगा- शरजील इमाम, उमर खालिद की जमानत नामंजूर:  9 याचिकाएं खारिज; हाईकोर्ट बोला- विरोध के नाम पर हिंसा अभिव्यक्ति की आजादी नहीं
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2020 दिल्ली दंगा- शरजील इमाम, उमर खालिद की जमानत नामंजूर: 9 याचिकाएं खारिज; हाईकोर्ट बोला- विरोध के नाम पर हिंसा अभिव्यक्ति की आजादी नहीं

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नई दिल्ली15 घंटे पहले

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दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 दंगों की साजिश से जुड़े केस में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम समेत 9 की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। ये सभी आरोपी 2020 से जेल में हैं। इन्होंने ट्रायल कोर्ट से जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया है कि उन्होंने मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को बड़े पैमाने पर लामबंद करने के लिए सांप्रदायिक आधार पर भड़काऊ भाषण दिए।

जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शैलिंदर कौर की बेंच कहा कि शरजील-उमर पर लगे आरोपों के मद्देनजर पहली नजर में साजिश में उनकी भूमिका गंभीर है।

कोर्ट आरोपियों के वकील के इस तर्क को खारिज कर दिया कि दंगों के समय शरजील इमाम और उमर खालिद दिल्ली में नहीं थे।

दिल्ली में 23 फरवरी 2020 को शुरू हुआ दंगा 25 फरवरी को जाकर थमा था।

दिल्ली में 23 फरवरी 2020 को शुरू हुआ दंगा 25 फरवरी को जाकर थमा था।

बेंच ने कहा- 2019 से एक्टिव हो गए थे दोनों

फैसला सुनाते हुए बेंच ने कहा, “शरजील इमाम और उमर खालिद दिसंबर 2019 की शुरुआत में सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट के पारित होने के बाद सबसे पहले कार्रवाई करने वाले व्यक्ति थे। इन लोगों न व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर और मुस्लिम आबादी वाले इलाकों में पर्चे बांटकर विरोध प्रदर्शन और चक्का जाम का आह्वान किया, जिसमें जरूरी चीजों की आपूर्ति रोकना भी शामिल था।”

बेंच ने कहा – फरवरी 2020 में हुई हिंसा में 53 लोगों की जान गई थी। आम जनता और पुलिस अधिकारी घायल हुए और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचा, इसलिए अपीलकर्ता जमानत के हकदार नहीं हैं।

जानिए 2020 दिल्ली दंगा केस में कब क्या हुआ…

  • फरवरी 2020: CAA यानी नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के उत्तर-पूर्वी हिस्से में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी, जिसमें 54 लोग मारे गए और 700 से ज्यादा घायल हुए। उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य पर दंगों का मास्टरमाइंड होने का आरोप लगा। उन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और IPC की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
  • अगस्त 2020: इमाम को एक बड़ी साजिश के मामले में गिरफ़्तार किया गया।
  • सितंबर 2020: खालिद को एक बड़ी साजिश के मामले में गिरफ़्तार किया गया। अन्य आरोपियों को उसी साल गिरफ़्तार किया गया।
  • 2022: निचली अदालत ने आरोपियों की ज़मानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
  • 2022-24: कई आरोपियों ने निचली अदालतों के जमानत खारिज करने के आदेशों के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया।
  • 9 जुलाई 2025: दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा।

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साल 2020 की बात है। CAA-NRC के विरोध में हुए प्रोटेस्ट के दौरान दिल्ली में दंगे भड़क गए थे। 25 फरवरी, 2020 को नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के खजूरी चौक पर बब्बू नाम के एक ऑटो ड्राइवर को दंगाइयों ने बुरी तरह पीटा। पिटाई से बेदम हुए बब्बू की मौत हो गई। पुलिस ने बब्बू के मर्डर के आरोप में मोहम्मद शहाबुद्दीन, मोहम्मद मारूफ और रिजवान समेत 19 लोगों को आरोपी बनाया।

6 महीने से लेकर साढ़े तीन साल तक जेल में रहे। टॉर्चर झेला। कोर्ट के चक्कर लगाए। अब 5 साल बाद आम जिंदगी में लौट रहे हैं। दैनिक भास्कर ने उनसे बातचीत की, पढ़ें उनकी आपबीती…

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