90% of content is created for TV | 90 प्रतिशत कंटेंट टीवी के लिए बनता है: आलोक जैन बोले- टेलीविजन खत्म नहीं होगा, दर्शकों की बदलती सोच के साथ हम आगे बढ़ते हैं
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90% of content is created for TV | 90 प्रतिशत कंटेंट टीवी के लिए बनता है: आलोक जैन बोले- टेलीविजन खत्म नहीं होगा, दर्शकों की बदलती सोच के साथ हम आगे बढ़ते हैं

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2 घंटे पहलेलेखक: आशीष तिवारी

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एक ऐसे दौर में जब अक्सर कहा जा रहा है कि टेलीविजन का प्रभाव कम हो रहा है, उसी समय कलर्स चैनल ने 18 साल पूरे कर लिए हैं और जियो हॉटस्टार डिजिटल दर्शकों की नई आदत बन चुका है। टेलीविजन और डिजिटल के इस बदलते समीकरण, दर्शकों की पसंद और कंटेंट की रणनीति पर हमारी खास बातचीत हुई जियोस्टार के आलोक जैन से। पेश है कुछ प्रमुख अंश..

सवाल: आज के समय में जब यह माना जा रहा था कि टेलीविजन खत्म होने के कगार पर है, उसी दौर में कलर्स 18 साल तक प्रासंगिक बना रहा। यह कैसे संभव हुआ?

जवाब: यह धारणा कि टेलीविजन खत्म हो रहा है, पूरी तरह गलत है। आज भी भारत में 80 से 90 करोड़ लोग टेलीविजन देखते हैं। यह आज भी देश में मनोरंजन का प्राथमिक माध्यम है। लोग औसतन प्रतिदिन दो से तीन घंटे टीवी देखते हैं। कई बार हमें अपने आसपास के अनुभव के आधार पर ऐसा लगता है कि देश भर में भी वही हो रहा है, जबकि वास्तविकता अलग होती है।

सवाल: डिजिटल और ओटीटी प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के कारण ऐसा क्यों लगने लगा कि टीवी पीछे छूट रहा है?

जवाब: ओटीटी प्लेटफॉर्म इसलिए तेजी से बढ़े क्योंकि उन्होंने दर्शकों को सुविधा दी, जब चाहें, जहां चाहें कंटेंट देखने की। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि टेलीविजन कमजोर हुआ है। आज लगभग 60 करोड़ लोग डिजिटल पर हैं, जबकि टीवी दर्शकों की संख्या करीब 90 करोड़ है। भारत में बनने वाला 80 से 90 प्रतिशत कंटेंट आज भी टेलीविजन के लिए ही तैयार होता है।

सवाल: आपके पास एक ओर कलर्स है और दूसरी ओर जियो हॉटस्टार। दोनों प्लेटफॉर्म के बीच कंटेंट को कैसे संतुलित करते हैं?

जवाब: हम इसे प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं देखते। हमारा उद्देश्य सिर्फ यह है कि कंटेंट अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे। दर्शक टीवी पर देखे या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर, यह हमारे लिए कम महत्वपूर्ण है। हम इसे ऐसे देखते हैं जैसे परिवार के दो बच्चे हों,अगर दोनों अच्छा कर रहे हैं, तो टकराव की जरूरत नहीं।

सवाल: दर्शकों की बदलती पसंद को समझने के लिए आपकी रणनीति क्या है?

जवाब: भारत बहुत तेजी से बदल रहा है। पिछले 10–15 वर्षों में उपभोक्ता व्यवहार में बड़ा बदलाव आया है। अगर हम इस बदलाव को नहीं समझेंगे और उसके साथ खुद को नहीं बदलेंगे, तो हम अपने आप पीछे रह जाएंगे। कंटेंट इंडस्ट्री को लगातार दर्शकों की बदलती सोच के साथ आगे बढ़ना होता है।

सवाल:कलर्स पर पहले “सास–बहू ड्रामा” का टैग लगाया जाता था। अब कंटेंट में बदलाव कैसे आया?

जवाब: पिछले दो वर्षों में हमने दर्शकों को गहराई से समझने की कोशिश की है। हमने यह स्वीकार किया कि जो पहले काम करता था, वही भविष्य में भी चले,यह जरूरी नहीं है। आज कलर्स पर कोई भी पारंपरिक सास-बहू शो नहीं है। महादेव एंड संस एक पिता और परिवार की कहानी है, मन्नत मां-बेटी के रिश्ते पर आधारित है, जट एंड जूलियट कॉलेज रोमांस की कहानी है। यह बदलाव धीरे-धीरे दर्शकों तक पहुंचेगा।

सवाल: कई बार पूरी मेहनत के बावजूद कोई शो जल्दी बंद हो जाता है। यह स्थिति कैसे संभाली जाती है?

जवाब: यह इस इंडस्ट्री की सच्चाई है। किसी शो को बनाने में एक साल लगता है, लेकिन दर्शक आधे घंटे में फैसला कर लेते हैं। यह कठिन जरूर है, लेकिन अगर आप इस इंडस्ट्री में हैं, तो इसे स्वीकार करना ही पड़ता है। कभी सफलता मिलती है, कभी नहीं, लेकिन कोशिश रुकनी नहीं चाहिए।

सवाल: बिग बॉस और लाफ्टर शेफ जैसे रियलिटी शोज टीवी और डिजिटल, दोनों पर रिकॉर्ड बना रहे हैं। आगे क्या नया देखने को मिलेगा?

जवाब: हमारी कोशिश यही रहती है कि जो शो अच्छा हो, वह सभी प्लेटफॉर्म पर अच्छा चले। आने वाले समय में ‘डी 50’ , ‘स्प्लिट्सविला’ , ‘खतरों के खिलाड़ी’ जैसे शोज आ रहे हैं। इसके अलावा जियो हॉटस्टार पर इसरो और चंद्रयान मिशन पर आधारित एक फिक्शनल सीरीज भी दर्शक देखेंगे।

सवाल: कलर्स और जियो हॉटस्टार की सबसे बड़ी पहचान क्या मानते हैं?

जवाब: कलर्स हमेशा भारत की सामाजिक सच्चाइयों पर आधारित कहानियां दिखाने की कोशिश करता रहा है, जो समाज को प्रेरित करें। जियो हॉटस्टार पर हम अलग-अलग वर्ग के दर्शकों के लिए भावनात्मक और मनोरंजक कहानियां पेश कर रहे हैं। हमारी कोशिश यही है कि दर्शकों को लगे, जिंदगी अच्छी है।



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