नई दिल्ली1 घंटे पहले
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दो पायलट्स की हार्ट अटैक से मौत के बाद देश में कॉमर्शियल पायलट्स की थकान और उनके ड्यूटी के घंटों को लेकर विवाद बढ़ गया है।
द एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को पत्र लिखकर फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों को पूरी तरह सख्ती से लागू करने की मांग की है।
एसोसिएशन ने बताया कि पायलट्स का कहना है कि एयरलाइंस को नियमों में बार-बार दी जा रही छूट सुरक्षा और क्रू की सेहत के साथ समझौता है।

दो पायलट्स की मौत ने बढ़ाई चिंता
पायलट्स एसोसिएशन ने DGCA प्रमुख वीर विक्रम यादव और नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा को लिखे लेटर में बताया कि, बाली (इंडोनेशिया) में 29 अप्रैल को रेस्ट पीरियड के दौरान एअर इंडिया के एक पायलट की हार्ट अटैक से मौत हो गई। उन्होंने 28 अप्रैल को दिल्ली से बाली की फ्लाइट ऑपरेट की थी।
वहीं, 30 अप्रैल को बेंगलुरु में ट्रेनिंग सेशन के दौरान अकासा एयर के एक पायलट (उम्र 40-45 साल) की भी हार्ट अटैक से मौत हो गई। एसोसिएशन का कहना है कि 45 साल से कम उम्र के पायलट्स की ये मौतें काम के बढ़ते दबाव और थकान की ओर इशारा करती हैं।
पायलट्स को 48 घंटे का वीकली रेस्ट मिलना अनिवार्य
एसोसिएशन के प्रेसिडेंट कैप्टन सैम थॉमस ने पत्र में बताया कि एयरलाइंस को दी जा रही अस्थायी छूट अब ‘नॉर्म’ बन गई है। इससे FDTL नियमों का मूल उद्देश्य ही खत्म हो गया है।
पायलटों ने मांग की है कि इन छूटों को वापस लेने के लिए एक स्पष्ट टाइमलाइन तय की जाए। नियमों के मुताबिक, पायलट्स को 48 घंटे का ‘वीकली रेस्ट’ मिलना अनिवार्य है, लेकिन एयरलाइंस अक्सर ऑपरेशनल दिक्कतों का हवाला देकर इससे बचती हैं।

एअर इंडिया और इंडिगो को मिली है विशेष राहत
हाल ही में एयर इंडिया को लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए विशेष छूट दी गई थी। एयरलाइन ने तर्क दिया था कि पाकिस्तान और पश्चिम एशिया के हवाई क्षेत्र बंद होने की वजह से विमानों को अमेरिका और यूरोप जाने में ज्यादा समय लग रहा है।
वहीं, दिसंबर 2025 में इंडिगो ने नियमों के चलते भारी संख्या में उड़ानें रद्द की थीं, जिसके बाद उसे 10 फरवरी तक की मोहलत दी गई थी। पायलट्स का कहना है कि ऐसी ‘सिलेक्टिव’ राहत कमर्शियल हितों को बढ़ावा देती है, सुरक्षा को नहीं।
थकान की रिपोर्टिंग पर एयरलाइंस का रवैया सुस्त
एसोसिएशन ने RTI के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि एयरलाइंस द्वारा थकान की रिपोर्ट स्वीकार करने की दर बहुत कम है। पायलट्स का आरोप है कि कंपनियां थकान की रिपोर्टिंग को हतोत्साहित करती हैं।
मांग की गई है कि एयरलाइंस द्वारा जमा किए जाने वाले तिमाही थकान डेटा को सार्वजनिक किया जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
भारत को 30 हजार पायलट्स की जरूरत, अभी सिर्फ 25 हजार
फरवरी में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, भारत में 65 साल से कम उम्र के 25,001 लाइसेंस प्राप्त पायलट हैं। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू के मुताबिक, एयरबस और बोइंग को दिए गए 1,700 विमानों के ऑर्डर को देखते हुए भारत को जल्द ही 30,000 पायलट्स की जरूरत होगी।
वर्तमान में इंडिगो के पास सबसे ज्यादा 5,455 और एअर इंडिया के पास 3,432 पायलट हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पायलट्स की कमी की भरपाई मौजूदा स्टाफ से ज्यादा काम कराकर की जा रही है, जो जोखिम भरा है।
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