फिरोजाबाद की तहसील सदर स्थित निबंधन विभाग के केंद्रीय अभिलेखागार में कूट रचित वसीयत चस्पा कर बहुमूल्य शासकीय अभिलेखों से छेड़छाड़ करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर कर अदालत को गुमराह करने के इस खेल में थाना दक्षिण पुलिस ने आगरा के न्यू लॉयर्स कॉलोनी निवासी आरोपी लक्ष्मी नारायण समेत निबंधन विभाग के संदिग्ध तत्कालीन कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, कूटरचना और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है।
नोएडा के ग्राम मोरना निवासी खेमचंद ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि आरोपी लक्ष्मी नारायण ने उनके पिता मामराज व चाचा धनपाल की करोड़ों रुपये की जमीन को हड़पने की नीयत से वर्ष 1998 की एक फर्जी वसीयत तैयार की। आरोपी ने इस कूटरचित दस्तावेज के आधार पर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) गौतमबुद्ध नगर के न्यायालय में झूठे तथ्य पेश कर अपने पक्ष में फैसला भी हासिल कर लिया।
जांच में खुली सरकारी अभिलेखों की हेराफेरी
प्रकरण की भनक लगते ही जब उप निबंधक सदर प्रथम फिरोजाबाद से अभिलेखों का मिलान कराया गया तो निबंधन विभाग में हड़कंप मच गया। उप निबंधक की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि अभिलेखागार में सुरक्षित बही संख्या-3, खंड-38 में चस्पा की गई वसीयत का ब्योरा तत्कालीन इंडेक्स, स्याह और रजिस्टर नंबर-8 से पूरी तरह भिन्न है। इससे साफ हो गया कि सरकारी अभिलेखागार की विश्वसनीयता को ताक पर रखकर उसमें फर्जी पन्ने शामिल किए गए थे।
सीओ सिटी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि थाना दक्षिण पुलिस ने संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।







