2050 तक आधी आबादी होगी मायोपिया से प्रभावित:  चश्मा टेस्ट के बाद रोजाना इस्तेमाल जरूरी, नहीं तो बढ़ सकती हैं आंखों की समस्याएं
महिला

2050 तक आधी आबादी होगी मायोपिया से प्रभावित: चश्मा टेस्ट के बाद रोजाना इस्तेमाल जरूरी, नहीं तो बढ़ सकती हैं आंखों की समस्याएं

Spread the love


4 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

  • कॉपी लिंक

इस भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग इतना ज्यादा व्यस्त हो गए हैं कि उनके पास अपने बच्चों तक के लिए समय नहीं है। जिनके पास समय है भी, वे बच्चों के साथ खेलने के बजाय स्मार्टफोन में डूबे रहते हैं या बच्चों से पीछा छुड़ाने के लिए उन्हें भी स्मार्टफोन थमा देते हैं।

बच्चों का क्या, उन्हें तो इंगेजमेंट चाहिए। अगर पेरेंट्स उन्हें समय नहीं देते तो वे मोबाइल के साथ ही अटैच्ड हो जाते हैं। हालांकि आगे चलकर इसका खामियाजा पेरेंट्स और बच्चों, दोनों को भुगतना पड़ता है। ज्यादा स्क्रीन टाइम की वजह से बच्चों में मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) की समस्या हो जाती है। ये एक ऐसी स्थिति है, जिसमें दूर की वस्तुएं स्पष्ट रूप से नहीं दिखाई देती हैं।

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक रिव्यू रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 4 दशकों में 5 से 15 वर्ष के बच्चों में मायोपिया के मामले 7.5% तक बढ़ गए हैं। वहीं पिछले एक दशक में गांवों में भी मायोपिया के मामलों में 4.6% से 6.8% तक इजाफा हुआ है।

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में ही पब्लिश एक अन्य स्टडी के मुताबिक, साल 2050 तक दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी मायोपिया से पीड़ित होगी।

तो चलिए, आज जरूरत की खबर में बात बच्चों में होने वाले मायोपिया की। साथ ही जानेंगे कि-

  • बच्चों में मायोपिया क्यों तेजी से बढ़ रहा है?
  • उन्हें इसके खतरे से कैसे बचाया जा सकता है?

एक्सपर्ट: डॉ. कर्नल अदिति दुसाज, सीनियर कंसल्टेंट, ऑप्थल्मोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली

सवाल- बच्चों को इतना ज्यादा चश्मा क्यों लग रहा है? जवाब- आजकल कम उम्र में ही बच्चों को चश्मा लग जाता है। यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। ऑप्थल्मोलॉजिस्ट डॉ. कर्नल अदिति दुसाज कहती हैं कि इसके कई कारण हैं, जिसमें स्क्रीन टाइम का बढ़ना और बाहर घूमने व खेलने-कूदने जैसी एक्टिविटीज का कम होना सबसे बड़ी वजह है।

आजकल बच्चे घर से बाहर खेलने के बजाय मोबाइल गेम खेलने में ज्यादा समय बिताते हैं। शायद यह एक बड़ी वजह है कि पिछले कुछ सालों में बच्चों की आंखों से जुड़ी समस्याएं जितनी बढ़ी हैं, उतनी पहले कभी नहीं बढ़ीं। इसके कारण बच्चों में मायोपिया के मामलों में भी तेजी आई है।

ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (AIIMS) दिल्ली की एक स्टडी के मुताबिक, भारत में स्कूल जाने वाले 13% से अधिक बच्चे मायोपिया से पीड़ित हैं। स्टडी बताती है कि इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के अधिक इस्तेमाल से पिछले एक दशक में यह संख्या दोगुनी हो गई है।

सवाल- आंखें मायोपिक क्यों हो रही हैं? जवाब- डॉ. कर्नल अदिति दुसाज बताती हैं कि आंखों की सामने की लेयर यानी कॉर्निया और लेंस में प्रॉब्लम की वजह से आंखें मायोपिक हो जाती हैं। इसमें व्यक्ति को दूर की चीजें धुंधली और पास की चीजें स्पष्ट दिखाई देती हैं। नजदीक की चीजें ज्यादा देर तक देखने से आंखों के मायोपिक होने का खतरा बढ़ जाता है।

