7.8% से बढ़ी इकोनॉमी, ट्रम्प ने डेड बताया था:  ये पिछली 5 तिमाही में सबसे ज्यादा; सर्विस-मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का बेहतर परफॉर्मेंस इसकी वजह
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7.8% से बढ़ी इकोनॉमी, ट्रम्प ने डेड बताया था: ये पिछली 5 तिमाही में सबसे ज्यादा; सर्विस-मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का बेहतर परफॉर्मेंस इसकी वजह

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मुंबईकुछ ही क्षण पहले

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इकोनॉमी की हेल्थ को ट्रैक करने के लिए GDP का इस्तेमाल होता है। ये देश के भीतर एक तय समय में सभी गुड्स और सर्विस की वैल्यू को दिखाती है। - Dainik Bhaskar

इकोनॉमी की हेल्थ को ट्रैक करने के लिए GDP का इस्तेमाल होता है। ये देश के भीतर एक तय समय में सभी गुड्स और सर्विस की वैल्यू को दिखाती है।

वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत की GDP ग्रोथ सालाना आधार पर 6.5% से बढ़कर 7.8% पर पहुंच गई है। ये पिछली 5 तिमाही में सबसे ज्यादा है। मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस और एग्रीकल्चर सेक्टर के बेहतर परफॉर्मेंस की वजह से GDP में ये उछाल देखा गया है।

इससे पहले 31 जुलाई को भारत पर 25% टैरिफ लगाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत और रूस को डेड इकोनॉमी बताया। उन्होंने कहा था- भारत और रूस अपनी अर्थव्यवस्था को साथ ले डूबें, मुझे क्या।

पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ के 5 बड़े कारण

  • सर्विस सेक्टर (जिसमें व्यापार, होटल, परिवहन, वित्तीय सेवाएं और अन्य सेवाएं शामिल हैं) में सबसे ज़्यादा तेजी आई है। इसकी ग्रोथ 9.3% रही।
  • मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन जैसे उद्योगों में 7.5% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है ।
  • लोगों ने खरीदारी पर अपना खर्च बढ़ाया है। निजी उपभोग खर्च में 7.0% की वृद्धि हुई है। सरकारी खर्च में 9.7% की बढ़ोतरी हुई, जो पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के 4.0% से काफी बेहतर है।
  • इस तिमाही में निवेश में भी बढ़ोतरी हुई है। ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन में 7.8% की वृद्धि दर्ज की गई है।
  • कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों की वृद्धि दर पिछले साल के 1.5% से बढ़कर 3.7% हो गई है, जो इकोनॉमी के लिए एक पॉजिटिव संकेत है ।

RBI ने 6.5% इकोनॉमी ग्रोथ का अनुमान जताया था

6 अगस्त को रिजर्व बैंक (RBI) ने मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में FY26 के लिए इकोनॉमी ग्रोथ का अनुमान 6.5% पर बरकरार रखा था। RBI गवर्नर ने कहा था- मानसून सीजन अच्छा चल रहा है। साथ ही, त्योहारों का सीजन भी नजदीक आ रहा है।

ये अनुकूल माहौल, सरकार और रिजर्व बैंक की सहायक नीतियों के साथ, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निकट भविष्य में अच्छा संकेत देता है। भले ही ग्लोबल ट्रेड की चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं कुछ हद तक कम हुई हैं।

GDP क्या है?

इकोनॉमी की हेल्थ को ट्रैक करने के लिए GDP का इस्तेमाल होता है। ये देश के भीतर एक तय समय में सभी गुड्स और सर्विस की वैल्यू को दिखाती है। इसमें देश की सीमा के अंदर रहकर जो विदेशी कंपनियां प्रोडक्शन करती हैं, उन्हें भी शामिल किया जाता है।

दो तरह की होती है GDP

GDP दो तरह की होती है। रियल GDP और नॉमिनल GDP। रियल GDP में गुड्स और सर्विस की वैल्यू का कैलकुलेशन बेस ईयर की वैल्यू या स्टेबल प्राइस पर किया जाता है। फिलहाल GDP को कैलकुलेट करने के लिए बेस ईयर 2011-12 है। वहीं नॉमिनल GDP का कैलकुलेशन करंट प्राइस पर किया जाता है।

कैसे कैलकुलेट की जाती है GDP?

GDP को कैलकुलेट करने के लिए एक फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जाता है। GDP=C+G+I+NX, यहां C का मतलब है प्राइवेट कंजम्प्शन, G का मतलब गवर्नमेंट स्पेंडिंग, I का मतलब इन्वेस्टमेंट और NX का मतलब नेट एक्सपोर्ट है।

GDP की घट-बढ़ के लिए जिम्मेदार कौन है?

GDP को घटाने या बढ़ाने के लिए चार इम्पॉर्टेंट इंजन होते हैं।

1. आप और हम- आप जितना खर्च करते हैं, वो हमारी इकोनॉमी में योगदान देता है।

2. प्राइवेट सेक्टर की बिजनेस ग्रोथ- ये GDP में 32% योगदान देती है।

3. सरकारी खर्च- इसका मतलब है गुड्स और सर्विसेस प्रोड्यूस करने में सरकार कितना खर्च कर रही है। इसका GDP में 11% योगदान है।

4. नेट डिमांड- इसके लिए भारत के कुल एक्सपोर्ट को कुल इम्पोर्ट से घटाया जाता है, क्योंकि भारत में एक्सपोर्ट के मुकाबले इम्पोर्ट ज्यादा है, इसलिए इसका इम्पैक्ट GPD पर निगेटिव ही पड़ता है।

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