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25 और 26 अक्टूबर आश्विन पूर्णिमा: भगवान श्रीकृष्ण ने शरद पूर्णिमा की रात गोपियों संग रचाया था रास, जानिए इस पर्व से जुड़ी मान्यताएं

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6 मिनट पहले

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आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। मान्यता है कि द्वापर युग में शरद पूर्णिमा की रात में भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों संग महारास रचाया था। माना जाता है कि आज भी शरद पूर्णिमा की रात भगवान गोपियों संग रास रचाते हैं। एक अन्य मान्यता के अनुसार इस तिथि की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जो भक्त रात में जागकर लक्ष्मी पूजा करते हैं, उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, इस साल शरद पूर्णिमा की तिथि 25 और 26 अक्टूबर को यानी दो दिन पड़ने से पूजा और व्रत की तारीख को लेकर पंचांग भेद हैं। अधिकतर ज्योतिषियों का कहना है कि 25 तारीख की रात खीर बनाने की परंपरा निभाई जा सकती है और 26 तारीख की सुबह स्नान-दान और पूजन से जुड़ी परंपराएं निभा सकते हैं।

श्रीकृष्ण और गोपियों से जुड़ी मान्यता

शरद पूर्णिमा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं से जुड़ा है। मान्यता के अनुसार, द्वापर युग में शरद ऋतु की पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास रचाया था। इस रात चंद्र अपनी पूर्ण कलाओं के साथ प्रकाशित था और उसकी चांदनी में वृंदावन का वातावरण अलौकिक हो गया था।

श्रीमद्भागवत महापुराण में रासलीला को भगवान और भक्त के बीच प्रेम, समर्पण और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक बताया गया है। गोपियों का श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम सांसारिक मोह से परे थे, महारास को गोपियों की भक्ति का स्वरूप माना जाता है। महारास के दौरान श्रीकृष्ण ने अपनी योगमाया से वृंदावन की हर एक गोपी को यह अनुभव कराया कि वे उनके साथ ही नृत्य कर रहे हैं। मथुरा के पास वृंदावन स्थित निधिवन को लेकर ऐसी ही मान्यता प्रसिद्ध है।

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां रात में भगवान श्रीकृष्ण गोपियों के साथ रासलीला करते हैं। इसी वजह से सूर्यास्त के बाद निधिवन को दर्शनार्थियों के लिए बंद कर दिया जाता है और किसी को भी रात में वहां रुकने की अनुमति नहीं होती।

शरद पूर्णिमा की रात पृथ्वी पर आती हैं मां लक्ष्मी

महालक्ष्मी से जुड़ी मान्यता है कि देवी लक्ष्मी इस रात अपने भक्तों के घरों में आती हैं और स्वच्छता, श्रद्धा-भक्ति से उनका स्वागत करने वालों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसी वजह से शरद पूर्णिमा की रात घरों की साफ-सफाई की जाती है, दीपक जलाए जाते हैं और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। कई श्रद्धालु रात में जागकर भजन-कीर्तन और मंत्र जप करते हैं। कमल के गट्टे की माला से मां लक्ष्मी के मंत्र ॐ महालक्ष्मयै नमो नमः का कम से कम 108 बार जप किया जाता है। श्रद्धापूर्वक मंत्र जप और पूजा करने से घर में सुख-शांति तथा समृद्धि बनी रहती है।

चंद्र की रोशनी में खीर रखने की परंपरा

शरद पूर्णिमा पर रात में खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा प्रचलित है। दूध, चावल, चीनी और मेवों से बनी खीर को भगवान को अर्पित किया जाता है और बाद में परिवार के सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। माना जाता है कि इस रात चंद्र की किरणों में अमृतमयी गुण होते हैं। इसलिए खीर को चांदनी में रखने और प्रसाद के रूप में खाने की परंपरा है। हालांकि, चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर के औषधीय गुणों के बारे में प्रचलित मान्यताओं के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।

शरद पूर्णिमा पर करें ये शुभ काम

  • सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें।
  • शाम को घर के आंगन में दीपक जलाएं।
  • मां लक्ष्मी के मंत्र का 108 बार जप करें।
  • भगवान सत्यनारायण की कथा सुनें और प्रसाद बांटें।
  • व्रत, भजन-कीर्तन और रात्रि जागरण करें।
  • चंद्रमा को अर्घ्य दें और खीर बनाकर भगवान को अर्पित करें।
  • जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, धन और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करें।

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