साल 2022 में स्टेटिस्टा में पब्लिश एक डेटा के मुताबिक, भारत के शहरी क्षेत्रों में 9 से 13 वर्ष की उम्र के अधिकांश बच्चे रोजाना 3 घंटे से ज्यादा समय मोबाइल पर बिताते हैं। इस दौरान वे सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हैं और इंटरनेट पर गेम खेलते हैं।

सवाल- मायोपिया होने के क्या कारण हैं? जवाब- डॉ. कर्नल अदिति दुसाज बताती हैं कि बच्चों में मायोपिया की एक बड़ी वजह ज्यादा स्क्रीन टाइम है। वहीं अगर माता-पिता में से किसी एक या दोनों को मायोपिया है तो बच्चे को भी ये समस्या हो सकती है। इसके अलावा जो बच्चे घर से बहुत कम बाहर निकलते हैं, उनमें मायोपिया की आशंका अधिक होती है।

सवाल- मायोपिया के लक्षण क्या हैं? जवाब- मायोपिया के लक्षण बहुत सामान्य हो सकते हैं। लेकिन इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नीचे ग्राफिक से इसके लक्षणों को समझिए-

सवाल- बच्चों को मायोपिया के खतरे से बचाने के लिए क्या करें? जवाब- बच्चों को मायोपिया के खतरे से बचाने के लिए सबसे पहले उनका स्क्रीन टाइम कम करें। उन्हें बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करें। इसके साथ ही उन्हें विटामिन A और C समेत अन्य जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर डाइट दें। इसके अलावा कुछ अन्य बातों का भी ध्यान रखें। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- अगर बच्चा चश्मा टेस्ट होने के बाद भी उसे नहीं लगाता है तो क्या होगा? जवाब- इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, भारत में एक तिहाई से भी कम छात्र अपने चश्मे का ठीक ढंग से इस्तेमाल करते हैं। इसके पीछे चश्मे का फ्रेम सही न होने समेत कई कारण हैं।

हालांकि टेस्टेड चश्मे का रोजाना इस्तेमाल करना जरूरी है। इसे न लगाने से समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए पेरेंट्स को अपने बच्चे को रोज चश्मा लगाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

सवाल- मायोपिया का इलाज कैसे किया जाता है? जवाब- डॉ. कर्नल अदिति दुसाज बताती हैं कि चश्मा, कॉन्टैक्ट लेंस या लेजर सर्जरी के जरिए मायोपिया का इलाज किया जाता है। ये मायोपिया की कंडीशन पर निर्भर करता है कि व्यक्ति को कैसे इलाज की जरूरत है।

सवाल- क्या मायोपिया से बचने के लिए एक्सरसाइज मददगार हो सकती है? जवाब- एक्सरसाइज सीधे तौर पर मायोपिया से नहीं बचाती है। लेकिन सुबह के समय बाहर निकलना आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद है। आंखों को हेल्दी बनाए रखने के लिए कुछ खास एक्सरसाइज होती हैं। इनमें पलकें झपकाना, कुछ देर के लिए हथेली से आंख ढंकना और फोकस बदलना जैसी कई एक्टिविटीज शामिल हैं।

………………….

जरूरत की ये खबर भी पढ़िए

जरूरत की खबर- बच्चों की मेमोरी कैसे बढ़ाएं:ये चीजें खाने से तेज होता दिमाग, शुगर और स्क्रीन टाइम खतरनाक

हम जो कुछ भी खाते हैं, वह हमारे शरीर के साथ-साथ ब्रेन को भी प्रभावित करता है। पौष्टिक भोजन से दिमाग तेज, फोकस्ड और एक्टिव रहता है, जबकि अनहेल्दी डाइट से लो एनर्जी और याददाश्त कम होने लगती है। इसलिए बच्चों की मेमोरी बूस्ट करने के लिए उनकी डाइट का खास ख्याल रखना चाहिए। पूरी खबर पढ़िए…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *