- Hindi News
- Opinion
- Pandit Vijayshankar Mehta Column: Collective Meditation Boosts Child Memory
4 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

पं. विजयशंकर मेहता
मौन और ध्यान को अब घरेलू क्रिया बनाना चाहिए। कुछ काम हमारे घरेलू जीवन में नियमित होते हैं- झाडू-पोंछा, रसोई घर की व्यवस्था, बड़े-बूढ़ों और बच्चों की देखभाल। ऐसे ही मौन और ध्यान को अब शुद्ध रूप से घरेलू कामकाज बनाना चाहिए। शब्द जब ध्वनि बनकर कान से उतरता है तो धीरे-धीरे वह ध्यान में बदल जाता है।
विदेशों में इन दिनों कुछ युवक एक प्रयोग कर रहे हैं, उसका नाम है ‘रीडिंग रिदम्स’। यहां ये लोग इकट्ठे होते हैं, फिर मौन रखकर कोई पुस्तक पढ़ते हैं और उसके बाद उस पुस्तक की विषयवस्तु पर चर्चा करते हैं। हमारे यहां घरों में इसी तरह से ‘मेडिटेशन रिदम्स’ होना चाहिए। पर वहां का उल्टा होगा।
इसमें पहले चर्चा की जाए और उसके बाद जो लोग चर्चा कर रहे हैं, वो एक साथ बैठकर मौन में उतर जाएं, ध्यान लगाएं। ऐसे प्रयोग विदेश में तो एकाग्रता बढ़ाने के लिए किए जा रहे हैं, पर यदि हम अपने घरों में करेंगे तो अपनापन बढ़ेगा। घरों में किया गया सामूहिक ध्यान विशेष रूप से शिक्षा पद्धति में बच्चों की याददाश्त को बहुत बढ़ा सकता है।







